डा० अमर कुमार और शम्मी कपूर - अब स्वर्गीय.
कल बन्धु श्री अनुराग शर्मा जी के फेसबुक अपडेट से पता चला कि डा०अमर नहीं रहे. बड़ा धक्का लगा. कुछ समय से रोग-ग्रसित थे किन्तु इसके बावजूद उनकी जिन्दादिली में कोई कमी नहीं आई थी. इटैलिक्स में लिखी उनकी टिप्पणियां जिसमें कभी भोजपुरी तो कभी पंजाबी और कभी अंग्रेजी का शानदार तड़का लगा होता था, सत्य को प्रतिबिम्बित करती थीं. माडरेशन के विरुद्ध रहे और अपनी बात को पूरी दृढ़ता से सामने रखते रहे. साहसी, निर्भय, लाग-लपेट से दूर, जैसा कि मैंने हमेशा पाया. एक-दम खरी बात कहने और सुनने के आदी. बहुत धारदार लेखन. पैना, जीवंत, जब व्यंग्य करते, तो सामने वाले को उसकी तीक्ष्णता का अहसास होता. बहुत कुछ लिखने के लिये बैठा था, लेकिन न लिख सका. आपकी बहुत आवश्यकता थी हमें, लेकिन लगता है कि हमसे अधिक आवश्यकता ईश्वर को थी. आपको नमन. इससे कुछ दिनों पहले शम्मी कपूर के निधन की खबर पढ़ी. बहुत छोटा था तो शायद जंगली देखी थी, श्वेत - श्याम टेलीविजन पर. उसका गीत "चाहे कोई मुझे जंगली कहे" जुबान पर चढ़ गया था. शम्मी जी को पर्दे पर देखता तो लगता कि काश मैं भी ऐसा बन सकूं, हर समय ऊर्जा से ओत-प्रोत युवक. मानो उनके अन्द...