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Showing posts from June, 2009

इन पक्षियों की उड़ान देखिये

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गर्मी का प्रकोप और पशु - पक्षी

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गर्मी के प्रकोप से बचने के लिए कबूतर ऊपर बालकोनी में जाने से पहले ग्रिल पर बैठा है , बन्दर अपने बच्चे के साथ पानी के टैंक पर बैठ कर पानी निकाल ने की जुगत में है । एक चिड़िया दूसरी से कह रही है कि पानी बचाकर रखो , यह बेशकीमती है । छोटी सी चिड़िया अपना घोंसला बनाने के लिए चोंच में तिनका दबा कर ले जा रही है , धूप लगी तो पपीते की छाया में बैठ गई । आज काले काले बादल आए , सूरज को घेर लिया , लगा बरसात होगी , लेकिन हवाओं के झोंकों ने बादलों को उड़ा दिया । बरसात फिर नहीं हुई । कहीं ये लाइनें पढ़ने को मिली थीं , हाजिर हैं । आंखों में उसकी कुछ सवाल से थे , दिल में भीगे हुए कुछ ख्याल से थे , बारिश लगा हुई थी कहीं पूरी रात भर ।

वीरप्पा मोइली का बयान स्वागत योग्य

कानून मन्त्री बीरप्पा मोइली का यह बयान मायने रखता है कि जजों को अपनी संपत्ति सार्वजनिक करना चाहिये तथा इसके साथ ही उन्होंने एक न्यायाधीश पर महाभियोग लाने की भी बात की . जिस कार्य की उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश स्वयं अनुशंसा कर चुके हों उस पर राजनीतिक दलों द्वारा अमल न करना बड़े आश्चर्य की बात है . इससे पहले भी एक बार महाभियोग की कार्रवाई बड़े नाटकीय घटनाक्रम अंजाम ले चुकी है . दर - असल न्यायपालिका पर भी भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं लेकिन अब तक कोई ठोस प्रक्रिया नहीं अपनाई जा सकी . यूं तो रोज ही किसी न किसी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगते हैं , लेकिन भ्रष्टाचार के विरुद्ध कोई ठोस पहल नहीं हो सकी . वास्तव में सरकारें भ्रष्टाचार मिटाने के प्रति गंभीर हैं ही नहीं , भ्रष्टाचार मिटाने के लिये भ्रष्टाचार के कारण जानने पड़ेंगे और कारण का निवारण करना पड़ेगा . भ्रष्टाचार के मूल में अशिक्षा , गरीबी , अगाध जनसंख्या , मंहगाई , कानूनों का सटीकता से पालन न होना ...

ई० वी० एम० में बदलाव होना चाहिए.

पिछले दिनों आदरणीय सुरेश चिपलूनकर जी ने ईवी मशीनों के बारे में प्रोफेसर साईनाथ द्वारा इन मशीनों के उपयोग के विरुद्ध सन २००४ में दाखिल की गई याचिका के बारे में तथा कई विद्वान व्यक्तियों द्वारा इन मशीनों में सम्भावित गड़बड़ियों की आशंका के बारे में बताया था . कई देशों द्वारा इन मशीनों को खारिज किये जाने के बारे में और इन मशीनों में चिप द्वारा कन्ट्रोल किये जाने की सम्भावना के बारे में भी बताया . सबसे बड़ी बात यह कि मतदाता जो वोट डाल रहा है वह उस उम्मीदवार के खाते में जमा हुआ या नहीं , इन मशीनों में मतदाता की आंखों के सामने यह सुनिश्चित नहीं हो सकता कि उसका वोट कहां गया . इसलिये मेरी छोटा सा सुझाव यह है कि इन मशीनों में थोड़ा सा और सुधार किया जाये और वह यह कि इन मशीनों में एक गणक भी हो जो वोट डालने के समय ही कुल वोटों की संख्या , प्रत्याशी - वार वोटों की संख्या लगातार डिस्प्ले होती रहे . इससे फायदा यह होगा कि मतगणना के लिये लगने वाला ...

