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Showing posts from December, 2010

सूचना अधिकार अधिनियम में प्रस्तावित संशोधन, अधिनियम की मूल भावना के विरुद्ध

सूचना का अधिकार अधिनियम, २००५ के लागू होने के बाद ही से भ्रष्ट अधिकारियों और नेताओं में बेचैनी व्याप्त हो गयी थी. इसके लागू होने से पहले तक छोटी से छोटी सूचना को भी अंग्रेजों के द्वारा बनाये गये सरकारी गोपनीयता अधिनियम के अन्तर्गत दबाकर रखा जाता था. और यदि कोई गरीब-गुरबा जिन्हें हमारे राजनीतिक दल अपना हाथ-पैर बताते हैं, देश का मालिक बताते हैं, कोई जानकारी प्राप्त करने किसी सरकारी विभाग पहुंच जाता था तो उसे दुत्कार कर भगा दिया जाता था. हालांकि यदि नौकर-मालिक वाली बात सही होती तो क्या किसी नौकर की औकात है जो अपने मालिक को दुत्कार कर भगा दे. सूचना का अधिकार अधिनियम, २००५ के लागू होने के बाद से भ्रष्ट और निकम्मे अधिकारियों में खलबली मच गई और उन्होंने कई नई तकनीकें विकसित कीं, सूचना न देने के लिये. कई दफा कुछ अधिकारियों ने सूचना देने के नाम पर लाखों रुपये जमा कर देने को कहा. अधिकतर अधिकारियों ने सूचना उपलब्ध नहीं है का सहारा लिया. कुछ जगह तो यह कारनामा भी किया गया कि रजिस्टर्ड लिफाफे के अन्दर सादा कागज रखकर भेज दिया गया. कुछ अधिकारियों ने सूचना अधिकार अधिनियम में मांगी सूचना को दूसरों की व्...

लश्करे-तैयबा से अधिक खतरनाक है भगवा आतंकवाद

राहुल कह रहे हैं कि लश्करे-तैयबा से अधिक खतरनाक है भगवा आतंकवाद... कांग्रेस को इसमें षड़यन्त्र दिखाई दे रहा है. रेडक्रास यह बता रही है कि कश्मीर में भारतीय सेना अत्याचार कर रही है. हम लोग एक दूसरे का मुंह देख रहे हैं. इन बयानो को देखकर मैं भी संशय में पड़ गया हूं कि कहीं वाकई में हिन्दुओं का धर्म ही तो आतंकवाद को बढ़ावा नहीं दे रहा. इसलिये मेरी विनती है कि निम्न तथ्य बताये जायें. १. पूरे देश में आजतक कुल कितने आतंकी हमले हुये हैं. २.आतंकी हमलों की परिभाषा क्या है. ३.विगत वर्ष महाराष्ट्र में गणेश विसर्जन के समय हुये दंगे आतंकी परिभाषा में आते हैं या नहीं. ४.अभी तक देश में हुये विभिन्न आतंकी हमलों में कुल कितने लोग मारे गये हैं, इनमें से कितने किस धर्म को मानने वाले थे, संख्या बताई जाये. ५.हिन्दू आतंकवादियों ने कहां कहां कितने हमले किये हैं, उनकी संख्या तथा उनमें मारे गये लोगों की संख्या. ६.हिन्दू आतंकवादियों के प्रशिक्षण शिविर कहां कहां चल रहे हैं. ७.हिन्दुओं के इन आतंकवादियों को धन कहां से मिल रहा है. ८.हिन्दू आतंकवादी हमलों में किस किस धर्म के कितने लोग मारे गये. ९.इन हिन्दू आतंकवादिय...

ब्लागवाणी के बाद अब चिट्ठाजगत भी ...

