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Showing posts from July, 2010

मृतप्राय स्थिति हेतु क्षमा

इस मृतप्राय स्थिति हेतु सबसे पहले क्षमा कीजिये, क्योंकि मेरा मानना है कि कोई व्यक्ति जो पढ़ना लिखना जानता है और इसके बावजूद पढ़ता नहीं तो वह मृतप्राय ही है. 24 जुलाई से 31 जुलाई तक पढ़ूंगा तथा कुछ लिखने की भी चेष्टा करूंगा. अपने प्रिय ब्लागों पर टिप्पणियां अवश्य करूंगा. फिर सम्भवत: बीस बाईस दिनों का ब्रेक और फिर यूंही. शायद यह प्रक्रिया कुछ महीनों तक जारी रह सकती है. कुछ बातों पर मुझे राह दिखाने की कृपा करें. १.पहला यह कि नेट बुक कौन सी ली जाये. Samsung की 14600- में उपलब्ध है. २.लखनऊ से बलिया तक के इलाके के लिये कौन सा कनेक्शन अच्छा रहेगा. टाटा फोटान, रिलायन्स नेटकनेक्ट या फिर कोई अन्य. ३.मोबाइल को कम्प्य़ूटर से जोड़कर सर्फिंग करना उचित रहेगा अथवा नहीं. अब एक पुस्तक के बारे में - मैंने विगत दिनों डा०अमृत लाल नागर का लिखा हुआ उपन्यास "मानस का हंस" पढ़ा. उपन्यास गोस्वामी तुलसीदास की जीवनी पर आधारित है. लेकिन गोस्वामी तुलसीदास जी की जीवनी को इतने रोचक ढ़ंग से डा०अमृत लाल नागर के अलावा शायद ही कोई दूसरा लेखक लिख पाता. नागर साहब ने इस उपन्यास के जरिये गोस्वामी जी को पाठक की आंखों के साम...

काले मेघा आये रे

काले मेघा आये रे सबके मन को भाये रे झूम झूम के नाचे मुनिया सब का मन हरषाये रे मेघा काले गरजेंगे जोर शोर से बरसेंगे ताल तलैया पोखर सारे पानी से उफनाये रे छोटू नाव चलायेगा संग संग गाना गायेगा अम्मा अंदर खड़ी रहेगी उस पर नजर गड़ाये रे खेत हरे लहरायेंगे पंछी सुर में गायेंगे इसी खुशी में देखो भैया मेंढ़क भी टर्राये रे खूब फसल लहरायेगी सुख समृद्धि छायेगी कोसी मैया अबकी बारी बाढ़ कहीं न लाये रे (प्रार्थना)

गीत प्यार का कैसे गाऊं पेट में छाले पड़े हुये हैं.

गीत प्यार का कैसे गाऊं पेट में छाले पड़े हुये हैं. कैसे दीपक राग सुनाऊं घर अंधियारे पड़े हुये हैं. बाप की खांसी, मां की धड़कन सब के सब अब बढ़े हुये हैं. बिटिया बैठी ब्याह को अब तक दाम वरों के चढ़े हुये हैं. बापू कुछ मत लेकर आना बच्चे जल्दी बड़े हुये हैं. घास की रोटी खाये गरीबा देव इसी पर अड़े हुये हैं. भाई बैठा सोच रहा है क्यों तेवर सबके चढ़े हुये हैं घर की कुण्डी, कड़ियां, चौखट नाम सभी पर चढ़े हुये हैं. देख के निकलो घर से बाहर दूत यमों के खड़े हुये हैं.

क्वीन्स बेटन का आना

क्वीन्स बेटन आ रही है. शहर मुस्तैद है. चकाचक झकास वर्दी में पुलिस वाले. ट्रैफिक को संभालते, न जाने अभी तक कहां छुपे बैठे थे. सड़कों के गड्ढ़े भी बराबर भरे जा रहे हैं. सफेदपोश निकल आये हैं, बुर्राक सफेद कपड़ों में. धनपतियों ने पोस्टर छपवा दिये हैं क्वीन्स बेटन के स्वागत में. प्रायोजक कम्पनियां अपने हाईली-पेड कर्मचारियों को अपने उत्पादों के साथ स्वागत में दौड़ा रही हैं. शहर में दीवानगी छा गयी है. क्वीन्स बेटन. लगता है जैसे कि यह एक जादू की छड़ी है जिसके आते ही सारी परेशानियां छू-मंतर होने जा रही हैं. अब न मंहगाई रहेगी, न कोई भूखों मरेगा. न हारी की चिन्ता न बीमारी की. बेरोजगारी का खात्मा होने ही वाला है. सड़क घेर कर प्रारम्भ में केंचुये और बाद में सर्प बन जाने वाले दुकानदार भी आज नहीं दिखाई दे रहे. पुलिस और प्रशासनिक अफसर बड़े मुस्तैद हैं. आम जनता के काम शायद ही कभी इतनी मुस्तैदी से किये होंगे. वही सड़क जिस पर ये बेटन गुजरेगी, चमक रही है. गड्ढे भर दिये गये. चूना डाल दिया गया है. स्वनाम-धन्य लोग बेटन के इन्तजार में एकत्रित हैं. आखिर यही तो गौरव हैं शहर के. वह किसान जो अपनी हड्डी तक गला देता है खेत...

