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Showing posts from December, 2011

भ्रष्टाचार पर अरण्य रोदन के विषय में

बात भ्रष्टाचार की खूब चल रही है, नित नये सु/कुविचार और सु/कुतर्क भी सुनने को मिलते हैं. एक और भी विचार आजकल चलन/फैशन में है, जिसे हमारे यहां के बुद्धिजीवी ब्लाग/सोशल साइट्स और अखबारों में निरन्तर प्रकाशित कर/करवा रहे हैं. वह है कि भ्रष्टाचार के लिये भ्रष्टाचार मिटाने के लिये आम आदमी को आगे आना चाहिये और उसे भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ना चाहिये, भ्रष्टाचारी भी समाज का अंग हैं, उनका बहिष्कार होना चाहिये. यदि आप घूस देंगे नहीं तो लेने वाले को मिलेगी कैसे और आप स्वयं क्या करते हैं, नक्शे में कुछ और दिखाया जाता है, बनाया कुछ और जाता है, रजिस्ट्री कराते समय स्टाम्प कम लगे, इसलिये आप कम दाम दिखाते हैं, या फिर रेलयात्रा में सीट पाने के लिये, वगैरा वगैरा. इसमें सारी बातें सही हैं और मैं इससे सहमत भी हूं, लेकिन मैं उनके इस विचार से कतई इत्तफाक नहीं रखता कि भ्रष्टाचार इसलिये बढ़ रहा है कि आम आदमी ऊपर लिखी गयी तथा इसके अतिरिक्त इसी प्रकार की और गलत चीजों को अपनाता है तथा बढ़ावा देता है. जैसा कि मैंने पाया है कि आम आदमी खुशी खुशी भ्रष्ट आचरण को बढ़ावा तब देता है जब वह स्वयं अवैधानिक कार्य करता है जि...

भोपाल में कुपोषण से बच्ची की मौत - दोषी कौन?

भोपाल में एक बच्ची की मौत कुपोषण अर्थात भूख के चलते हो गई. खबर के मुताबिक इस दो वर्षीय बच्ची के माँ-बाप श्रमिक थे. बच्ची बीमार हुई, उसे लेकर अस्पताल पहुंचे,जहाँ उसकी मौत हो गयी.जैसे कि हमेशा होता आया है कि इस देश में भूख से कोई नहीं मरता, इसकी मौत के कारण को सुनिश्चित करने के लिए पोस्ट-मार्टम कराया गया और जिसमें यह पाया गया कि उसके सीने और दिल में चोट पाई गयी. और फिर उस बच्ची के माँ-बाप के विरुद्ध मुक़दमा लिख दिया गया-गैर इरादतन हत्या का.   क्या कोई माँ-बाप इतने निष्ठुर हो सकते हैं कि पैदा करने के दो साल बाद तक उसे पालने के बाद अपनी बेटी को मार दें, भले भूखा रखकर ही सही. ऊपर से ताज्जुब यह कि बच्ची की मृत्यु जून में हुई थी और मुक़दमा अब दर्ज हुआ है. हम थोथी नैतिकता की दुहाई देने वाले लोग, धिक्कार है हम पर. सबसे अधिक गुस्सा आता है मुझे उन सरकारी लोगों पर, जो जब तक लाइन के इस पार खड़े होते हैं, उनके अंदर संवेदनाओं का समुद्र हिलोरें लेता रहता है, लेकिन लाइन के उस पार पहुंचते ही उनकी आँखे मुंद जातीं हैं, वह संवेदनाओं का समुद्र सूखकर एक मरुभूमि में बदल जाता है. लोग चिल्ला रहे हैं कि नई प...

कई महीनो के बाद अपने अकाउंट में लाग-इन !

आज मैं कई महीनो के बाद अपने अकाउंट को लाग-इन कर सका. ubuntu linux को इन्स्टाल कर लिया है. 3G मोडेम बढ़िया कार्य कर रहा है. लेकिन एक दो कठिनाईयां हैं. पहला कि बराहा को कैसे इन्स्टाल किया जाए जिससे कि मैं रोमन में टाइप कर हिंदी लिख सकूं तथा दूसरा यह कि skpye किस तरह से इन्स्टाल हो गया और इसमें usb वेब-कैम कैसे इन्स्टाल हो सकेगा.