हमारे प्रधान जी एकदम ठीक कर रहे हैं.
एक बम क्या फट गया, मानों आफत आ गयी. जिसे देखो वही कट्टरपंथियों के हाथों खेलने लगा और अपनी भड़ास उतारने लगा. लेकिन मैं प्रधान जी के साथ हूं. वह हमारे देश के गौरवशाली अतीत और परम्पराओं का निर्वहन कर रहे हैं. विश्वास नहीं होता. अब देखिये, हमारे ही बड़े बूढ़े कह गये हैं कि गोली के घाव से भी अधिक तीखा होता है बोली का घाव. इसीलिये आतंक और आतंकवादियों तथा उनके मददगारों के विरुद्ध बोली का प्रयोग कर रहे हैं. बिल्कुल छलनी हो जायेंगे हमारे बयानों से. और हम आतंकवादियों को कोस भी तो रहे हैं. जब मरी खाल की श्वांस से लोहा भी भस्म हो जाता है तो हमारी आहों से ये आतंकवादी कैसे बच जायेंगे. रोज करें ऐसी कायराना हरकत. हम इन कायराना हरकतों से डरते नहीं हैं, देखा दिल्ली कहीं रुकी, मुम्बई कहीं रुकी. ये है हमारी जिन्दादिली. बयान संप्रेक्षण चालू आहे.