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Showing posts from November, 2010

एसडीएम महोदय के शब्द कहीं और दिखाई दिये...

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कल  नजरिया पर "अपने अपने हालातों से..." पढ़ी थी. आज यहां पर. मजे की बात यह कि  "यहां" वालों ने जहां से इसे लिया गया था, वह लिंक भी नहीं दिया और न ही शब्दों के रचयिता का नाम तक बताया गया. हो सकता है कि बेख्याली में ऐसा हो गया हो, लेकिन फिर भी मूल कवि/रचयिता का नाम देना चाहिये. यह एसडीएम सिंह जी द्वारा ही लिखी गयी है. जिसका कहीं कोई जिक्र तक नहीं किया गया है..

पाबला जी की माता जी, खुशदीप जी और डा०दराल जी के पिताजी का गुजरना...

उपर्युक्त  तीन दुखद घटनाओं से वास्ता पड़ा. मां-बाप के बिछोह से अधिक बड़ा दुख तो कोई हो ही नहीं सकता. मैं सोच रहा था कि क्या मां की गोद में लेटने और बाप की पीठ पर चढ़ने से अधिक बड़ा सुख दुनिया में कोई हो सकता है........

गूगल के अनुसार दुनिया भी जम्मू-कश्मीर और अरुणाचल को विवादित मानती हैं...

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आज यूं ही गूगल मैप पर कुछ तलाश रहा था कि मन में एक विचार आया कि दुनिया के बाकी देशों में गूगल ने भारत की सीमा-रेखाएं किस तरह दिखाई हैं. अधिक नहीं सात आठ देशों के गूगल मैप को देखा और उसमें भारत की सीमाओं को देखने का प्रयास किया. बड़े ही आश्चर्य की बात रही कि भारत में गूगल maps.google.co.in में दिखाई जाने वाली सीमायें बाकी दुनिया में अलग दिखाई जा रही हैं. इन सीमाओं में जम्मू-कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश को विवादित क्षेत्र (अर्थात डाटेड लाइन) दर्शाया गया है, यदि मैं गलत नहीं हूं तो. यहां पर प्रस्तुत नक्शा गूगल की google.com जो एक ग्लोबल साइट है, से लिया गया है. भारत को छोड़कर जापान, इंग्लैंड, अमेरिका, रूस, पाकिस्तान, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, बांग्लादेश, श्रीलंका की मैप साइट्स पर जम्मू-कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश को विवादित दर्शाया गया है. जबकि सऊदी अरब की साइट पर मैप को .co.in से जोड़ा गया है, जिससे कि सऊदी अरब की स्थानीय गूगल मैप साइट में जम्मू-कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश को भारत का ही हिस्सा दर्शाया गया है. मेरे विचारों के अनुसार गूगल द्वारा गलत सीमांकन के लिये भारत सरकार को इस मुद्दे को न केवल गूगल क...

यह उस सरकार का जबाव है जिसके मुखिया के पुत्र भ्रष्टाचार खत्म करने की अपील कर रहे हैं.

उच्चतम न्यायालय में मुख्य सतर्कता आयुक्त के मामले की सुनवाई के समय जस्टिस स्वतंत्र कुमार ने कहा कि "सरकारी नौकरी में जब किसी के खिलाफ चार्जशीट हो जाती है, तो उसे प्रमोशन तक नहीं दिया जाता। ऐसे में इतने बड़े पद पर नियुक्ति कैसे हो गई। कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद अटॉर्नी जनरल वाहनवती ने कहा कि हर नियुक्ति में बेदाग छवि को पैमाना नहीं बनाया जा सकता। ऐसा किया गया तो न्यायपालिका में हुई कई नियुक्तियों पर सवाल उठ जाएंगे।" अब इस उत्तर से अन्दाजा लगा लीजिये कि भ्रष्टाचार खत्म करने के सम्बन्ध में राहुल भैया का बयान सच्चा है या फिर उच्चतम न्यायालय में वाहनवती जी द्वारा प्रकट किये गये सरकार के विचार. मतलब साफ है यदि सरकार आपके साथ है या आप सरकार के साथ हैं तो कुछ भी करो, सब माफ, अन्यथा सिरे से साफ.  इतने पर भी कुछ लोगों को भैया से उम्मीदें हैं..

