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Showing posts from February, 2009

भंवरा और फूल

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अगर कैद ऐसी हो तो फिर क्या बात है. पता नहीं भंवरा ही है या फिर और कोई कीट लेकिन फूलों के पराग का मजा लेता हुआ। आप भी आनंद लें।

बाबा रामदेव द्वारा भारत स्वाभिमान ट्रस्ट की स्थापना और उन पर लगाये गए आरोप

पिछले दिनों बाबा रामदेव द्वारा भारत स्वाभिमान ट्रस्ट की स्थापना की गई जिसका मुख्य उद्देश्य भारत को भ्रष्टाचार से मुक्त कराने के लिये कार्य करना है। एक वेब-पत्रिका पर बाबा रामदेव के इस कदम के बारे में काफी विस्तृत जानकारी दी गयी थी. जाहिर है कि इस लेख पर लोगों ने टिप्पणियां भी की थीं. कुछ टिप्पणियों में यह कहा गया था कि बाबा लूट रहे हैं, बाबा ने इतने करोड़ रुपया कमा लिया है, उनकी फार्मेसी का टर्न-ओवर इतना है. बाबा हिन्दू धर्म का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं,बाबा ने चार-छ: कलाबाजी सीख ली हैं, बाबा प्रोपेगैण्डा कर रहे हैं और बाबा अब राजनीति में आकर सत्ता कब्जाना चाहते हैं. मैं ऐसे व्यक्तियों से कुछ प्रश्न पूछना चाहता हूं :- ऐसे कितने लोग हैं जो स्वयं या अपने बच्चों को बाबा की भांति बनाना चाहेंगे. ऐसे कितने लोग हैं जो अपने शारीरिक, भौतिक और सामाजिक सुखों को त्यागना चाहेंगे. क्या फार्मेसी चलाना कोई गुनाह है. क्या ये लोग बतायेंगे कि बाबा ने किसके लिये इतने रुपये इकठ्ठा किये. क्या इन लोगों को नहीं पता है कि हरिद्वार में कितना बड़ा चिकित्सालय-विश्वविद्यालय बाबा ने बनाकर खड़ा किया है क्या बाबा जबरदस्...

स्वात में पत्रकार की हत्या, कानपुर में युवक की हत्या, आईएस ने पुलिसवाले को हड़काया , सी-बी-आई को मिली एक सफलता

पिछ्ले लेख में मैंने लिखा था कि स्वात घाटी में शरिया कानून लागू हो गये हैं और भारत के लिये यह खतरे की घन्टी है. भारत की सभी तथाकथित धर्मनिरपेक्ष पार्टियों (हालांकि मेरे नजरिये से धर्मनिरपेक्ष होना किसी के लिये भी ठीक नहीं है, इस पर चर्चा फिर किसी दिन होगी) को मुस्लिम वोटों को पाने के लिये कट्टरपंथी मुस्लिम तत्वों को बढ़ावा देना तत्काल बन्द करना चाहिये अन्यथा जो आग आज स्वात घाटी को जला रही है वही आग कल भारत को जलाना प्रारम्भ कर देगी. अल-कायदा, तालिबान, हूजी, लश्कर समेत तमाम आतंकवादी गुटों का अगला निशाना भारत है, यह किसी से ढका-छुपा नहीं है. स्वात घाटी में शरिया कानून लागू किये जाने के बाद अब तालिबानों ने वहां से पाकिस्तान की फौज को हटाने का भी फरमान जारी कर दिया है. यह दिखाता है कि कट्टरपंथी इस्लामी तत्व बहुमत में आने के बाद किस तरह का व्यवहार करते हैं. अन्य धर्मों के लिये तो उनके पास किसी प्रकार की सहिष्णुता की भावना की उम्मीद क्यों कर की जा सकती है जब वह स्वयं इस्लाम के अनुयायियों के प्रति भी मानवीय व्यवहार नहीं अपनाते. मूसा खान नामक पत्रकार की हत्या और स्वात में इन तालिबानियों के आदेश...

सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण तथा जनता के पैसों का दुरूपयोग

बरेली में कई मन्दिर मस्जिद सड़क घेर कर बनाये गये हैं. ऐसा लगता है कि पिछले बीस-पचीस सालों में ही यह सब उग आये हैं. पिछले दिनों मोदी की चलाई एक मुहिम याद आ गयी जो अच्छी थी लेकिन जिसका व्यापक विरोध हुआ और मोदी (जो मुस्लिम विरोधी तो पहले ही थे, हिन्दू विरोधी भी ठहरा दिया), जिसमें सार्वजनिक स्थलों पर अतिक्रमण किये हुए मन्दिर-मस्जिद-मजार ध्वस्त किये जा रहे थे. काश ऐसा पूरे देश में हो जाये. जिला और मंडल स्तर के अधिकारियों के लिये जो बंगले दिये गये है वह कई-कई बीघों में फैले हैं जिनकी आवश्यकता समझ में नहीं आती. आखिर एक परिवार को कितनी जगह चाहिये रहने के लिये? यहीं विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष के लिये एक मकान बनाया है प्राधिकरण में जो लगभग ३५०-४०० गज में बना होगा, डुपलेक्स है और मेरे खयाल से छ:-सात कमरे होंगे जो सभी वातानुकूलित लगते हैं, बाहर से देखकर अंदाजा लगाया था. दस-बारह नौकर, जो सम्भवत: सरकारी ही होंगे, सेवा में लगे हुये दिखाई दिये. सुरक्षा के लिये भी एक सब-इन्स्पेक्टर रैंक का अधिकारी लगा था. मैं यह सोच रहा हूं कि अगर एक अधिकारी के ऊपर इतना खर्चा आता है तो ऐसे लाखों अधिकारियों पर जनता क...

एक और तस्वीर देखिये भारत के भविष्य की.

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एक और तस्वीर देखिये भारत के भविष्य की

बजट, यूनिक आई डी कार्ड, स्वात घाटी में शरिया क़ानून

बजट (लेखानुदान/अन्तरिम बजट) आ गया, हमेशा की तरह पक्ष-विपक्ष ने औपचारिकता निभा दी. पक्ष के लोगों ने अच्छा बताया तो विपक्ष ने आलोचना की. कई योजनाओं में धनराशि का आबंटन बढ़ा दिया गया है. सबसे बड़ी कठिनाई है भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचार के मूल में भी भाई-भतीजावाद और राजनीति शामिल है. जमीनी स्तर की जितनी भी योजनायें हैं उनमें भ्रष्टाचार लगातार बढ़ता जा रहा है. विकेन्द्रीकरण और पंचायतीराज व्यवस्था इसलिये लागू की गयी थी कि योजनाओं का इम्प्लीमेंटेशन जल्दी हो और पात्र व्यक्ति को लाभ पहुंचे लेकिन हुआ इसका उल्टा. विकेन्द्रीकरण के फलस्वरूप कमीशनखोरी और हिस्सेदारी बढ़ती गयी लिहाजा आम आदमी वहीं का वहीं रह गया जहां वह साठ साल पहले खड़ा था. किसी भी योजना का लाभ वास्तविक हकदार को तभी और सम्पूर्ण रूप में पहुंच पायेगा जब भ्रष्टाचार को समूल नष्ट कर दिया जाये और यह तभी सम्भव होगा जब सत्ता-शीर्ष पर बैठे लोग स्वयं अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत करें, जिसकी सम्भावना अभी भी कम ही लगती है. राजनीतिक दलों की नीयत इससे ही स्पष्ट हो जाती है कि मन्त्री और उनके रिश्तेदारों की सम्पत्ति को सूचना कानून के दायरे से बाहर कर दिया गया है....