प्रधानमन्त्री के खाने में मिलावट हो गयी तो हाहाकार मच गया

जनता को अरहर दाल में खेसरी मिलाकर दी जा रही है. चावल में कंकड़, पत्थर मिलाकर दिये जाते हैं. सरसों के तेल में भटकटैया और न जाने किस किस चीज की मिलावट की जाती है. देसी घी में चर्बी, जीरे में झाडू की झाड़न, काली मिर्च में पपीते के बीज. हल्दी में रंग और गेरू. मिर्च में रंग. मिठाईयों में मिलाये जा रहे कुछ रंग तो जानलेवा हैं. हर रोज ही किसी न किसी चैनल पर दिखाया जा रहा है कि किस तरह से हरी सब्जियों को हरे रंग की उस डाई से रंगा जाता है जो कपड़ा रंगने में काम आती है. लौकी में आक्सीटोसिन का इन्जेक्शन, जो दुधारू पशु को देने पर उसकी हड्डी को भी निचोड़ देता है. यूरिया, सर्फ से बनाया जाने वाला नकली दूध. कैमल का दूध अर्थात कैमल के सफेद रंग का प्रयोग करके बनाये जाना वाला दूध जनता को पिलाया जा रहा है. बाजार में बिकने वाले डिब्बाबंद पदार्थ भी इससे अछूते नहीं हैं. शीतल पेयों में पेस्टीसाइड होने की बात अभी अधिक पुरानी नहीं हुई. लिस्ट बहुत लम्बी है, कहने का तात्पर्य यह कि हमारी रसोई में आने वाली हर चीज मिलावटी है और शरीर के लिये घातक भी. मैंने खुद मण्डी में सड़े हुये कटहल से बीज निकालते हुये देखा (जिन बीजों को...

श्रीमान सिरिल जी, कृपया ब्लागवाणी को सक्रिय करें......

ब्लागवाणी वापस आओ. तुम्हारे बिना अच्छा नहीं लग रहा है. लोग अपनी पोस्ट पर लगने वाले चटके, पाठकों की संख्या, हाट लिस्ट को देखते थे. लेकिन अब सब कुछ बन्द है. मुझे पता नहीं कि क्या कारण रहे कि श्रीमान मैथिली जी और सिरिल जी की इस अमूल्य स्थापना को बन्द कर दिया गया है. जो भी कारण रहे हों लेकिन तुम्हारे बिना अच्छा नहीं लग रहा है. एक अधूरेपन का, खालीपन का अहसास हो रहा है, तुम्हारे क्रियाशील न होने से. अभी तक जितने भी हिन्दी ब्लाग के एग्रीगेटर रहे उनमें ब्लागवाणी का स्थान अनूठा रहा है. अठारह जून से अब तक ब्लागवाणी के निष्क्रिय होने से एक निर्वात सा आ गया है. चूंकि मुझे अधिक कुछ जानकारी नहीं है, इसलिये यही कहना चाहूंगा ब्लागवाणी के संचालकों से कि इसे फिर से सक्रिय करने की कृपा करें.

बड़े लोगों के मामले में गवाह, मुद्दई पता नहीं क्यों आत्महत्या कर लेते हैं....

एक माइक्रो पोस्ट.. अभी कुछ माह पहले हरियाणा में एटीएस के एसपी को उगाही के चलते एक ज्वैलर ने गिरफ्तार कराया था. इस ज्वैलर ने पिछले दिनों जहर खाकर खुदकुशी कर ली. उत्तर प्रदेश के कविता मर्डर केस के आरोपी की मृत्यु जेल के अन्दर संदिग्ध परिस्थितियों में हो गयी. नजारत घोटाले के आरोपी आशुतोष अस्थाना की मृत्यु भी जेल के अन्दर ही हो गयी. न जाने ऐसे कितने ही किस्से हैं जहां  मुल्जिम, मुद्दई या गवाह संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के आगोश में समा चुके हैं. हालात बहुत भयावह हैं और परिस्थितियां विकट हैं. न्यायपालिका ही कुछ सार्थक कर सकती है.

इस सब के लिये ही देशवासियों से जमा टैक्स से कश्मीर के लिये विशेष पैकेज दिये जाते हैं..

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इस चित्र को देखिये (साभार आईबीएन). किस तरह से सुरक्षाबल के जवान के पीछे मुंह पर नकाब बांधे हुये "भटके हुये नौजवान (जिन्हें विशेष पुनर्वासन योजना देने की बात की जा रही है)" हाथ में लकड़ी के मोटे डण्डे, पत्थर और जो कुछ भी उन्हें मिल जाता है उसे लेकर मारने पर उतर आते हैं. शायद हम लोग इसीलिये टैक्स देते हैं कि घाटी को उस पैसे से विशेष पैकेज दिया जाये और हमारे फौजी भाईयों को ये भटके हुये नौजवान शहादत दे सकें . यदि ऐसे में सुरक्षाबल फायरिंग कर दें और सुरक्षाबलों के दुर्भाग्य से इनमें से कोई मर जाये तो सुरक्षाकर्मियों को जेल पक्की. वाह राजनीतिबाजों की नीतियां . लीजिये साहब एक और चित्र मिला है जिसके लिये मैं राज भाटिया साहब का आभारी हूं इसे भी देखिये...