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Showing posts from October, 2010

यह पुलिस वाले हैं या फिर जल्लाद

जालंधर के भोगपुर थाने में  धोखाधड़ी के मामले में पूछताछ के लिए लाये गये एक व्यक्ति के साथ लेकिन पुलिस वालों ने उसके साथ जानवरों जैसा सुलूक किया। आरोपी को थाने के एक कमरे में जमीन पर लिटा दिया गया और फिर उसकी जेब से पर्स और कागज निकाल लिए गए। एक पुलिस वाले वाले ने उसको ऐसे दबोच लिया कि वो उठ ही न पाए और फिर दूसरे पुलिस वाले ने उसके शरीर पर इतनी बेहरमी से बेल्ट बरसाईं कि हिल तक नहीं सका। आरोपी चीखता-चिल्लाता रहा, लेकिन  पुलिस वाले उसके शरीर पर बेल्ट बरसाते रहे।  आरोपी  के पास बचने का एक ही तरीका था कि वह या तो पुलिस वालों की मर्जी के अनुसार अपना जुर्म कबूल कर ले या फिर जानवरों की तरह पिटता रहे। जब मामला मीडिया में आ गया तो एएसआई अवतार सिंह और हवलदार जागीर सिंह को सस्पेंड कर दिया गया तथा  होमगार्ड के जवान हरिजंदर सिंह के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दे दिए गए। हमारी सारी कानून व्यवस्था अंग्रेजों की देन है. संविधान के कई महत्वपूर्ण हिस्से भी ब्रिटिश संविधान से लिये गये हैं. अभी भी अंग्रेजों के बनाये हुये अधिकतर कानून देश में लागू हैं और उन कानूनों के द्वारा भारत में शासन-...

एक और अश्लील विज्ञापन

पिछले लेख में मैंने लिखा था कि किस प्रकार के अश्लील विज्ञापन टीवी चैनल पर दिखाये जाते हैं तथा किस प्रकार सीरियलों के रीयलिटी शोज के नाम पर अश्लीलता फैलाई जा रही है. यह भी लिखा था कि खबरिया चैनल जो अपने आप को सच का रखवाला, न डरने वाला और भी पता नहीं क्या क्या कहते हैं, पैसा कमाने की खातिर किस तरह के विज्ञापन दिखा रहे हैं. अभी यह लेख ताजा ही था, अखबार की भाषा में कहें तो स्याही भी नहीं सूख पाई थी कि एक प्रादेशिक न्यूज चैनल पर, जोकि एक बड़े सुसंस्कृत सज्जन द्वारा चलाया जाता है, मूसली द्वारा बनाये जाने वाली एक औषधि का विज्ञापन दिखाई दिया. यह विज्ञापन और भी अधिक अश्लील था. विज्ञापन में एक युवक या व्यक्ति दंड लगाता हुआ दिखाया जाता है. दंड लगाने की प्रक्रिया में व्यक्ति पहले जमीन पर छाती के बल लेट सा जाता है और हाथों को जमीन पर टिकाकर तथा पैरों के पंजों के आधार पर अपने शरीर को ऊपर उठाता है, फिर नीचे ले जाता है. इस विज्ञापन में व्यक्ति दंड तो लगाता है, लेकिन उसके हाथ जमीन पर नहीं टिके हुये हैं. अब आप अन्दाजा लगा सकते हैं कि विज्ञापन क्या दिखाना चाहता है. यहां एक बात और बताना चाहता हूं कि इस प्र...

टीवी सीरियलों तथा विज्ञापनों के नाम फैलाई जा रही अश्लीलता..

