Posts

Showing posts from April, 2009

आ गए ओबामा छा गए ओबामा

आजकल सभी चैनल वाले ओबामा-मय हो गये हैं, जिधर देखो उधर ओबामा, जिधर सुनो उधर ओबामा. टेलीविजन वालों ने घर-घर में ओबामा ला दिया है, बिल्कुल हर-हर महादेव की तर्ज पर हर ओर ओबामा सुनने को मिल रहा है. भारत में अब न तो कोई आतंकवादी वारदात होगी, न अब भूख से कोई मरेगा. न अब ठंड से कोई ठिठुरेगा, न लू से किसी के प्राण निकलेंगे. न किसी का शोषण होगा, न किसी पर अत्याचार होगा. ओबामा जो आ गये हैं अमेरिका में. अब पाकिस्तान भी सुधर जायेगा, बांग्लादेश की भी हिम्मत नहीं होगी कोई गड़बड़ करने की. चीन भी आंखे नहीं तरेर सकेगा. नेपाल लाइन पर आ जायेगा. दुनिया में भारत का डंका बजने लगेगा. ओलम्पिक में हम टाप टेन में पहुंच जायेंगे, हाकी में गोल्ड जीतेंगे, क्रिकेट में एक बार फिर विश्व कप घर लायेंगे. टेनिस में, गोल्फ में भी चैम्पियनशिप हमारे यहां आ जायेगी, क्योंकि जीत गये हैं ओबामा. पाकिस्तान से आतंकवादियों की जगह मिठाईयां आयेंगी. अल-कायदा, लश्कर, हिज्बुल के लोग अब फूल बेचना प्रारम्भ कर देंगे. पाकिस्तान अब अपने एटम बमों को बनाना बन्द कर देगा जो बन चुके हैं उन्हें निष्क्रिय कर देगा. दाऊद और अन्य वांछित अपराधियों को भारत ...

चेन्नई में लोकल और मालगाड़ी के बीच टक्कर

चेन्नई के पास एक लोकल और मालगाड़ी में टक्कर हुई, रेलमन्त्री बड़े गर्व से कह रहे हैं कि कोई अन्जान शख्स लोकल लेकर चला गया. इस घटना पर तो रेल मन्त्री से लेकर चेन्नई के पूरे रेलवे सुरक्षा तन्त्र जिस पर इसकी जिम्मेदारी हो तथा स्टेशन मास्टर से लेकर डीआरएम तक को सेवा से बर्खास्त करना चाहिये, क्या करता रहता है पूरा अमला. क्या मजाक है, ट्रेन में रात भर लोग सोते रहते हैं और सुरक्षा बल मौज करते रहते हैं. न जाने कितनी बार अखबारों में आपने पढ़ा होगा कि जीआरपी के सिपाहियों ने लूट-पाट की. फिर एक अन्जान आदमी कैसे ट्रेन को लेकर चल देता है, किसी आम आदमी को तो ट्रेन के कन्ट्रोल तक पता नहीं होंगे, फिर कोई अन्जान आदमी ट्रेन को लेकर कैसे चल देता है. उसके बाद फिर ट्रेन के जाने के बाद त्वरित कार्रवाई करते हुये ट्रेन को कहीं लूप लाइन पर डाला जा सकता था. ऐसे समय में जबकि पूरे देश में आतंकवादी घटनाओं का खतरा मंडरा रहा है, यह घटना दिखाती है कि हमारा पूरा तन्त्र अकर्मण्य हो चुका है और कभी भी कहीं भी कुछ भी हो सकता है. अधिकतर शासकीय कर्मचारी अपने कर्तव्यों का पालन नहीं करते जिसका परिणाम है यह घटना.

