ब्राण्ड नेम न लिखूं तो क्या करूं??
मेरे एक मित्र हैं सर्जन. हड्डियों के. अच्छे हैं लिहाजा खूब भीड़-भाड़ भी रहती है. पिछले दिनों मुझे कुछ तकलीफ हुई तो मैं उनके पास गया. यद्यपि मेरे घर से काफी दूर है उनका अस्पताल, लेकिन दो सौ रुपये बचाने का लोभ मैं संवार नहीं सका. ऊपर से मित्र तो हैं ही. पहुंचा, उन्होंने देखा, थोड़ी गंभीर मुद्रा बनाई, और कागज पर कुछ शब्द घसीटने लगे. मुझे लगा कि एक अदद एक्स-रे तो जरूर लिखा होगा और भी पता नहीं क्या होगा उनकी कलम से निकलता हुआ. खैर मेरे हाथ को थोड़ा पकड़ कर हिलाया-डुलाया और एक बैन्डेज लगा दिया. बोले आठ-दस दिन हाथ को आराम देना, बस. काफी का आर्डर दे चुके थे. बैठना आवश्यक था, मुझे लग रहा था कि मैं अनावश्यक रूप से उनके काम में खलल डाल रहा हूं, मैंने आशंका जताई तो वे बोले कि चलो "तू आ गया है तो कम से कम थोड़ी देर का मिल गया है, वरना वही रूटीन". हम लोग बचपन के साथी हैं, एक दूसरे की टांग खिचाई का मौका ढूंढ ही लेते हैं. मैं ने काफी के सिप भरते भरते सवाल दाग दिया कि "अभी मेरी जगह कोई और होता तो तू क्या करता, ईमानदारी से बताना?" उत्तर मिला "एक एक्स-रे, विटामिन और कैल्सियम तथा दर्द न...