Posts

Showing posts with the label police

हरियाणा में एसटीएफ भंग

पिछली कई पोस्ट में मैंने पुलिस कर्मियों के भ्रष्टाचार के ऊपर और अपराधीकरण के बारे में लिखा था. भारतीय पुलिस के लिये जस्टिस श्रीमन ए०एन०मुल्ला ’संगठित अपराधियों के गिरोह’ के रूप में संबोधित किया था. लगभग हर रोज कहीं न कहीं से पुलिस कर्मियों द्वारा किये जा रहे अपराधों के बारे में खबर सुनने को मिल ही जाती है. यह तो वे वारदातें हैं जो हाईलाईट हो जाती हैं, इनसे हजारों गुना ऐसी वारदातें होती हैं जो सामने आती ही नहीं. एक चैनल पर एंकर एक आईपीएस अफसर से हरियाणा में एसटीएफ की कारगुजारियों के बारे में बात कर रही थी. हरियाणा में एसटीएफ को एक ज्वैलर से वसूली के सिलसिले में भंग कर दिया. यह वसूली की कार्रवाई सीसीटीवी में रिकार्ड हो गयी. ज्वैलर अपनी जान की सलामती की गुहार लगाता दिखाई दिया. आईपीएस अफसर लगातार यह सिद्ध करने में लगी थीं कि जनता को पुलिस में भरोसा दिखाना चाहिये और सब एक जैसे नहीं होते. पता नहीं वह कौन सा पैमाना होता है जिससे आम जनता यह जान सकती है कि कौन सा पुलिसवाला सही पुलिसवाला है और कौन सा गलत. वह यह भी कह रही थीं कि ऊपर भी अफसर बैठे हुये हैं लोगों को उनसे राब्ता कायम करना चाहिये. मैं...

भारतीय पुलिस का एक और बहादुरी का कारनामा

भारत की पुलिस वैसे ही बहादुरी के लिए विख्यात है । अभी चित्रकूट में उत्तर प्रदेश की पुलिस ने बहुत बहादुरी से काम लिया और तीन दिन के बाद कई मकानों को जलाने के बाद डकैत को मार गिराने में कामयाब हुई । फिर दस दिन पहले लखीमपुर में पूरी बहादुरी के साथ एक महिला को ट्रेन से धक्का देकर मार गिरा सकी । उसके बाद दो दिन पहले लखनऊ में एक महिला को बामुश्किल मार - पीटकर उसके पैर तोड़ने में कामयाब हो पाई । अब देहरादून पुलिस एक एम ०बी० ए० युवक को बड़ी मशक्कत के बाद पाँच गोलियां मारकर मारने में कामयाब हुई । यह युवक गाजियाबाद से नौकरी करने देहरादून आया था । युवक क्या था पूरा आतंकवादी था, एक मोटर-साइकिल, तीन लड़के, एक तमंचा, एक पिस्टल। दरोगा और सिपाहियों पर दिन में हमला। किस्मत अच्छी, दरोगा बचा, पुलिस वाले बचे। बाल न बांका कर सके जो जग बैरी होए। इसलिए बाल बांका न हुआ, न दरोगा का, न सिपाहियों का, वरना कौन कसर छोड़ रखी थी एम०बी०ए० पास नौकरी करने आए युवक ने। क्या पता नौ एम०एम० पिस्टल चल जाती तो? यहाँ तो शहादत हो जा...

आ गए लोक सभा चुनाव 2009

एक बार फिर देश तैयार है सैकडों करोड़ रुपए चुनाव में व्यय करने के लिए। फिर वही दल, वही मुखौटे, वही आयाराम-गयाराम। फिर वही दल-बदल दिल-बदल की आड़ में। फिर वही गुंडे-मवाली, जब तक सामने वाले के यहाँ थे अपराधी थे, अब तौबा कर ली। फिर अपराध जब किया था जब सामने वाले के यहाँ थे, अब तो नहीं किया। फिर देश को आगे ले जाने के सपने, साठ सालों में नहीं कर पाये तो अब क्या कर पायेंगे। जब आबादी तिहाई थी तब कुछ नहीं उखाड़ सके तो अब क्या उखाडेंगे। जनता तो पहले भी शोषित थी अब भी रहेगी। फर्क इतना है कि शोषण करने वाले चेहरे बदल जाते हैं। पहले भी बेवकूफ बनाया जाता था अब भी बनाया जाएगा। स्विस सरकार कहती है कि आप चाहे तो अपने देश के भ्रष्टाचारियों का पैसा ले आयें लेकिन यहाँ कौन करेगा और क्यों करेगा। नशा सीमापार से आता है, बॉर्डर पर पोस्टिंग के लिए क्या कुछ नहीं किया जाता। पुलिस जब अपराधियों से मिल जाए या ख़ुद उनके लोग अपराध में लिप्त हों तो देश कैसे चलेगा। सी बी आई राशन घोटाले की जांच को मना कर देती है, बहुत खूब। क्योंकि अपराध बड़ा है, इसलिए बहुत बड़ा अपराध करो और जांच भी नहीं होगी। इस के खिलाफ कुछ हो भी नहीं सक...

