सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण तथा जनता के पैसों का दुरूपयोग
बरेली में कई मन्दिर मस्जिद सड़क घेर कर बनाये गये हैं. ऐसा लगता है कि पिछले बीस-पचीस सालों में ही यह सब उग आये हैं. पिछले दिनों मोदी की चलाई एक मुहिम याद आ गयी जो अच्छी थी लेकिन जिसका व्यापक विरोध हुआ और मोदी (जो मुस्लिम विरोधी तो पहले ही थे, हिन्दू विरोधी भी ठहरा दिया), जिसमें सार्वजनिक स्थलों पर अतिक्रमण किये हुए मन्दिर-मस्जिद-मजार ध्वस्त किये जा रहे थे. काश ऐसा पूरे देश में हो जाये. जिला और मंडल स्तर के अधिकारियों के लिये जो बंगले दिये गये है वह कई-कई बीघों में फैले हैं जिनकी आवश्यकता समझ में नहीं आती. आखिर एक परिवार को कितनी जगह चाहिये रहने के लिये? यहीं विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष के लिये एक मकान बनाया है प्राधिकरण में जो लगभग ३५०-४०० गज में बना होगा, डुपलेक्स है और मेरे खयाल से छ:-सात कमरे होंगे जो सभी वातानुकूलित लगते हैं, बाहर से देखकर अंदाजा लगाया था. दस-बारह नौकर, जो सम्भवत: सरकारी ही होंगे, सेवा में लगे हुये दिखाई दिये. सुरक्षा के लिये भी एक सब-इन्स्पेक्टर रैंक का अधिकारी लगा था. मैं यह सोच रहा हूं कि अगर एक अधिकारी के ऊपर इतना खर्चा आता है तो ऐसे लाखों अधिकारियों पर जनता क...