बजट, यूनिक आई डी कार्ड, स्वात घाटी में शरिया क़ानून
बजट (लेखानुदान/अन्तरिम बजट) आ गया, हमेशा की तरह पक्ष-विपक्ष ने औपचारिकता निभा दी. पक्ष के लोगों ने अच्छा बताया तो विपक्ष ने आलोचना की. कई योजनाओं में धनराशि का आबंटन बढ़ा दिया गया है. सबसे बड़ी कठिनाई है भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचार के मूल में भी भाई-भतीजावाद और राजनीति शामिल है. जमीनी स्तर की जितनी भी योजनायें हैं उनमें भ्रष्टाचार लगातार बढ़ता जा रहा है. विकेन्द्रीकरण और पंचायतीराज व्यवस्था इसलिये लागू की गयी थी कि योजनाओं का इम्प्लीमेंटेशन जल्दी हो और पात्र व्यक्ति को लाभ पहुंचे लेकिन हुआ इसका उल्टा. विकेन्द्रीकरण के फलस्वरूप कमीशनखोरी और हिस्सेदारी बढ़ती गयी लिहाजा आम आदमी वहीं का वहीं रह गया जहां वह साठ साल पहले खड़ा था. किसी भी योजना का लाभ वास्तविक हकदार को तभी और सम्पूर्ण रूप में पहुंच पायेगा जब भ्रष्टाचार को समूल नष्ट कर दिया जाये और यह तभी सम्भव होगा जब सत्ता-शीर्ष पर बैठे लोग स्वयं अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत करें, जिसकी सम्भावना अभी भी कम ही लगती है. राजनीतिक दलों की नीयत इससे ही स्पष्ट हो जाती है कि मन्त्री और उनके रिश्तेदारों की सम्पत्ति को सूचना कानून के दायरे से बाहर कर दिया गया है....