लखीमपुर खीरी में पुलिस की बर्बरता

विगत दिनों लखीमपुर खीरी में दो पुलिस वालों ने एक गर्भवती महिला को मात्र इसलिये ट्रेन से धक्का देकर नीचे फेंक दिया कि उसका पति उन पुलिस वालों को सौ रुपये नहीं दे पाया . महिला की मृत्यु हो गयी और उसकी एक बालिका लगभग अनाथ हो गयी . पुलिस वाले महिला के पति से सौ रुपये इसलिये मांग रहे थे कि उसने साइकिल ट्रेन में रख ली थी . बाद में हर गुनहगार की तरह अपनी बेगुनाही के लिये एक झूठा बहाना गढ़ते नजर आये . यदि महिला के पति ने साइकिल रख ली थी तो इसके लिये उनके पास वैध व कानूनी रास्ता था , वह टी सी को बुलाकर कानूनी कार्रवाई कर सकते थे . लेकिन यह कोई ढ़ंकी छुपी बात नहीं है कि अधिकतर लूट - पाट के मामलों में रेलवे की सुरक्षा के लिये लगाये गये पुलिस के जवान ही आरोपित पाये जाते हैं , अवैध वसूली और ट्रेन की बोगियों बेचने के किस्से तो रोज की ही बात बन चुके हैं . इस मामले में भी लीपा - पोती करने की कोशिश की गई और भा०द०स० की धारा ३०४ अर्थात गैर इरादत...

सभी भारतीयों को विशिष्ट नागरिक पहचान पत्र

इनफ़ोसिस के सह - संस्थापक नंदन नीलकेणी को सभी भारतीय नागरिकों को विशिष्ट पहचान पत्र देने की जिम्मेदारी दी गयी है . श्री नीलकेणी का दर्जा कैबिनेट मन्त्री का होगा . निश्चित रूप से यह देरी से उठाया गया अच्छा कदम है . बेहतर हो कि इस यूनीक आई कार्ड को मल्टी परपज आई कार्ड के रूप में पदस्थापित किया जाये तथा विभिन्न सूचनायें एक ही आई कार्ड के द्वारा उपलब्ध हो सकें . इसके लिये कृपया मेरी पुरानी पोस्ट देखें . लेकिन इसका लाभ तभी हो सकेगा जब इसको दलगत राजनीति से ऊपर जाकर लागू किया जा सके अन्यथा बांग्लादेशी घुसपैठियों को नागरिक का दर्जा देने की मांग करने वालों की यदि चली तो देश के मूल निवासियों को यह पहचान पत्र मिल पाये या न मिल पाये , बांग्लादेशी घुसपैठिये जरूर इन पहचान पत्रों को पाने में कामयाब हो जायेंगे . एक अन्य बड़ी समस्या नौकरशाही से तथा इस महती योजना को घोटालों से बचाकर रख्नना है , यदि यह परियोजना सुषुप्त नौकरशाही तथा घोटालों से बच सकी तभी यह कामय...

यह है उस नदी का चित्र जो कल छूट गया था

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यह है उस नदी का चित्र जो कल छूट गया था । विवेक जी और समीर जी तथा मेरे सभी मित्रों के लिए गाँव के पास बहती हुई नदी का यह फोटो प्रस्तुत है । किनारे- किनारे घास चरती हुई गाय- भैंसें आप इस चित्र में देख सकते हैं । नदी में भरा हुआ कल- कल बहता पानी एक अलग ही संगीत गुंजाता दिखाई देता है। इस बार अभी तक वर्षा नहीं हुई है जो चिंता का विषय है। प्रार्थना करें कि बरसात हो और खूब हो लेकिन कोसी में बाढ़ न आए। यदि बरसात न हुई तो किसानों की हालत बहुत ख़राब हो जायेगी। डीज़ल से सिंचाई करना काफी मंहगा है तथा कई जिलों में तो जल - स्तर इन ट्यूब - वैल के कारण काफी नीचे पंहुच गया है। कल भाटिया साहब ने जिब्राल्टर के हवाई अड्डे के बहुत सारे फोटो दिखा दिए , धन्यवाद ।