सीबीआई की विश्वसनीयता पर फिर प्रश्नचिन्ह

सीबीआई की विश्वसनीयता पर फिर प्रश्नचिन्ह। मुलायम का मामला हो या माया का या फिर अन्य दलों के राजनीतिक दलों के नेताओं के मामले हों , उच्चतम न्यायालय की लताड़ बताती है कि सीबीआई को राजनीतिक आकाओं के इशारे पर काम करना पड़ता है . निठारी कांड में फैसला हुआ , सीधे शामिल दोषियों को फांसी हुई , सीबीआई के खाते में सफलता जुड़ी़ , अच्छा लगा . एक अहम सवाल इससे जुड़ा हुआ यह है कि जिन सरकारी अधिकारियों और पुलिस के जिन अफसरों ने इन्हें बचाने की कोशिश की , उन्हें अभियुक्त क्यों नहीं बनाया गया ? पंधेर को लेकर इतनी उदार क्यों है सीबीआई ? लेकिन बोफोर्स के अभियुक्तों को निकलने का मौका किसने दिया और क्यों दिया ? सिखों का नरसंहार का मामला ही देखिये , गवाह कहता है मैं गवाही देने के लिये तैयार हूं , लेकिन सीबीआई को गवाह का ही पता नहीं चलता . चारा कांड में असली गुनहगार अभी तक क्यों बचे हैं . लखूभाई पाठक का मामला हो या पनडुब्बी , सेंट कीट्स हो स्टैम्प घोटाला , नेता क्यों ...

पिंक पैन्टी, पब काण्ड पर कुछ और

मैं अपनी एक पोस्ट में " एक बेवकूफी की कुछ लड़कियों ने " की जगह " एक और बेवकूफी की कुछ लड़कियों ने " लिख गया था , जिस पर घुघूती जी ने अपनी टिप्पणी के द्वारा मेरा ध्यान आकृष्ट किया और मैंने तुरन्त क्षमा मांगते हुये सुधार किया। कविता जी ने मेरी टैग लाइन " बराबरी का पैमाना " के बारे में लिखते हुये यह कहा कि मैं स्वयं तो बराबरी चाहता हूं लेकिन लड़कियों के मामले में मैं एकतरफा व्यवहार कर रहा हूं . मैं न केवल लड़कियों बल्कि लड़कों के भी नशा करने के सख्त खिलाफ हूं . क्या लड़के मदिरापान करते हैं तो उन्हें नशा नहीं होता ? शराब पीने के सम्बन्ध में मुझे एक सज्जन ने एक बड़ी मजेदार बात बताई . उन्होंने कहा कि कुछ लोग मदिरा पान को यह कहकर जायज ठहराते हैं कि वे इसे नशे के लिये नहीं आनन्द के लिये पीते हैं . उन्होंने कहा कि यदि नशे के लिये नहीं पीते हैं तो फिर दूध - मट्ठा क्यों नहीं पीते . दूध - मट्ठे से भी नशा नहीं होता और फिर अगर न...

चाय की केतली और बचपन

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कितनी मासूमियत है इस बचपन में, जो किसी कार्यालय में चाय पहुँचने का काम करता है। इसकी मुस्कराहट देखिये, कहीं कोई चिंता नहीं, कहीं कोई परेशानी नहीं। काश इसका भी कोई भविष्य अपने पिता की चाय की दुकान से हटकर होता। इस उम्र के बच्चों की जो हसरतें होती हैं वह कहीं चाय की केतली में घुलकर ख़त्म हो गयीं हैं।

एक बेवकूफी से भरा काम किया कुछ लड़कियों ने

अभी एक बेवकूफी से भरा काम किया कुछ लड़कियों ने, जिन्होंने एक पार्टी के अध्यक्ष को अंडरगारमेन्ट क्या भेजे, खबरिया चैनलों की तो लाटरी लग गयी. ऐसे शब्द और ऐसे ग्राफिक्स दिखा रहे थे जिन्हें लिखते हुये मुझे शर्म आ रही है. पता नहीं क्या मानसिक स्तर है इन लड़कियों का और क्या मानसिक स्तर है उन खबरिया चैनलों के सम्पादकों का जिन्होंने इस तुच्छ घटना को खूब जोर शोर से उछाला. वात्स्यायन भी यहीं हुये थे, जिनके लिखा हुआ ग्रन्थ आज भी अतुल्य है, लेकिन उसी देश में खुलेपन के नाम पर बेहयाई का ऐसा प्रदर्शन! और हो भी क्यों न, कुछ ही वर्ष पहले जब एक स्वनामधन्य निर्माता-निर्देशक और धर्मनिरपेक्षता तथा मानवाधिकारों के पैरोकार ने यह कहने में कोई हिचक नहीं दिखाई कि अगर यह लड़की मेरी ...... ......................................................................! क्या से क्या हो गया है भारत के लोगों का मानसिक स्तर. घुघूती जी का धन्यवाद कि उन्होंने अपनी टिप्पणी के जरिये मेरी एक बड़ी गलती को सुधार दिया - मैंने और शब्द अनजाने में प्रयोग किया था जो मुझे नहीं करना चाहिये था। मैंने लेख की अपनी गलती सुधार ली है और यह सबक भ...