राजधानी से दिल्ली यात्रा

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भारी भीड़ के चलते राजधानी एक्सप्रेस से दिल्ली जाना पड़ा. टिकट तत्काल में लेने के लिये सुबह छ: बजे पहुंचना और फिर दो घण्टे खिड़की खुलने का इन्तजार करना कितना कष्टदायक होता है, इसका अहसास हुआ. खैर टिकट मिल गया. दो सौ रुपये टिकाना तत्काल के लिये और वह भी तीन दिन पहले. खैर. राजधानी का भी वही हाल था जो बाकी ट्रेनों का होता है. वही गन्दे टायलेट. कहीं पानी की टोंटी खराब तो कहीं टोंटी ही नहीं. नीचे गन्दा. कहने को सफाई व्यवस्था अब निजी हाथों में दे दी गयी है, लेकिन वही रवैया. और ऊपर से कमीशनखोरी तथा श्रमिकों के शोषण का रास्ता और खुल गया. मैं जब कभी लघुशंका के लिये  ट्रेन के टायलेट में जाता हूं तो साक्षात नरक के दर्शन हो जाते हैं. शायद यही कारण है कि जो लोग अधिक यात्रा करते हैं, उनमें छूने से फैलने वाली बीमारियां बाकियों की तुलना में अधिक फैलती हैं. लंच का विकल्प था. शाकाहारी. लंच पैकेट देने वाला कर्मचारी बड़े प्रेम से बोल रहा था. मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ. काल सेंटर पर बैठे हुये कर्मचारी की तरह मधुर आवाज में "जी सर, क्या दूं सर, ये सर और वो सर". इस सरसराहट का राज यात्रा खत्म होने पर पता चला, ज...

बड़े पते की बात कही सोनिया जी ने...

कल एक बड़ी पते की बात कही है सोनिया जी ने कि "देश बर्बाद कर देंगे घूसखोर"... सही बात है और घोटालेबाज नेता, उन्हें प्रश्रय देने वाले राजनीतिबाज देश को आबाद करने का कार्य करते रहेंगे.... जय हो..

कालेज से भागकर देखी गई फिल्मों में से एक का खूबसूरत गाना....

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स्कूल कालेज से भागकर फिल्म देखना एक शगल था, पैशन था. बहुत सारी फिल्में देखीं. शायद एक रुपये या सवा रुपये का टिकट होता था, सबसे आगे वाली क्लास का. चवन्नी-अठन्नी इकठ्ठी की जातीं और फिल्म देखी जाती. पूरा ग्रुप था. "आये दिन बहार के" फिल्म भी बहुत अच्छी थी. गीत-संगीत भी जबरदस्त. फिल्म अस्सी के अन्त में (शायद नवासी की बात होगी) कालेज से भागकर देखी थी. पैदा होने से भी कई वर्ष पहले बनी थी. गाना सुनिये. आज मैं यूट्यूब पर गाने ही सुन/देख रहा हूं... अरविन्द जी त्रुटि सुधार दी है. आपको धन्यवाद...

बहुत सस्ते हो गये हैं फ्लैट...

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जल्दी से खरीद लीजिये, बहुत सस्ते हो गये हैं फ्लैट . यह सुविधा केवल सरकारी कर्मचारियों के लिये और उनके परिवारी जनों के लिये ही है. केवल साढ़े छत्तीस लाख से प्रारम्भ . चौंक गये न. एक नये भर्ती चपरासी की तनख्वाह लगभग बारह-तेरह हजार होती है, निम्न श्रेणी लिपिक की पन्द्रह-सोलह हजार. ग्रुप-बी अधिकारी की पैंतीस हजार और ग्रुप-ए अधिकारी की चालीस-बयालीस हजार. जो ग्रुप-ए अधिकारी आज से बीस साल पहले भर्ती हुआ होगा, उसकी तनख्वाह लगभग सत्तर हजार रुपये प्रतिमाह है. और वह भी तब जब छटे केन्द्रीय वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद वेतन संशोधित हुये. इससे पहले वेतन लगभग आधे थे.  एक चपरासी के लिये भी कम से कम दो कमरे तो चाहिये रहने के लिये. छ्त्तीस लाख रुपये का फ्लैट लेने का बूता  कितने सरकारी कर्मचारियों/अधिकारियों का है. आय में बढ़ोत्तरी हुई पचास प्रतिशत तो व्यापारी अपने मुनाफे में सौ-डेढ़ सौ प्रतिशत वृद्धि की व्यवस्था पहले ही कर लेते हैं.  बात करते हैं छोटे शहरों की. जमीन कब्जा ली है पैसे वालों ने. किसी भी सड़क पर निकल जायें, आपको पता चलेगा कि यह जमीन फलां लाला ने खरीद ली है, यह फला व्याप...

एक मर जाये तो खबर, अठारह को मार दिया जाये तो कोई सुगबुगाहट तक नहीं...