पुलिस द्वारा किया गया एनकाउंटर या हत्या

पुलिस ने एक बार फिर अपना क्रूर चेहरा दिखाया उत्तरान्चल के खटींमा में। इस घटना में एक युवक (जिस पर अपनी प्रेमिका के साथ मिलकर एक हत्या करने का आरोप भी था) ने अपनी मांग को पूरा कराने के लिये सरे-बाजार अपनी प्रेमिका की बहन के सिर पर देसी पिस्तौल लगा दी (लगभग उसी तरह जैसे कि राहुल राज ने किया था अन्तर इतना है कि राहुल राज पर किसी हत्या का आरोप भी नहीं था और न ही उसने किसी के सिर पर पिस्तौल लगाई थी)। कुछ ही देर में वहां तमाशबीन इकट्ठे हो गये और पुलिस वाले भी। पुलिस वालों ने उस युवक से बात करने की कोशिश की और जब उनके सब्र का बांध टूट गया तो कमांडो बनने की नाकाम चेष्टा की। और उनकी इस हरकत को देखकर उस युवक ने अपनी प्रेमिका की बहन पर गोली चला दी। इसके बाद क्या था बहादुर पुलिस ने उस युवक की भी हत्या कर दी। मैं यहां फिर उस युवक द्वारा की गयी वारदातों का समर्थन नहीं कर रहा, बल्कि यह कहना चाहता हूं कि जब स्वयं पुलिस ही कानून का पालन नहीं करती तो वह कानून का अलम्बरदार कैसे बन सकती है। बिल्कुल स्पष्ट बताया जाता है कि अपराधी को पकड़ने के लिये न्यूनतम बल प्रयोग किया जाना चाहिये, लेकिन चाहे वह राहुल राज ...

कहानी एक पुलिस वाले की

पिछली पोस्ट की तरह यह भी एक सच्ची घटना है। देहात क्षेत्र के एक थाने में वाहन चोरी की एक रिपोर्ट दर्ज हुई। वाहन का मालिक एक रसूखदार आदमी था, लिहाजा थानेदार ने तेजी से कार्रवाई करना प्रारम्भ की। मेहनत रंग लाई और करीब दो सौ किलोमीटर दूर वह वाहन पकड़ा गया। जिस व्यक्ति के यहाँ से वह वाहन पकड़ा गया, वह व्यक्ति एक गरीब मैकेनिक था। वह वाहन उसके यहाँ मरम्मत हेतु किसी व्यक्ति ने दिया था। थानेदार साहब ने उस मैकेनिक को पकड़ा, तदुपरांत वाहन चोर को भी पकड़ लिया गया। अब चूँकि चोर पुलिस से बहुत अच्छी तरह से वाकिफ था, उसने तुंरत ही साम-दाम-दंड-भेद का सहारा लिया। उस चोर ने थानेदार साहब से अकेले में कुछ बातें की, थोड़ी देर बाद थानेदार साहब की कलम के प्रताप से वाहन मैकेनिक चोर बन गया, यद्यपि उस इलाके के सभी लोग यह जानते थे कि वह मैकेनिक चोर नहीं था। लेकिन पुलिस के आगे किस का बस चला है जो उनका चलता। उस गरीब मैकेनिक को तीन दिन अवैध रूप से हिरासत में रखा गया, उसे प्रताड़ना दी गई यह कबूल कराने को कि उसी ने वह वाहन चुराया था और उस इलाके में हुई कई अन्य चोरियों में भी उसी का हाथ था। उसने यह गुनाह नहीं कबूल...

अफसर बना तस्कर

अफसर करने लगे जब नशे का कारोबार, क्यों न हो फिर देश का अब फुल बंटाधार, अब फुल बंटाधार दाग वर्दी पर डाला, देखो तस्कर बना पुलिस का अफसर आला, कह दानव कविराय सजा दीजिये निराली , खाने में दो कोकीन इन्हें भर-भर कर थाली।