क्वात्रोची, सी-बी-आई और कांग्रेस

कांग्रेस नीत यूपीए सरकार ने सत्ता में आते ही बोफोर्स घूस कांड के मुख्य आरोपी ओतावियो क्वात्रोची के फ्रीज किये हुये खातों को डी-फ्रीज कर दिया था जिससे कि क्वात्रोची ने अपना फंसा हुआ धन बड़ी आसानी से निकाल लिया. उसी कांग्रेस नीत यूपीए सरकार के दिशानिर्देशों पर चलते हुये कठपुतली एजेंसी सीबीआई ने ओतावियो क्वात्रोची के खिलाफ जारी रेड कार्नर नोटिस वापस ले लिया हालांकि यह कितना प्रभावी था यह भी दुनिया को पता है. इस नोटिस को वापस लेने से दुनिया को यह पता लग गया है कि क्वात्रोची अब बोफोर्स घूस कांड के अन्तर्गत अब वांछनीय नहीं रहा. यह कदम सीबीआई ने विधि मन्त्रालय के परामर्श से उठाया हुआ बताया है. स्विस बैंको में पड़े काले धन के मामले में कांग्रेस बिल्कुल चुप है, कांग्रेस ने अजहरुद्दीन जैसे व्यक्ति को जो मैच फिक्सिंग में संलिप्त था और जिसने देश के साथ धोखाधड़ी की, को टिकट दिया. सीबीआई ऐसा साबुन बन गयी है जिससे धुलकर काले दाग गायब हो जाते हैं और काला दामन फिर चकाचक साफ. सत्ता में रहो और जो चाहो सो करो. अगर सीबीआई का इस समय का कदम सही है तो फिर सीबीआई के वे अधिकारी गलत थे जिन्होंने क्वात्रोची के विरुद...

दौलत बढ़ाने का नायाब तरीका इनसे पूछिए

वैसे तो सत्ताधारी नेताओं के रिश्तेदारों तक की सम्पत्ति को कैबिनेट की गोपनीय जानकारी मान लिया गया है जिसके कारण मन्त्रियों तथा उनके रिश्तेदारों की सम्पत्ति को सूचना अधिकार के अन्तर्गत नहीं दिया जा सकता। आखिर इस सम्पत्ति और कैबिनेट में क्या सम्बन्ध हो सकता है? डरिये मत कैबिनेट किससे बनती है, मन्त्रियों से, मन्त्री कहां से आते हैं, सांसदों से, सांसद कहां से आते हैं, सत्ताधारी दल से. और अगर सत्ता में रहते हुये भी निर्धन रह गये तो मुई ऐसी सत्ता का फायदा क्या? हालांकि इस समय सभी प्रत्याशी अपनी सम्पत्ति की घोषणा कर रहे हैं जिसमें उनकी स्वयं की, पत्नी की तथा बच्चों के नाम सम्पत्ति का विवरण होता है, अधिकतर प्रत्याशियों से उनकी पत्नियों की सम्पत्ति अधिक है. मैं यह जानना चाहता हूं कि प्रत्याशियों से अधिक सम्पत्ति उनकी पत्नियों के पास कैसे हो गयी जबकि अधिकतर प्रत्याशियों की पत्नियां कोई व्यवसाय नहीं करतीं. अधिकतर मामलों में हमारे यहां यह होता है कि पति अधिकतर सम्पत्ति विभिन्न करों को बचाने या लाभ लेने की दृष्टि से अपनी पत्नी या बच्चों के नाम से क्रय करता है. एक तो इस बात की भी जांच हो कि इनकी पत्न...

इस देश की हालत कभी नहीं सुधरेगी

इस देश की हालत कभी नहीं सुधरेगी. कारण नेता ईमानदार नहीं. अठारह साल की उम्र में युवक शादी नहीं कर सकता लेकिन वोट डाल सकता है. मतदान को अनिवार्य हमारे यहां के धूर्त नेता नहीं होने देंगे. नवयुवकों से भी कोई उम्मीद रखना बेमानी है, उन्हें गाड़ी, बंगला और बैंक-बैलेन्स नहीं चाहिये, उन्हें ईजी मनी नहीं चाहिये क्या. जब देश का प्रधानमन्त्री ही यह कहे कि अल्पसंख्यकों का संसाधनों पर पहला हक है तो बाकियों को अपने लिये देश से बाहर सुरक्षित ठिकाना खोजना प्रारम्भ कर देना चाहिये. वोटों के लिये यहां लोग अपने घर की महिलाओं को भी चौराहे पर नचा सकते हैं. मैंने आजतक सुनील दत्त-नर्गिस को हिन्दू और मुसलमान की दृष्टि से नहीं देखा, रफी साहब, नौशाद, तलत साहब, दिलीप कुमार, सुरैया, मधुबाला, हसरत जयपुरी, शकील बदायूंनी, एपीजे अब्दुल कलाम और भी न जाने कितनी ऐसी शख्सियते हैं जिनके बारे में मैं दावे से कह सकता हूं कि लोगों ने कभी भी इन्हें हिन्दू-मुस्लिम के नजरिये से नहीं देखा होगा. लेकिन ताज्जुब है कि संजय दत्त को पुलिस वालों ने इसलिये मारा कि वह मुस्लिम मां की औलाद थे. ७५० खरब रुपये स्विस बैंक में पड़े हैं लेकिन वापस क...