एक आदमी मर जाये तो खबर बन जाती है और अठारह लोगों की हत्या आतंकवादी कर दें तो सुगबुगाहट तक नहीं होती. आसाम में आतंकवादियों ने अठारह हिन्दीभाषियों की गोलियों से भून कर हत्या कर दी, किसी खबरिया चैनल और अखबार के पास इतना समय और इतनी जगह नहीं कि प्राइम टाइम और फ्रन्टपेज पर इस नरसंहार को लगा पाते. सब को पता है कि एनडीबीएफ आतंकवादियों को पैसा और हथियार कौन लोग मुहैया करा रहे हैं. बांग्लादेश से आये अवैध घुसपैठिये जिन्हें हमारे यहां के  राजनीतिबाज अपने देश का सम्माननीय नागरिक बनवा चुके हैं, इन तमाम आतंकवादी संगठनों में शामिल हैं. इनकी फंडिंग और आर्म्स सप्लाई के पीछे कुछ पड़ोसियों की एजेंसियां शामिल हैं, और इन एजेंसियों की इच्छापूर्ति के लिये हमारे यहां व्याप्त भ्रष्टाचार खाद का काम कर रहा है. पिछली बार नरसंहार पर लिखी गयी पोस्ट के ऊपर एक टिप्पणी मिली थी कि उत्तर-पूर्व दूर है, संभवत: इसलिये ऐसी खबरों को प्रमुखता से नहीं दिखाया जाता. मैं यह कहना चाहता हूं कि जो लोग इस आतंकवादी हमले में मारे गये उनके परिवारों के लिये तो वह उतने ही महत्वपूर्ण थे जितने कि भारत के किसी भी अन्य परिवार के लिये उनके ...

ओबामा का दौरा

मीडिया वाले तीन-चार दिन से दीवाने हुये हैं. ओबामा साहब जो तशरीफ लाने वाले थे, इसलिये. कितने कुत्ते हैं, कितनी गाड़ियां, कितने हेलीकाप्टर, हवाईजहाज, कितने सुरक्षाकर्मी और भी न जाने क्या क्या. जहाज में क्या लगा है, क्या खाते हैं, क्या पीते हैं और भी न जाने क्या क्या. बस नहीं चलता वरना कौन सा टायलेट पेपर इस्तेमाल करते हैं, परिवार नियोजन के लिये कौन सा तरीका अपनाते है, इसकी भी एक्स्क्लूसिव रिपोर्ट पेश कर देते. बराक ओबामा का पूरा नाम बराक "हुसैन" ओबामा है,  इसे बताने के लिये एक धर्मनिरपेक्ष न्यूज चैनल के एंकर ने दस मिनट के प्रोग्राम में पचास बार "हुसैन" पर विशेष जोर देकर बोला. हालांकि डेविड कोलमैन हेडली को एक बार भी इस एंकर ने "दाऊद गिलानी"    कहने की हिम्मत नहीं जुटाई. यह तो ट्रैक से जुदा बात हो गयी. कल से खबरिया चैनल यह जताने की कोशिश कर रहे थे कि ओबामा साहब के आते ही पता नहीं क्या हो जायेगा. ओबामा आयेंगे और आते ही आते पाकिस्तान को लताड़ेंगे, उस पर धावा बोल देंगे, दाना-पानी लेकर चढ़ दौड़ेंगे. जादू कर देंगे, कायाकल्प कर देंगे भारत का. भारत को डेविड कोलमैन हेडली अ...

पीपली लाइव और बवाल - एक बहुत बीलेटेड समीक्षा...

फिल्में मैं कम ही देखता हूं. कल थोड़ा सा मौका मिला तो पीपली लाइव देखने का विचार बना. इसलिये और भी क्योंकि मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में इसके विरुद्ध प्रदर्शन किया गया था. आमिर खान निश्चित रूप से एक बेहतर अभिनेता हैं, इसमें कोई शक है ही नहीं. अब उनके इस प्रोडक्शन के लिये भी परखना बाकी था. "मंहगाई डायन" पहले ही लोकप्रिय हो चुका था. रघुवीर यादव मंझे हुये कलाकार हैं ही. नत्था को देखने के लिये भी मन लालायित था. प्रदर्शन इस बात को लेकर हुआ था, जैसा कि पढ़ने को मिला, कि, इस फिल्म में किसानों का मजाक उड़ाया गया था और रुपये के लालच में किसानों को आत्महत्या के लिये दिखाकर उनके चरित्र को नीचा दिखाया गया था, वगैरा-वगैरा. फिल्म के प्रोमो टेलीविजन पर देखे थे और एक दो लोगों से सुना भी था. देखने पर पाया कि फिल्म बहुत अच्छी है और जिन्होंने फिल्म के विरुद्ध प्रदर्शन किया था, उनमें से शतांश लोगों ने ही यह फिल्म देखी होगी. मीडिया, अफसरशाही और राजनीतिबाजों के काकस की कहानी ठीक ठाक दर्शाई है. मीडिया द्वारा "नत्था द्वारा दीर्घ शंका करने" को ब्रेकिंग न्यूज बनाना और एक गरीब किसान-टर्न्ड-मजदूर की ...

