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आह पड़ोसी वाह पड़ोसी

पड़ोसी शब्द से तो परिचित होंगे ही. किसी व्यक्ति के मुंह से अपने पड़ोसी के बारे में आपको धाराप्रवाह प्रशंसा सुनने को मिल सकती है तो किसी दिलजले के मुंह से कटुशब्दों की बौछार भी उसी तीव्रता के साथ सुनने को मिलेगी. मकान खरीदते समय या किराये पर लेते समय अच्छा पड़ोस पाना किसी भी व्यक्ति की सर्वप्रथम और सर्वाधिक महत्वपूर्ण इच्छा होती है, और ऐसे में उसकी छटी इन्द्री भी पूर्ण तीव्रता के साथ सक्रिय हो जाती है। पड़ोस कैसा है, पड़ोसी (विशेषत: पड़ोसन) कैसे हैं, उनका स्वभाव कैसा है, कितने बच्चे हैं, वगैरह-वगैरह, ऐसे कितने ही प्रश्नों की प्रश्नावली मकान लेने से पूर्व तैयार कर ली जाती है. अगर बेटियां जवान हैं तो पड़ोसी कुंवारा न हो, विवाहित हो तो फिर उसके लड़के न हों और हों तो फिर जवान न हों. अब अगर पड़ोस मिला है तो पडो़स तो मिलेगा ही और पडो़सी मुफ्त में। अब शर्मा जी के बराबर वाले वर्षों से वीरान पडे़ मकान में किरायेदार आये तो शर्मा जी को बड़ी प्रसन्नता हुई. शर्मा जी ने पड़ोसी महोदय से उनके घर को अपना ही समझने को क्या कह दिया कि बस पड़ोसी महोदय ने उनके इस कथन को ब्रह्मवाक्य मान लिया और इस पर बाकायदा अमल करना प्...