टेलीविजन का रिमोट जब हाथ में होता है तो अक्सर ही डिस्कवरी या नेशनल जियोग्राफिक देखने के लिये सास-बहू चैनलों से आगे पीछे जाने के लिये बटन दबाना पड़ जाते हैं. आज ऐसे ही करते समय अचानक एक दृश्य सामने आ गया. यह दृश्य वी टीवी के एक प्रोग्राम "गेट गार्जियस" का था. यद्यपि मैं इस तरह के दृश्य वाले चैनल को स्किप कर देता हूं, लेकिन इस पर एक बड़ा ही विस्मयकारी या फिर कह लीजिये कि अट्रैक्टिव कैप्शन आ रहा था. इस कैप्शन की इबारत का तजुर्मा कुछ इस प्रकार था कि "गेट गार्जियस के पूरे अन्सेन्सर्ड दृश्यों को देखिये ....../......./  पर. हालांकि जो दृश्य उस समय आ रहा था वह भी कम खतरनाक नहीं था. दो लड़के और एक लड़की पत्ते से लपेटे हुये एक पेड़ पर एक दूसरे से लिपटे हुये खड़े थे और इस दृश्य को कैमरे शूट किया जा रहा था. जब पूरे देश में प्रसारित होने वाले कार्यक्रम में ऐसे दृश्य दिखाये जा रहे हैं तो अन्दाजा लगाना कठिन नहीं कि ......./........./ पर किस तरह के दृश्य उपलब्ध होंगे. आजकल युवाओं में इस तरह के टीवी कार्यक्रमों के लिये बेइन्तहा दीवानगी है, इसलिये इस पीढ़ी को किस ओर धकेला जा रहा है, इस की कल्पना...

चिट्ठाजगत से फीड प्राप्त करने के लिये विजेट

मेरे पिछले ब्लाग में कहीं कोई वायरस घुस गया था. लिहाजा इस ब्लाग पर मैंने कोई भी थर्ड पार्टी विजेट नहीं लगाये. मुझे दिक्कत हो रही थी कि मैं ब्लागवाणी के बंद होने के बाद फीड प्राप्त नहीं कर पा रहा था. कुछ रेडीमेड स्क्रिप्ट मिली, लेकिन मेरी आवश्यकताओं के अनुरूप नहीं थीं. feeds2js.org पर एक प्रारूप उपलब्ध था, बस आवश्यकता थी, उसमें अपनी आवश्यकतानुरूप सुधार करने की, उसे करने के बाद मैंने चिट्ठाजगत की फीड प्राप्त करने के लिये संशोधित कर अपने ब्लाग पर लगा लिया. कोड नीचे दिया गया है. कृपया आप लोग मुझे बताने की कृपा करें कि इस नये ब्लाग को खोलने पर तो वायरस/मालवेयर की चेतावनी तो नहीं आ रही. <br /> <a href="http://feed2js.org//feed2js.php?src=http%3A%2F%2Fr.chitthajagat.in%2Fcjlaghu&chan=title&num=20&am...

कई महीनों पहले सी-डेक द्वारा भेजी डीवीडी अभी तक रास्ते में है.

एक सरकारी संस्था है सी-डेक. यह संस्था भारत में कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग तथा एप्लीकेशन साफ्टवेयर संबंधी विकास कार्यों को करती है. इसने भारतीय भाषाओं तथा लिपियों के प्रयोगार्थ कई अच्छे साफ्टवेयर बनाये हैं तथा इनके विपणन का कार्य किया है. कार्यालयीन प्रयोग हेतु भारतीय भाषाओं के लिये फान्ट भी बनाये हैं. हिन्दी में टाइपिंग हेतु सर्वप्रथम एक बहुत अच्छा साफ्टवेयर जिसका नाम "लीप" था, इसी संस्था की देन थी. विगत दिनों इसी संस्था ने एक स्वदेशी आपरेटिंग सिस्टम, जो लाइनक्स आधारित है, BOSS अर्थात BHARAT OPERATING SYSTEM SOLUTIONS भारत में लांच किया गया. सी-डेक की वेब-साइट पर यह आपरेटिंग सिस्टम डाउनलोड करने के लिये उपलब्ध कराया गया. इस सुविधा के साथ ही साइट पर यह भी व्यवस्था की गयी थी कि जो व्यक्ति इस आपरेटिंग सिस्टम को डीवीडी/सीडी में मंगाना चाहें, वे व्यक्ति अपना नाम-पता-ईमेल आईडी आनलाइन सबमिट कर दें. ऐसा करने पर उनके लिये BOSS की डीवीडी/सीडी भेज दी जायेगी. मैंने भी इस आकर्षक सुविधा का लाभ उठाने हेतु आनलाइन आवेदन कर दिया और तुरन्त ही संदेश आ गया कि आप का नाम-पता रजिस्टर्ड हो गया है और आपको ...

