सुविधाशुल्क लेने का एक नायाब तरीका
मेरे एक मित्र ने मुझे बताया कि उनके एक अधिकारी ने उन्हें दो टिकिट कैंसिल कराने को दिये. चार लोगों की रिटर्न जर्नी के टिकट थे, दिल्ली से चेन्नई तक के एसी - द्वितीय के. उन्होंने टिकिट कैंसिल कराये और पैसे वापस कर दिये जो कई हजारों में बनते थे. एक साधारण सी प्रक्रिया थी यह. अगले वर्ष अपनी एल०टी०सी० हेतु उन्हें रेलवे टिकिट के नम्बरों की आवश्यकता थी, जो उनसे खो गये थे. इस हेतु वे मित्र अपनी रिजर्वेशन स्लिप तलाशने रिजर्वेशन कार्यालय में पहुंचे, जहां पहुंचकर उनके होश उड़ गये. उन्हें वहां अपने कार्यालय के लगभग सभी कर्मचारियों के द्वारा इसी प्रकार कैंसिल कराये गये टिकिटों की स्लिप्स मिलीं जो कि सैकड़ों की संख्या में थीं और उनकी राशि कई लाख बैठती थी. बाद में यह पता चला कि यह तरीका उन अधिकारी द्वारा घूस लेने के लिये बनाया गया था. जिससे वह पैसा लेते उसके लिये वह स्लिप भरकर दे देते और टिकिट मंगा लेते, बाद में उन टिकिटों को कैंसिल कराकर पैसा अपने हवाले कर लेते. है न नायाब तरीका.