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एक सलाह मजबूरी पर...

मनमोहन ने कर दिया, ताल ठोंक ऐलान देखा होगा न  कहीं,  मुझ  जैसा इन्सान मुझ जैसा इन्सान, घना मजबूर मैं दुखिया कहने को मैं प्रधान,  नहीं हूं लेकिन मुखिया कह दानव कविराय, जगो अब मोहन भैया अर्धसत्य को त्याग, सत्य की खेवो नैया