मानव कितना क्रूर है - इन तस्वीरों को देखिये

Image
यह चित्र मुझे एक ईमेल से प्राप्त हुए थे, जिसे मैं आपके सम्मुख प्रस्तुत कर रहा हूँ। मनुष्य अपनी शान के लिए, दिखावे के लिए तथा स्वाद के लिए कितना क्रूर हो सकता है, यह इन चित्रों से दिखाई दे रहा है।

चिड़िया के बच्चे के पर गिनें.

Image

कड़ी धूप में आराम के कुछ पल

Image
Image

हाथ का महत्त्व

हाथ का बड़ा प्रचार हो रहा है, हर हाथ को काम, इस हाथ ने न जाने क्या क्या किया. टेलिविजन के अलावा भी मुझे एक हाथ रोज दिखाई देता है, हो सकता है (नहीं बल्कि होगा) आपको भी दिखाई देता हो, सड़क के किनारे पुलिस वाले खड़े होते हैं, कहीं पर नहीं होते, जहां वे नहीं होते, वहां उन्होंने अपनी जगह होमगार्ड को या कहीं कहीं किसी पान की दुकान चलाने वाले को प्रतिनियुक्त कर देते हैं. अब इससे हाथ का क्या सम्बन्ध है, बताता हूं, सड़कों पर जहां कि नगर में प्रवेश या निकासी की जगह होती है, वहां, ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में चौकी और थानों के आगे आप इन हाथों को देख सकते हैं. क्या खूब नजारा होता है, नीचे से एक हाथ बढ़ा और एक हाथ ऊपर से बढ़ा, हाथ से हाथ मिला. एक हाथ ने रिजर्व बैंक द्वारा जारी एक प्रमाणपत्र ऊपर से नीचे की ओर बढ़ाया. नीचे वाले हाथ ने प्रमाणपत्र को झपटा और नीचे वाले हाथ ने तेजी से उस प्रमाणपत्र को अपनी पैंट की जेब में सुरक्षित कर लिया. वाहन वाला हाथ भी अन्दर पहुंच गया. हाथ की महिमा अनन्त. कई बार जल्दबाजी में गड़बड़ भी हो गयी, एक बार बड़ा दुर्लभ नजा्रा देखने को मिला, एक चौराहे पर एक हाथ ने दूसरे हाथ तक प्रमाणपत्...

पता नहीं कल रात मनजी को नींद आई या नहीं.

मुझे यह चिंता हो रही है कि पता नहीं कल रात मन जी सो भी पाये या नहीं और आने वाली रातों को कैसे सो पायेंगे। एक तो अभी-अभी सर्जरी हुई है, ऊपर से इतना भावुक ह्रदय पाया है मन भइया ने। याद है कि एक डॉक्टर को आस्ट्रेलिया में पुलिस ने पकड़ लिया तो मन भइया से सहन नहीं हो सका, बोले मुझे रात भर नींद नहीं आई। अब ऐसे भावुक ह्रदय व्यक्ति को कल कैसे नींद आई होगी, जब दिल्ली में कई लोग जहरीली शराब से मारे गए, उत्तर प्रदेश में नाव पलटने से चालीस-पचास लोग मरे और असम में रात बम धमाके हुए जिनमें दर्जनों लोग मारे गए। वैसे एक बहुत बड़ा खुलासा कर दिया है असम पुलिस ने कि इसमें उल्फा का हाथ है और जल्द ही गिरफ्तारी का दावा भी किया है। सजा दिलाने से इसका कोई सम्बन्ध मत जोड़ लीजियेगा, क्योंकि दोनों चीजें अलग-अलग हैं। पुलिस अपना काम करती है और क़ानून अपना। इसका सजा से क्या लेना-देना। पड़ोस में भी रोज बम धमाके हो रहे हैं, कभी बीस तो कभी तीस और कभी पचास मारे जा रहे हैं। दर-असल इस तरह से वहां इस्लाम को जो खतरा है उसे दूर किया जा रहा है। अब अल-कायदा और लश्कर ने यह तय कर लिया है कि पहले अपने घर को सुधार लिया जाए। ल...