बार और पब तथा शराबखोरी के अन्य अड्डे बंद क्यों नहीं होना चाहिए

पिछले दिनों पब काण्ड पर बहुत बहस मुबाहिसे हुये, काफी लिखा पढा़ भी गया इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना पर. कुछ लोगों ने इसे खुलेपन पर हमला बताया, कुछ ने हिन्दू संस्कृति पर कुठाराघात और कई लोगों ने इसे तालिबानीकरण के रूप में भी प्रस्तुत किया गया. मेरा नजरिया इससे कुछ भिन्न है. मेरा यह मानना है कि बारों और पबों को बन्द कर देना चाहिये, बल्कि इनके अतिरिक्त वे सभी जगह जहां शराब परोसी जाती है बन्द कर देनी चाहिये. क्योंकि इन स्थानों पर लोग आते हैं, शराब पीते हैं और वापस जाते हैं. जाहिर है कि इनमें से अधिकतर व्यक्ति शराब के ही सुरूर में इन स्थानों से अपने घरों की ओर वापस लौटते हैं, कोई भी व्यक्ति चार-पांच घण्टे नशा उतरने का इन्तजार नहीं करता और नशे की हालत में ही सफर करता है. पब और बार उन व्यक्तियों के लिये तो ठीक हैं जो शोफर-ड्रिवन गाड़ी में चलते हैं, लेकिन ऐसे कितने लोग हैं. यह बिल्कुल सत्य है कि नशा तमाम बुराइयों की जड़ है, नशा मस्तिष्क को प्रेरित करता है, इसमें मौजूद तत्व दिमाग को अनियन्त्रित कर देते हैं और संवेगों को इस तरह उभार देते हैं कि इन्सान को अच्छे-बुरे का ज्ञान नहीं रह पाता. उसके ऊपर संवेग ह...

पहेली का हल

दरअसल यह कोई ऐसी-वैसी पहेली नहीं है.यह पहेली वैदिक भारतीय वर्ण व्यवस्था से संबंधित है और इसका उत्तर उन सभी व्यक्तियों के मुंह पर एक तमाचा है जो भारतीय समाज में जातीयता का जहर घोल रहे हैं, चाहे फिर वह किसी भी जाति से संबंधित क्यों न हों. इन सभी व्यक्तियों के बीच यह समानता है कि यह सभी उस भारतीय वैदिक वर्ण व्यवस्था को सामने लाते हैं जो चक्रीय थी, यह सब प्रदर्शित करते हैं कि प्राचीन वैदिक युग में व्यक्ति किसी विशेष जाति से बंधा नहीं होता था बल्कि कर्म से वर्ण तय होता था और एक वर्ण से दूसरे वर्ण में वैवाहिक संबंध होते थे. इस पहेली का उत्तर है कि भारत में वैदिक युग में लागू वर्ण व्यवस्था चक्रीय थी न कि अपने स्थान पर अडिग, अविचल. दुर्भावना तथा पूर्वाग्रह से ग्रसित कुछ लोग अपने कुतर्कों के माध्यम से भारतीय वैदिक ग्रंथों के बारे में बिना पढे़ कुछ भी बोलते रहते हैं. ब्राह्मण अपने लिये सर्वोच्च मानते हुये अपने ढ़ंग से व्याख्या करते हैं तो अनुसूचित जातियों के लोग अपने ढ़ंग से अपने समर्थन के लिये तथ्य खोज लाते हैं. इसमें कोई दोराय नहीं कि अनुसूचित जातियों के साथ अमानवीय व्यवहार किया गया और आज भी ...