चतुर्वेदी जी की पोस्ट पर टिप्पणी

बहुत नन्हीं सी पोस्ट है. एक बड़े स्वनामधन्य विद्वान व्यक्ति हैं.  जिनका ब्लाग कहता है "यह ब्लॉग हिन्दी में मीडिया,मासकल्चर,राजनीति,ज्योतिष आदि विषयों पर विज्ञानसम्मत विश्लेषण का केन्द्र है।..........। ...... के हि‍न्‍दी वि‍भाग में प्रोफेसर। मीडि‍या और साहि‍त्‍यालोचना का वि‍शेष अध्‍ययन". आजकल रामदेव जी के ऊपर विशेष कृपा है. जाहिर है कि अपनी तरफ से बहुत अच्छा लिख रहे हैं.  टिप्पणियों की दरकार है तो बाक्स भी खुला है और उसमें कोई दरवाजा भी नहीं. मतलब कि माडरेशन लगाया नहीं और एनोनिमस तक की सुविधा दे रखी है. आज प्रात: बड़ी तारीफ की थी बाबा की, एक टिप्पणी मैंने भी लगा दी, थोड़ी देर बाद महोदय ने टिप्पणी उड़ा दी. अभी जब दोबारा देखा तो पता चला कि मेरे साथ और भी टिप्पणियां हटाई गयी थीं, इस तर्क के साथ कि विषय से हटकर थी और अनर्गल थीं.  उनकी नय़ी पोस्ट पर टिप्पणी करना चाहता था, लेकिन उनके ब्लाग पर नहीं, यहां कर रहा हूं. "बाबा ने जो अर्जित किया है, कोई भी कर सकता है. लेकिन हसद होती है, जब यह लगता है कि मुझसे कम पढ़ा-लिखा व्यक्ति इस ऊंचाई तक कैसे पहुंच गया. मुझे भी होती है जब मैं अपने से आग...

विकास प्राधिकरण द्वारा विकसित रूफ टाप रेन वाटर कलेक्शन

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विकास प्राधिकरणों से शहर का विकास होता हो या न होता हो, अधिकारियों का विकास अवश्य हो जाता है. शहर के विकास प्राधिकरण ने सरकारी कार्यालयों में रूफ टाप रेन वाटर हार्वेस्टिंग के लिये वर्षा-जल संग्रहण हेतु पिट/पूल बनवाये. कहने की आवश्यकता नहीं कि इस परियोजना के लिये करोड़ों रुपये सरकार ने जारी किये.  लेकिन चित्र खुद बयान कर रहे हैं कि इन का हश्र क्या हुआ. एक सरकारी कार्यालय में बनाये गये इन गड्ढों का हाल देखिये. न तो इन्हें मानकों के हिसाब से खोदा गया, न ही इनमें उतना कोयला इत्यादि डाला गया, जितने की आवश्यकता थी. पहले वर्ष गड्ढ़े बनाये गये लेकिन इन्हें जोड़ने की जहमत नहीं उठाई गयी. पता चला कि दूसरे वर्ष आकर कुछ सफाई की गयी और फिर नया बोर्ड लगा दिया गया, कुछ फोटो-वोटो भी खिंचवाये गये. जिस छत से पानी को नीचे लाकर गड्ढ़े में भरा जाना था, उस छत से आने वाला पाइप टूटा हुआ है, जिसे जोड़ने की जहमत उठाई ही नहीं गयी. धीरे-धीरे लोगों ने भी इस गड्ढे को कूड़ाघर बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी. शायद सभी सरकारी परियोजनायें इसी तरह से लागू की जाती हैं. और फिर इन्हें लागू करवाने वाले भी तो भारतवासी ही हैं, जब उन...

