पुलिस द्वारा किया गया एनकाउंटर या हत्या
पुलिस ने एक बार फिर अपना क्रूर चेहरा दिखाया उत्तरान्चल के खटींमा में। इस घटना में एक युवक (जिस पर अपनी प्रेमिका के साथ मिलकर एक हत्या करने का आरोप भी था) ने अपनी मांग को पूरा कराने के लिये सरे-बाजार अपनी प्रेमिका की बहन के सिर पर देसी पिस्तौल लगा दी (लगभग उसी तरह जैसे कि राहुल राज ने किया था अन्तर इतना है कि राहुल राज पर किसी हत्या का आरोप भी नहीं था और न ही उसने किसी के सिर पर पिस्तौल लगाई थी)। कुछ ही देर में वहां तमाशबीन इकट्ठे हो गये और पुलिस वाले भी। पुलिस वालों ने उस युवक से बात करने की कोशिश की और जब उनके सब्र का बांध टूट गया तो कमांडो बनने की नाकाम चेष्टा की। और उनकी इस हरकत को देखकर उस युवक ने अपनी प्रेमिका की बहन पर गोली चला दी। इसके बाद क्या था बहादुर पुलिस ने उस युवक की भी हत्या कर दी। मैं यहां फिर उस युवक द्वारा की गयी वारदातों का समर्थन नहीं कर रहा, बल्कि यह कहना चाहता हूं कि जब स्वयं पुलिस ही कानून का पालन नहीं करती तो वह कानून का अलम्बरदार कैसे बन सकती है। बिल्कुल स्पष्ट बताया जाता है कि अपराधी को पकड़ने के लिये न्यूनतम बल प्रयोग किया जाना चाहिये, लेकिन चाहे वह राहुल राज ...