जब तक मैं नदी का फोटो खोज कर लाता हूँ तब तक इसे देखिये

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एक ईमेल में जिब्राल्टर के हवाई अड्डे का जिक्र था और फोटो भी। जिसमें यह लिखा था कि हमारे देश में जैसे रेलवे क्रॉसिंग होती है वैसे ही जिब्राल्टर में यह हवाई अड्डा है। मुझे लगा कि शायद मोर्फिंग के द्वारा इसे बनाया गया हो, बाद में मैंने गूगल में जाकर इस हवाई अड्डे को देखा, और उसके बाद यह फोटो नीचे उतार ली। इस में रनवे के बीच से सड़क गुजर रही है, जिस समय हवाई जहाज उड़ते - उतरते हैं उस समय लोग रनवे के इधर-उधर खड़े रहते हैं और उसके बाद फिर इस रनवे को पार करते हैं। आप लोग भी देखिये। लेकिन इसे बड़ा कर देखने में ही आनंद आएगा। हो सकता है कि आप में से बहुतों ने इसे देखा भी हो। गूगल बाबा का आभार इस फोटो के लिए।

मुझे तो यही स्वर्ग लगता है.

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मेरे गाँव की बाहर से एक झलक। एक फोटो पास में बहने वाली नदी का भी है जो पोस्ट करने से रह गया है। मुझे तो यही स्वर्ग लगता है।

गुलाब के दो फूल, दो बेला के और एक जिसे दसबजिया कहते हैं .

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घर में पाए जाने वाले इन कीट पतंगों की खूबसूरती निहारिये.

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यह छोटे छोटे कीट पतंगे आम तौर पर सभी घरों में दिखाई दे जाते हैं, जरा इन की खूबसूरती पर भी गौर फरमाइए।

बुलबुल के इस नवजात शिशु को आपके आशीर्वाद की आवश्यकता है ..

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इस तरह तो एक - दो माह में सभी ब्लॉग बंद हो जायेंगे - दिनेश राय द्विवेदी के नाम का सहारा लेकर कोई अन्य व्यक्ति टिप्पणी कर रहा है. .............

इसे आप लोग महज एक सेंसेशन पैदा करने की नीयत से या टिप्पणी पाने के लिए लिखा गया न समझें । " सीधी खरी बात " नामक ब्लॉग पर "टिकट की समस्या " को लेकर तथा " राजतन्त्र " पर "अश्लीलता पर सरकारी फंदा " नामक पोस्ट पर किन्हीं " दिनेश की राय " तथा " दिनेश " क्रमश : ने यह टिप्पणी रुपी धमकी दी है कि इन ब्लॉग में जो लिखा गया है उसे पढ़कर कोई दलाल तथा साइबर कैफे का मालिक इन के लेखकों पर मुकदमा कर सकता है । तथा इन श्रीमान ने बड़ा भाई और शुभचिंतक होने का दावा करते हुए यह प्रार्थना की है कि इन पोस्ट को हटा लिया जाए । मुझे ऐसा प्रतीत हो रहा है कि " पंगेबाज " पर भी इन्हीं महोदय ने कोई टिप्पणी की होगी जिसके बाद पंगेबाज से एक पोस्ट हटा दी गई । यह दोनों टिप्पणियां एक ही आदमी द्वारा की गई हैं जो " दिनेश राय द्विवेदी" होने का दिखावा कर रहा है । यह एक अशोभनीय बात है कि कोई एक व्यक्ति किसी अन...