एक पहेली सुलझाओ तो जानें

महर्षि बाल्मीक महर्षि आत्रेय महर्षि वेदव्यास सत्यकाम महाराज जनश्रुति महर्षि पराशर जनक महर्षि विश्वामित्र श्रृंगी कौशिक गौतम वशिष्ठ अगस्त्य माण्डव्य मातंग भारद्वाज रैक्व पैरभी भालानन्द रथानिधि वृहस्पति ययाति महर्षि अंगिरा कसीवान अर्जुन भीम सुमित्रा ऐलुष अतापता - इन सभी महान व्यक्तियों में अपने क्षेत्र में महारत रखने के अतिरिक्त एक बड़ी समानता है , खोजें और बतायें .

रा के अधिकारी घूस लेते हुए गिरफ्तार

रा के एक अधिकारी को एक लाख घूस लेते हुए गिरफ्तार किया गया , यह आठ लाख की घूस की एक किश्त थी । भ्रष्टाचार देश में कैंसर की तरह फैला हुआ है , हर अधिकारी , सांसद और मंत्री यह जानता है । कौन लोग हैं जो एक साल में दस - बारह लाख बच्चों की फीस देते हैं , कौन लोग हैं जो पन्द्रह - बीस लाख की गाड़ियों में घूम ते हैं , कौन लोग हैं जो करोड़ों रुपये के मकान खरीद रहे हैं । आख़िर यह सब क्यों सरकार को दिखाई नहीं देता , हर एक जानता है लेकिन मिटाना कोई नहीं चाहता । पारदर्शिता का दावा करने वाले कह रहे हैं कि मंत्रियों तथा उनके रिश्तेदारों की संपत्ति सार्वजनिक नहीं की जा सकतीं , वह इसलिए क्योंकि मंत्री अपने नाम तो कम रखते हैं रिश्तेदारों के नाम सब कुछ करा देते हैं । इस माहौल में भ्रष्टाचार ख़त्म किया ही नहीं जा सकता क्योंकि सरकारें चाहती ही नहीं , दिखावा कुछ भी करती रहें ।

सरकार की सहमति से बिकता जहर

सीएसई ने एक बार फिर अपनी रिपोर्ट से तहलका मचा दिया है. इसकी रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि भारतीय बाजार में बिकने वाले ब्रांडेड खाद्य तेलों में ट्रांस फैट (जोकि मात्रा बढ़ने पर हृदय के लिये अत्यन्त घातक बन जाता है) अन्य देशों में अधिकतम स्वीकृत मात्रा से पांच से बारह गुना अधिक मात्रा में मौजूद है. क्या इन चीजों का पता भारत सरकार को नहीं है? इसका उत्तर है, बिल्कुल है, स्वास्थ्य मन्त्री इसे स्वीकारते हैं लेकिन यह कुतर्क देते हैं कि इसकी बिक्री को एकदम प्रतिबन्धित नहीं किया जा सकता, यदि प्रतिबन्धित करेंगे तो जो भी ब्रांड मानकों के आसपास भी हैं उनकी बिक्री में और दामों में भारी उछाल आ जायेगा और भी अन्य कठिनाईयां उत्पन्न हो जायेंगी. लिहाजा भारतीय इन खाद्य तेलों के शिकार होते हैं तो होते रहें, मरते हैं तो मरते रहें. मैंने पहले भी प्रधानमन्त्री महोदय की सर्जरी को लेकर स्वास्थ्य सुविधाओं की दयनीय दशा पर लिखा है. जिस देश में स्वास्थ्य सेवाओं की इतनी दयनीय हालत हो, वहां सरकार सबकुछ जानने के बावजूद मजबूरी का रोना रोते हुये तेल निर्माता कम्पनियों को पत्र लिख कर सीना चौड़ा कर रही हो उस देश को को...

