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Showing posts from June, 2011

अल्पसंख्यकों को भेदभाव से मुक्ति मिलेगी ....

अल्पसंख्यकों से भेदभाव करने वाले जाएंगे जेल    - जागरण के ई-पेपर का लिंक राजकेश्वर सिंह, नई दिल्ली अल्पसंख्यकों की ओर बड़ी हसरत से निहार रही सरकार उनके साथ होने वाले भेदभाव को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की जमीन तैयार कर रही है। कोशिशें मुकाम तक पहुंची तो कम से कम नौकरी, पढ़ाई और आवासीय योजनाओं के मामले में उनके साथ भेदभाव करने वाले को तीन माह की जेल तो होगी ही, पांच लाख रुपए का जुर्माना भी लगेगा। यदि सरकार ने अपनी योजना को अमली जामा पहनाया तो वैसा ही विवाद खड़ा हो सकता है, जैसा सोनिया गांधी की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय सलाहकार परिषद (एनएससी) द्वारा सुझाए गए सांप्रदायिक हिंसा निषेध कानून के मसौदे के वक्त हुआ था। वैसे तो अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की योजना प्रस्तावित समान अवसर आयोग के जरिए यह सुविधा समाज के सभी वर्गो के वंचित समूहों को दिलाने की थी, लेकिन खुद सरकार के भीतर उभरे मतभेदों के चलते अब यह सिर्फ अल्पसंख्यकों तक ही सीमित रहेगी। सूत्रों के मुताबिक, प्रस्तावित आयोग के लिए तैयार मसौदे में नौकरी, शिक्षा और आवासीय योजनाओं में अल्पसंख्यकों संग भेदभाव रोकने का कड़ा प्रावधान कि...

"हत्‍यारे पाक वैज्ञानिक की रिहाई के लिए ......... " इस खबर को जरूर पढ़िये...

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बड़ी ही दिलचस्प है यह खबर, इसे जरूर पढ़िये .....आभार व्यक्त करता हूं भड़ास वेब पोर्टल का, जहां से यह खबर मैंने ली है. स्क्रीन शाट चस्पा कर रहा हूं.

एक प्राचीन कथा..

प्राचीन समय की बात है, एक बार विश्व के कई देशों के गृहरक्षकों के कौशल और चातुर्य की परीक्षा लेने के लिये एक प्रतियोगिता का आयोजन किया गया. इस प्रतियोगिता में एक परीक्षा आयोजित की गयी. इन देशों में युआश्व, आपान, स्क्वात और महार्य जैसे देश सम्मिलित थे. परीक्षा हेतु युआश्व देश के गणाध्यक्ष श्रीमान दार्द जी की एक बकरी को घने जंगल में ले जाकर छोड़ दिया गया और चुनौती थी इस बकरी को कम से कम समय में खोज कर लाने की. आपान देश के गृहरक्षकों ने जंगल की तरफ प्रस्थान किया और पन्द्रह घण्टे के परिश्रम के बाद बकरी बरामद की. स्क्वात देश के गृहरक्षक इस कार्य को दस घण्टे में अंजाम दे सके. युआश्व देश की तकनीकें बड़ी उम्दा थीं, वहां के गृहरक्षकों ने तकनीकी का प्रयोग किया और पांच घण्टे मे ही बकरी को खोज लिया. अब बारी थी महान महार्य देश के गृहरक्षकों की. वे इधर गये और उधर से एक भालू जैसा जीव पकड़ लाये. महाराज दार्द जी उसे देखकर आश्चर्यचकित रह गये, उन्होंने कहा ये तो मेरी बकरी नहीं है. इस पर मगृसे के एक अधिकारी ने अपने नगरपाल को कुछ समझाया. नगरपाल उस जीव को लेकर कारागार के एक कमरे की तरफ ले गया और आधे घण्टे बाद ल...

एक इस्लामी मुल्क में एक नौजवान की सरेआम हत्या

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क्या इन्हें मानव कहा जा सकता है? यह किस धर्म को मानते हैं, कौन सी शिक्षा ग्रहण कर आये हुये लोग हैं जो एक नौजवान को सरेआम गोली दाग कर मौत के घाट उतार देते है ? इतना निर्मम , क्रूर और जघन्य आचरण!

बाबा रामदेव जी, आप क्यों सोने का दिखावा करने वालों को जगाना चाहते हैं...

किसके लिये आप कर रहे हैं ये सब. जिनके लिये कर रहे हैं उन्हें  कोई मतलब ही नहीं. जनता के दिमाग में घुसा दिया गया है कि भ्रष्टाचार खत्म हो ही नहीं सकता. बाबा की सम्पत्ति का ब्यौरा सब मांग रहे हैं, और उसमें भी छेद खोज रहे हैं लेकिन बाकी दागी-बागी किसी से आजतक पूछने की हिम्मत नहीं जुटा पाये कि भैया नेताजी, उद्योगपति जी और अफसर जी आपके पास कितना धन है, कहां कहां कितनी सम्पत्ति है. बाबा ने ट्रस्टों के बारे में बता दिया वो तो चलो ठीक है लेकिन कम्पनियों के बारे में क्यों नहीं बताया. किसी राजनीतिक दल का लेखा-जोखा लेने की हिम्मत आजतक नहीं हुई. बाबा नींबू-पानी-शहद लेने पर तैयार हो गये हैं, इस पर बहुत बड़ी आपत्ति है. चैनल वाले कह रहे हैं कि ऐसा क्यों कर रहे हैं बाबा. बाबा ने कानून तोड़ा, लेकिन सुनील कुमार की पिटाई करने वालों ने क्या कानून की प्रतिष्ठा में इजाफा किया. जिस उम्र में युवा सुरा-सुन्दरी की कल्पना करने लगते हैं, उस उम्र में बाबा एक कपड़े को पहन योग सिखाना प्रारम्भ करते हैं. हमारे जैसे बड़बड़ाने वाले कितने लोगों में हिम्मत है ऐसा करने की. बाबा ने पूरे देश में गांव गांव जाकर जागृति  फै...

सन्न और निशब्द

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