कांग्रेस की जीत के निहितार्थ

चुनाव परिणामों को आये हुये काफी अरसा बीत गया है, कांग्रेस को आशा के विपरीत बहुत अधिक सीटें मिल गयीं जिसकी उम्मीद स्वयं कांग्रेस को दूर-दूर तक नहीं थी. विशेषकर उत्तरप्रदेश में कांग्रेस को संजीवनी मिल गयी, लेकिन इसका अर्थ यह कतई नहीं है कि लोग कांग्रेस के प्रति एकदम इतना अधिक लालायित हो गये. पूरे देश में विशेषकर उत्तरप्रदेश में मुस्लिमों का मत चुनावों को एक अलग मोड़ देने में सक्षम है. इस बार मुस्लिम मतदाताओं का ध्रुवीकरण कांग्रेस के पक्ष में निर्णायक सिद्ध हुआ. इन चुनावों में एक अच्छी बात हुई तो यह कि वामपंथियों को मुंह की खाना पड़ी तथा दूसरी अच्छी बात यह हुई कि लालू तथा पासवान को जनता ने उनकी औकात बता दी. लेकिन कांग्रेस की जीत के निहितार्थ यह हैं:- १- हिन्दुओं ने यह स्वीकार कर लिया है कि उन्हें दोयम दर्जे का नागरिक बनना ही पड़ेगा तथा उन्हें आगे चलकर मुस्लिमों की दया-दृष्टि पर निर्भर रहना कुबूल है. २- हिन्दू यह मान चुके हैं कि वे गुलाम हैं तथा गुलाम रहेंगे, उनकी रगों के अन्दर गुलामी कूट-कूट कर भर चुकी है. ३- हिन्दुओं ने यह भी स्वीकारा है कि वे इतिहास से कोई सबक नहीं लेते और न ही इतिहास की स...

सूरत में बलात्कार के अभियुक्तों की पिटाई

सूरत में भीड़ ने गैंगरेप के अभियुक्तों की पिटाई कर दी. निसंदेह इन भेड़ियों ने जो घृणित कार्य किया है उसकी अधिकतम सजा इन्हें जल्द से जल्द मिलना ही चाहिये. अभियुक्तों की पिटाई को क़ानून की दृष्टि से जायज नहीं ठहराया जा सकता। लेकिन आखिर क्या कारण है कि जनता कानून हाथ में लेने को मजबूर हो जाती है. हो सकता है कि सरकारों और उनके नुमाइन्दों को यह न दिखाई देता हो लेकिन आम आदमी को इसकी वजह मालूम है. वह है पुलिस द्वारा कायदे से और त्वरित कार्रवाई न करना तथा कानूनी दांव-पेंचों के चलते अभियुक्तों का छूट जाना या फिर सजा में अत्यधिक देरी. यदि पुलिस अपना काम ठीक से नहीं करती , वैज्ञानिक दृष्टिकोण और फोरेंसिक विज्ञानं का सहारा न लेकर ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं करती या फिर अभियुक्तों से सांठ - गाँठ कर लेती है तो इसके लिए आमजन क्यों सजा भुगते । यदि जजों की संख्या कम है तो इसके लिए आमजन तो उत्तर दा ई नहीं है । वही लोग कानून हाथ में लेते हैं जो यह जानते हैं कि क़ानून उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकता या फिर वह लोग जो यह मानते हैं कि कानू...

नगरों में बढ़ रहा एक अजीब सा चलन

नगरों में अजीब सा चलन हो गया है. नयी बनी कालोनियों में और पुरानी में भी लोगों ने सोसायटी का गठन कर लिया है और उसके बाद तीस-चालीस घर जो एक निश्चित दायरे में होते हैं अपने सम्पर्क मार्गों पर बड़े-बड़े दरवाजे लगा लेते हैं और उन पर ताला लगा देते हैं. उसके कुछ दिनों बाद उन तीन-चार सम्पर्क मार्गों में से एक ही खुला रह जाता है और धीरे धीरे वह घर एक टापू जैसे हो जाते हैं. मैंने लोगों से पूछा कि ऐसा क्यों किया जा रहा है तो कई कारण बताये गये. एक चोरी-चकारी से बचने के लिये. दूसरा ल़ड़कों की छेड़छाड़ से बचने के लिये, तीसरा गाड़ियां खड़ी कर चैन से सोने के लिये. हो सकता है कि इसमें सत्यता हो और इससे लाभ भी हो, लेकिन क्या यह मध्य-युगीन किलेबन्दी की तरह नहीं है. अलग कबीला, अलग चारदीवारी. मैं जिन सड़कों पर घन्टों घूमा करता था, अब उनमें जाते हुये भी डर लगता है कि कहां से चौकीदार प्रकट हो जाये और पूछ बैठे कि कैसे हिम्मत हुई इस सड़क पर आने की. और फिर यह कानून सम्मत भी नहीं है, सार्वजनिक प्रयोग की एक सड़क को, कुछ चन्द लोग मिलकर बन्द कैसे कर सकते हैं जिसे बनाया सरकार या नगर विकास प्राधिकरण द्वारा गया है और जिसका रखरख...

