भ्रष्टाचार पर अरण्य रोदन के विषय में
बात भ्रष्टाचार की खूब चल रही है, नित नये सु/कुविचार और सु/कुतर्क भी सुनने को मिलते हैं. एक और भी विचार आजकल चलन/फैशन में है, जिसे हमारे यहां के बुद्धिजीवी ब्लाग/सोशल साइट्स और अखबारों में निरन्तर प्रकाशित कर/करवा रहे हैं. वह है कि भ्रष्टाचार के लिये भ्रष्टाचार मिटाने के लिये आम आदमी को आगे आना चाहिये और उसे भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ना चाहिये, भ्रष्टाचारी भी समाज का अंग हैं, उनका बहिष्कार होना चाहिये. यदि आप घूस देंगे नहीं तो लेने वाले को मिलेगी कैसे और आप स्वयं क्या करते हैं, नक्शे में कुछ और दिखाया जाता है, बनाया कुछ और जाता है, रजिस्ट्री कराते समय स्टाम्प कम लगे, इसलिये आप कम दाम दिखाते हैं, या फिर रेलयात्रा में सीट पाने के लिये, वगैरा वगैरा. इसमें सारी बातें सही हैं और मैं इससे सहमत भी हूं, लेकिन मैं उनके इस विचार से कतई इत्तफाक नहीं रखता कि भ्रष्टाचार इसलिये बढ़ रहा है कि आम आदमी ऊपर लिखी गयी तथा इसके अतिरिक्त इसी प्रकार की और गलत चीजों को अपनाता है तथा बढ़ावा देता है. जैसा कि मैंने पाया है कि आम आदमी खुशी खुशी भ्रष्ट आचरण को बढ़ावा तब देता है जब वह स्वयं अवैधानिक कार्य करता है जि...