कोई लौटा दे मेरे बीते हुए दिन और खोया हुआ गाँव

पिछले कई वर्षों के बाद अपनी ननिहाल गया। गांव का माहौल बिल्कुल अलग लग रहा था. एक बहुत बड़ा सा बाग था जिसमें एक मन्दिर और एक कुंआ हुआ करता था. पता चला कि बाग तो सात-आठ साल पहले ही कटवा दिया गया था. इस बाग में आम, बेल, अमरूद, और जामुन के ढे़र सारे पेड़ हुआ करते थे, बेर-अनार और करौंदे की झाडियां भी थीं. अमर बेल भी थी और गिलोय भी. कुछ एक पेड़ पाकड़ के भी थे. गांव के लोग गर्मियों में इस बाग में दोपहर बिताया करते थे. हम लोग पेड़ पर चढ़ते और उतरते. आम, जामुन, बेर, बेल, अमरूद, अनार, करौंदे, बबूल, जंगल-जलेबी और भी पता नहीं कौन कौन से पेड़-पौधे लगे हुये थे. एक बहुत बड़ा सा नीम का पेड़ भी था जिसे भी कटवा दिया गया है. इस पेड़ की जड़ों से जानवर बांधे जाते थे. केले भी खूब खाने को मिलते, हर घर में ही केले लगे रहते. मामाजी की घोड़ी भी बाग में बंधी रहती जिस पर एक बार हम छ: ममेरे-मौसेरे भाइयों ने सवारी करने का प्रोग्राम बनाया और छ: के छ: घोड़ी पर। बिना जीन और रकाब की घोड़ी के ऊपर हम लोग और फिर एक-एक कर सब घोड़ी से नीचे. भैंस की सवारी का भी आनन्द लिया करते. इस नीम के पेड़ के नीचे एक हैंडपम्प भी था जिसे सम्भवत: गुडिया बो...

भारत की जीडीपी में 50 प्रतिशत की वृद्धि

शीर्षक अपने आप में सब-कुछ बयान कर रहा है। भारत के आम आदमी की कमाई भी बढ़कर डेढ़ गुना हो गई है। आपको विश्वास नहीं होता, लेकिन यह सत्य है। कम से कम इस देश के प्रोफेशनल तो ऐसा ही मानते हैं। सितम्बर २००९ में छठे केन्द्रीय वेतन आयोग की सिफारिशें लागू हुईं, कुछ राज्य सरकारों ने भी चुनावों को देखते हुए वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू कर दिया। और इसके साथ ही साथ हमारे देश के प्रोफेशनल तबके ने भी यह मान लिया कि पूरा देश मात्र सरकारी कर्मचारियों में बसता है, इसीलिए चिकित्सकों की फीस डेढ़ गुनी हो गई, विद्यालयों ने भी फीस बढ़ा दी, वकीलों ने, अध्यापकों, आर्किटेक्ट और बाकी तमाम प्रोफेशनल व्यक्तियों ने अपनी फीस में आनुपातिक वृद्धि कर दी। उपभोक्ता वस्तुओं के दाम नहीं बढाये जाते तो मात्रा घटा दी जाती है, बिल्डर अभी भी लोगों को लूटने में जुटे हैं, और सरकार कहती है कि महंगाई नीचे जा रही है। पता नहीं किस पैमाने से यह लोग नापते हैं देश के आम नागरिक को। क्यों नहीं कोई नियमन बनाया जाता है, इस सब को नियमित करने के लिए। क्यों नहीं यह मनमानी रोकी जाती। क्या यह भी प्रायोजित भ्रष्टाचार नहीं है?