दक्षिण कोरिया में दो साल बंद रहा भारतीय कप्तान

कैप्टन चावला और उनके एक अन्य सहयोगी नवम्बर २००७ से दक्षिण कोरिया की जेल में बन्द थे. उनका अपराध था कि उनका जहाज कोरियाई कम्पनी के जहाज से टकरा गया. दिखावटी अदालती कार्रवाई चलती रही, उन्हें प्रताडित किया जाता रहा. भारत की नौकरशाही तो वैसे ही कुख्यात है. उनके परिजन बार-बार अधिकारियों से गुहार लगाते रहे, लेकिन नतीजा वही ढाक के तीन पात. आखिर तेरह जून दो हजार नौ को जाकर उन्हें दक्षिण कोरियाई जेल से आजादी मिल सकी. पता नहीं कैसे हमारे राजनयिक हैं कैसी हमारी विदेश नीति और कूटनीति है कि पिद्दी जैसे देश भी हमे आंख दिखाते रहते हैं और अपने नागरिकों का बुनियादी खयाल भी नहीं रख पाते. यह कम्पनी हमारे देश में अरबों रुपयों का कारोबार करती है, यदि उस पर दबाव बनाया जाता तो निश्चित ही इन लोगों की मुक्ति काफी समय पहले हो जाती. लेकिन चूंकि हमारे देश में जन इतने हो चुके हैं कि रोज हजारों भी मारे जायें तो फर्क नहीं पड़ता, अन्यथा कोई कारण नहीं था कि ये लोग इतना समय जेल में सड़ते रहते और यह कम्पनी इस देश से दौलत लूटकर अपने देश ले जाती रहती.

तीन कवियों और एक रंगकर्मी का निधन

पिछले दिनों तीन कवि और एक रंगकर्मी हमारे बीच नहीं रहे, ओम प्रकाश आदित्य, नीरज पुरी और लाल सिंह गुर्जर तथा हबीब तनवीर. हम सभी लोगों ने, जिन्होंने उन्हें सुन और देख रखा होगा, वे ही जान सकते हैं कि काव्य जगत तथा रंगमंच को कितनी क्षति पहुंची है. ब्लागर्स ने अपनी भूमिका निभाते हुये इन दिवंगत आत्माओं को श्रद्धांजलि अर्पित की. लेकिन धिक्कार है देश की मीडिया पर जिसके पास इन महान कवियों के लिये पांच मिनट का भी समय नहीं था. राष्ट्रीय मीडिया कहलाने वाले और सत्य को सामने रखने का दावा करने वाले इन तमाम खबरिया चैनलों के पास इतना समय भी नहीं था कि इन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर सकता, जबकि पुलिस कमिश्नर की कुतिया खोने पर घंटों बरबाद कर सकता है. यद्यपि हबीब साहब के ऊपर कुछ मिनट देकर खानापूरी कर दी.

कैगा के लापता परमाणु विज्ञानी

कैगा के परमाणु वैज्ञानिक महालिंगम सोमवार को आवासीय परिसर से लापता हुये. पुलिस की सक्रियता का आलम यह रहा कि विगत शनिवार को ही उनका शव भद्रा बांध से मिल सका. कैगा के निदेशक यह कहते दिखाई दिये कि उनके पास कोई संवेदनशील जानकारी नहीं है. पुलिस यह कहती रही कि उनकी खोज पूरी सक्रियता से की जा रही है और वह पहले भी कई दिनों के लिये घर से गायब हो चुके हैं. घरवालों के ऊपर समय पर जानकारी न देने का आरोप भी लगाया. एक परमाणु वैज्ञानिक के गायब होने के मामले में ऐसी उदासीनता और ऐसी निष्क्रियता! फिर आम आदमी के साथ क्या होता होगा, सहज ही अन्दाजा लगाया जा सकता है.