भारत में विकराल रूप धारण करती हुई जनसंख्या वृद्धि

पिछली जनगणना के बाद जनसंख्या संबंधी आधिकारिक आँकड़े जारी किये गये, राजनीतिक दलों ने अपने-अपने नजरिये से इसे देखा और अपने हिसाब से व्याख्या की। ज्ञातव्य है कि भारत का क्षेत्रफल पूरे विश्व का लगभग सवा दो प्रतिशत हिस्सा है और आबादी में बीस प्रतिशत , सम्पूर्ण विश्व की जनसंख्या 6.6 अरब है जिसमें से 1.16 अरब से ज्यादा हमारे देश में निवास करती है । एक नजर आँकड़ों पर डाले जाने पर मालूम चलता है कि 20वीं शताब्दी के शुरुआत में अविभाजित भारत की जनसंख्या लगभग 24 करोड़ थी जो विभाजन के उपरान्त सन 1951 में बढ़कर 36 करोड़ हो गयी और सन 2000 में 100 करोड़ को पार कर गयी।  सन 1901 में जहाँ एक वर्ग किमी में 77 लोग रहते थे वहीं सन 2000 में यह संख्या लगभग पाँच गुना अर्थात 324 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी पर पहुँच गयी । एक अनुमान के अनुसार भारत की 40 प्रतिशत जनसंख्या गरीबी की रेखा के नीचे रह रहे हैं तथा अभी भी 35 प्रतिशत लोग निरक्षर हैं। शिशु मृत्युदर लगभग 70 प्रति हजार है, और औसत प्रति व्यक्ति सालाना आय 15000/- रुपये है और 2300 व्यक्तियों पर मात्र एक चिकित्सक ही उपलब्ध है। विगत सौ वर्षों में जनसंख्या मे चार गुना...

जनवरी में मध्यप्रदेश घूमना चाहता हूं...

तीस दिसम्बर को लखनऊ से चलने का प्रोग्राम है. लखनऊ से नौ-दस घण्टे की अधिकतम ट्रेन यात्रा कर मध्य-प्रदेश के किसी शहर में जाकर डेरा डालने की इच्छा है, उसके बाद फिर आस पास की पचास- साठ किमी० की त्रिज्या के वृत्त में दर्शनीय स्थलों को देखने की इच्छा है. करीब सात-आठ दिन का यात्रा कार्यक्रम रहेगा, अपनी धर्म-पत्नी और दो छोटे-छोटे से बच्चों के साथ. एक कक्षा-दो का विद्यार्थी और दूसरा केजी का.  मध्य प्रदेश में बहुत सारे दर्शनीय स्थल है. अत: मध्यप्रदेश के मित्र मुझे कुछ गाइड करने की कृपा करें. अंत में - खुशदीप जी की पोस्ट खुल नहीं रही है. उस पर टिप्पणी यहां दे रहा हूं. "इसी प्रकार के धर्मनिरपेक्ष तत्वों से आजादी चाहिये, अन्यथा ऐसे धर्मनिरपेक्ष देश को कट्टर इस्लामी देश में तबदील कर देंगे."

लालू पर मामला दर्ज....

पता चला है कि लालू प्रसाद यादव जब अपना वोट डालने गये तो उनके तमाम सुरक्षाकर्मी भी उनके साथ पोलिंग स्टेशन तक चले गये, जो कि नियम विरुद्ध है. कानून के इस उल्लंघन पर उनके विरुद्ध मामला दर्ज कर लिया गया.  एक छोटी सी बात कहना चाहता हूं कि लोकसभा-विधानसभा के चुनावों से पहले पचास-साठ प्रतिशत उम्मीदवारों के विरुद्ध आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन का मामले दर्ज होते हैं, लेकिन अन्तिम नतीजा क्या होता है. कुछ भी नहीं. उस समय चुनाव आयोग, चाहे तो अपने कर्तव्यों की पूर्ति हेतु अथवा वाहवाही लूटने के लिये रिपोर्ट दर्ज करा देता है, लेकिन ज्यों-ज्यों समय बीतता जाता है,  इस पूरी कवायद का परिणाम शून्य की तरफ अग्रसर होता जाता है. किसी भी उम्मीदवार को चुनाव में खड़े होने के नाकाबिल नहीं घोषित किया गया, किसी भी उम्मीदवार का नतीजा निरस्त नहीं किया गया. किसी को भी सजा नहीं हुई. फिर आखिरकार इस आचार संहिता के लागू होने का लाभ क्या है और क्या लाभ है इस नूराकुश्ती का जिसमें मामले तो दर्ज होते हैं, लेकिन उनका अंजाम कुछ नहीं होता.