तानाशाह भारत में भी हैं

तानाशाहों के दो साक्षात अवतारों से परिचय कर लीजिये. पहला आदरणीय जूनियर बुखारी साहब, वही स्वर्गीय सीनियर साहब के सुपुत्र जो पुत्र होने के नाते मुस्लिमों के मसीहा बने हुये हैं. यह बुखारी साहब लखनऊ में एक पत्रकार वार्ता कर रहे थे, राम जन्मभूमि से सम्बन्धित वाद के सम्बन्ध में.  इसी प्रेस कान्फ्रेंस में एक पत्रकार वहीद चिश्ती साहब ने एक सवाल पूछ लिया कि चूंकि वह भूमि अयोध्या के राजा दशरथ के नाम से कागजातों में चढ़ी हुई है, इस नाते राम जन्मभूमि के लिये भूमि सौंप कर विवाद खत्म करने में क्या परेशानी है. बस फिर क्या था शांति के प्रवर्तक धर्म इस्लाम के (भारत में) सबसे बड़े धार्मिक नेता बुखारी साहब ने पत्रकार महोदय के खिलाफ फतवा जारी कर दिया और इस फतवे पर तुरन्त अमल हुआ. वहां मौजूद शान्ति के पुजारियों ने पत्रकार चिश्ती साहब को पीटना प्रारम्भ कर दिया और फिर बुखारी साहब ने भी. और हो भी क्यों न, आखिर इसी शान्ति के पथ पर चलकर ही कश्मीर को दारूल-हरब में बदला जा सका है. जैसे तैसे पत्रकार महोदय को बचाया जा सका और खानापूरी के नाम पर बमुश्किल रिपोर्ट दर्ज कराई जा सकी. इस रिपोर्ट का होगा क्या. बुखारी साह...

जाने क्या भूल हुई जो ये सजा हमका मिली - मेरे पहले ब्लाग को गूगल ने प्रतिबन्धित कर दिया

अभी पांच-छ: दिन पहले रात में भला चंगा था. सुबह को अन्तर्जाल पर ब्लाग का अड्रेस (भारतीय नागरिक - Indian Citizen -> incitizen.blogspot.com) लिखा तो पाया कि गूगल देव ने ब्लाग को हटा दिया है. सन्निपात सा हो गया. बाद में जैसे-तैसे विनती की, वैसे ही जैसे एक निरीह रिक्शाचालक  थानेदार के आगे घिघियाता है और थानेदार साहब अपना गुस्सा उतारकर फिर कहीं कृपादृष्टि डालते हैं, तमाम ये-वो के बाद अपने ब्लाग के दर्शन हो पाये. खैर ब्लागर में लाग-इन किया तो पाया कि दरवाजे पर एक नोटिस चिपका था कि किन्हीं शर्तों का उल्लंघन कर दिया है या हो गया है, लिहाजा यह सजा गूगल बाबा ने दे दी. लिहाजा तू नहीं और सही, और नहीं और सही के फलसफे पर आगे बढ़ते हुये कोशिश कर रहा हूं कि पिछले ब्लाग से सभी आलेख इस नये ब्लाग पर आ जायें. अब से इस नये ब्लाग (indzen.blogspot.com) के साथ . फिर एक ब्लाग वर्डप्रेस पर पंजीकृत कराया (भारतीय नागरिक-Indian Citizen -> incitizen.wordpress.com) और दूसरा यह. गनीमत यह हुई कि ब्लाग को एक्स्पोर्ट और इम्पोर्ट किया जा सकता था, लिहाजा उसे एक जगह से एक्स्पोर्ट किया और दूसरी जगह इम्पोर्ट और अब आप...