आठ वर्षीय बालिका कोमल की निरंकुश पिटाई

शायद अब कार्तिकेय को भी मुझसे सहमत होना पड़ेगा, इटावा के एक थाने में आठ साल की बच्ची कोमल की पिटाई करते हुये दरोगा को लगभग सभी खबरिया चैनलों पर दिखाया गया. साथ में तीन सितारा थाना प्रभारी भी खड़ा था और बाकी के पुलिस वाले भी तमाशबीन बने हुये थे. थाना प्रभारी की मर्जी के बिना थाने में पत्ता भी नहीं हिल सकता, इसलिये जितना कुसूर बच्ची को पीटने वाले दरोगा का था, उससे अधिक तीन सितारे वाले थाना प्रभारी का था. पहले-पहल तो मामले पर यह कहकर धूल डालने की कोशिश की गई कि बच्ची ने गलती की थी और सबक सिखाने की नीयत से यह कार्रवाई की गयी. मैं फिर से कहना चाहता हूं कि पुलिस का काम ही सही-गलत का फैसला कर न्याय देने का हो गया है तो फिर अदालतों की क्या आवश्यकता है, अदालतों को बन्द कर देना चाहिये. यदि इस मामले में पुलिस ने किसी जवान युवक की पिटाई की होती तो इन्हीं कुतर्कों को देकर पल्ला झाड़ लिया गया होता, जैसे कि पिछले दिनों लखनऊ में एक चिकित्सक को क्षेत्राधिकारी ने पीटा और इससे पहले मुरादाबाद के एस०एस०पी० ने आई०टी०बी०पी० के एक सब-इन्स्पेक्टर को लठियाया था और उन सभी के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की गयी, लेकिन...

एक हारे हुए खानदानी नेता की फरियाद

फकीर जान के मुझको न तुम भगा देना तुम्हीं ने मुझको हराया तुम्हीं जिता देना तुम्हीं ने डैड जिताये, जिताया अम्मा को और तो और जिताया हमारे मम्मा को भूल जो हमसे हुई उसको तुम भुला देना लगी है चोट कलेजे पे उम्र भर के लिये तड़प रहे हैं फकत एक मिम्बरी के लिये अरमान मिम्बरी के हमारे न तुम मिटा देना जहां में और हमारा कहां ठिकाना है मिलेंगे वोट जहां हमको वहीं जाना है जो हो सके तो मुकद्दर मेरा जगा देना रखी है दारू मंगा के रखा है मुर्गा भी हाथ में लठ्ठ लिये इक खड़ा है गुर्गा भी जो वोट मुझको न दिये तो सर तुड़ा लेना मूल रचयिता से क्षमा याचना के साथ

प्रधानमन्त्री महोदय की सफल बाईपास सर्जरी से जुडा मुद्दा

प्रधानमन्त्री महोदय की सफल बाईपास सर्जरी हुई, हमारे प्रधानमन्त्री जल्द स्वस्थ होकर कार्य पर वापस लौटें, सारे राष्ट्र की यही मंगलकामना है. इस समय मुझे अपने एक पड़ोसी जो सेवानिवृत्त सिपाही हैं, के पिता की याद आ गयी. आप कहेंगे कि बात को कहां से उठाकर कहां रख दिया और इसके औचित्य पर भी प्रश्नचिन्ह लगा सकते हैं. लेकिन मेरी बात में दम है. मैं जिन की बात कर रहा था, वे सज्जन देश की सेवा कर सहायक उप-निरीक्षक के पद से सेवानिवृत्त हुये हैं और अब एक सिक्योरिटी कम्पनी में काम कर रहे हैं. इस समय लगभग पांच हजार रुपये किसी निजी सिक्योरिटी कम्पनी द्वारा उन्हें दिये जा रहे हैं. लगभग इतनी ही पेंशन पा रहे हैं, उनके घर में कुल छ: प्राणी हैं, दो स्वयं मियां-बीवी, तीन बच्चे और एक उनके पिता. उनके पिता के ह्रदय की आर्टरी ब्लाक हो गयीं, इलाज अब एक ही है, सर्जरी. निजी क्षेत्र के अस्पतालों में सर्जरी कराने की औकात नहीं है उनकी. जिला स्तर के सरकारी अस्पतालों में यह सुविधा है ही नहीं. निजी क्षेत्र के अस्पताल में इलाज करायेंगे तो सम्भवत: उन्हें अपना मकान तक बेच देन पड़ेगा. जायें तो कहां जायें. प्रधानमन्त्री महोदय ने य...