बीस हजार का फिफ्टी परसेन्ट - बाढ़ तुम रोज आया करो

जी हां, बिल्कुल ठीक पढ़ रहे हैं आप. यह घटना करीब बीस दिन पहले की है. मेरे एक मित्र प्रशासनिक अधिकारी हैं, जूनियर रैंक पर, दुर्भाग्य से ईमानदार जीव हैं और अभी भी सरवाइव कर रहे हैं.  एक जिले की तहसील में तैनात हैं, जहां बाढ़ आई हुई है. इस विभीषिका में कई लोग मारे जा चुके हैं, उनके घर-बार बाढ़ के पानी में बह चुके हैं. बेघरो-बार, बेसरो-सामान लोगों की मदद का इजहार भी किया जा रहा है आश्वासन देने के साथ. जहां वे तैनात हैं वहां भी बाढ़ ने प्रकोप दिखाना प्रारम्भ कर दिया. आज मुलाकात हुई तो मैंने उनसे इस बारे में पूछ लिया. एक बड़ी  सी गाली देकर फट पड़े.  " बीस हजार का चेक दिया गया कि राहत का काम प्रारम्भ कराइये, थोड़ी देर बाद ऊपर से एक  फोन आ गया कि चेक कैश कराने के बाद फिफ्टी परसेन्ट भिजवा दीजिये."

मेरे ब्लाग में मैलवेयर नहीं है.

आप लोगों ने मेरे ब्लाग को देखा होगा. कुछ बन्धुओं ने मैलवेयर डिटेक्ट होने की जानकारी दी, तत्पश्चात मैंने भी इसे देखा. सफारी और फ्लाक में खोलते समय मैलवेयर होने की चेतावनी मिलती रहती है जबकि इन्टरनेट एक्सप्लोरर में यह ठीक खुलता है. मैंने एक-एक करके सारे विजेट्स भी हटा दिये लेकिन काम नहीं बना, उलटे मेरा ब्लागरोल गायब हो गया. मेरी आपसे विनम्र प्रार्थना है कि इस तथाकथित मैलवेयर से न डरें. दूसरा यह (मेरी असभ्यता और धृष्टता को क्षमा करें और मेरे सारे प्रियजन यदि टिप्पणी के साथ अपने ब्लाग का address दे दें तो मैं आसानी से उन्हें अपने ब्लागरोल में जोड़ लूंगा. धन्यवाद.

मैलवेयर हटाने के चक्कर में ब्लाग रोल भी गायब हुआ..

कई मित्रों ने बताया कि मेरा ब्लाग खोलने की कोशिश करने में मैलवेयर की वार्निंग आती है. मैंने एक-एक कर सारे विजेट्स हटाकर देखने की कोशिश की कि किस गैजेट में मैलवेयर है. मैलवेयर तो नहीं मिला अलबत्ता ब्लाग रोल गायब हो गया. मैंने सुरक्षित की हुई टेम्पलेट को अपलोड कर री-स्टोर करने का प्रयत्न किया लेकिन ब्लाग रोल फिर भी वापस नहीं आया. क्या कोई ऐसा तरीका है जिससे मैं अपना ब्लागरोल वापस पा सकूं...

बापू और शास्त्री जी, आप दोनों को नमन...

एक ने आजादी दिलाई तो दूजे ने उस आजादी को आगे बढ़ाने का प्रयत्न किया. एक के लिये तो कुछ लोग याद कर रहे हैं, दूजे के हिस्से में वह भी थोड़ा मुश्किल है. मैं आज इन दोनों ही महान आत्माओं को नमन करता हूं...