पहले नारद, फिर ब्लागवाणी और अब चिट्ठाजगत भी बन्द हो गया (यदि यह तात्कालिक तौर पर आई हुई कमी के कारण नहीं है तो). दर-असल यह एग्रीगेटर काफी अच्छे ढंग से काम कर रहे थे. इधर आपने लेख को प्रकाशित किया उधर एग्रीगेटर ने आपके चाहने वालों तक पहुंचाया. किस पोस्ट को कितनी बार पढ़ा गया( अर्थात हिट किया गया, फिर चाहे लिखने वाला स्वयं ही क्यों न करें  {इसमें एग्रीगेटर की कोई गलती नहीं है}), किस पोस्ट पर कितनी टिप्पणी आईं (यह फिर अलग बात है कि लिखने वाला ही अलग आई-डी और नामों से ही कर रहा हो, और इसमें भी एग्रीगेटर की कोई कमी नहीं है), कितनों को पसन्द आई और कितनों को नापसन्द. सब कुछ, एक ही जगह. कुछ लोगों को आपत्तियां रहीं इनके रैंकिंग सिस्टम से, इनके सक्रियता क्रमांक वगैरा को लेकर. लेकिन मुझे कभी नहीं रही. आप कह सकते हैं कि मेरे ऊपर अंगूर खट्टे होने वाली कहावत चरितार्थ हो रही है, इसलिये मैं ऐसा लिख रहा हूं लेकिन मुझे इसमें भी कोई आपत्ति नहीं.  मुझे इन एग्रीगेटरों के बन्द होने या रूठने या फिर बीमार पड़ने का निहायत अफसोस है. कारण है कि कई ब्लाग तो मैंने अपने साइड बार में लगा रखे हैं लेकिन सौ से ऊ...

इस वीडियो को देखकर अपने विचार दीजिये

  अब इस वीडियो को देखिये और बताइये कि भारत में सक्सेसफुल कौन है. वह जो नियम का पालन कर रहा है या फिर वह जो नियम को तोड़ता है.

भ्रष्टाचार का इलाज

किसी ने कहानी सुनाई थी. सच्ची या झूठी, पता नहीं. बताया कि एक यूरोपियन देश में ट्रेन चलना प्रारम्भ हुई. लोगों ने यात्रा करना प्रारम्भ किया. हमारे यहां की ही तरह वहां भी बिन टिकट चलने वालों की कमी न थी. नतीजा हुआ रेल को नुकसान. मन्त्रियों में चर्चा हुई. एक ने सुझाव दिया कि दस लोगों को फांसी देना पड़ेगी और बेटिकट चलना खत्म हो जायेगा. सुझाव नहीं माना गया. लोग बेटिकट चलते रहे, पकड़े जाते रहे, जुर्माना देते रहे, छूटते रहे. समय बीता, घाटा बढ़ता रहा. अन्त में दस लोगों को फांसी का सुझाव माना गया. उस मन्त्री ने सघन जांच कराई और एक माह में जो व्यक्ति सबसे अधिक बार बेटिकट पकड़ा गया, उसे फांसी देने की घोषणा हर जगह कराई गई. पूरे एक माह तक. अन्त में उसे एक सार्वजनिक स्थान पर फांसी दे दी गयी. इसी प्रकार यह कार्यक्रम दस माह तक चालू रहा. अन्तिम परिणाम रहा कि लोग टिकट लेकर चलने लगे. कई जगह पढ़ा है कि भ्रष्टाचारियों को फांसी होना चाहिये. अच्छी बात है. लेकिन इसके लिये खुफिया तन्त्र, न्यायतन्त्र मजबूत हो, तवरित हो, अच्छा हो, सच्चा हो. लेकिन जो भ्रष्टाचार कृत्रिम मंहगाई के रूप में है, उस पर कैसे काबू आयेगा. समाज/...

विकीलीक्स प्रतिबन्धित !

क्या  विकीलीक्स डाट आर्ग प्रतिबन्धित कर दी गयी है. अभी तीन दिन पहले तक wikileaks.org ठीक-ठाक ढ़ंग से खुल रही थी. लेकिन आज यह साइट नहीं खुल पा रही. ऐसा प्रतीत हो रहा है कि इस साइट को  प्रतिबन्धित कर दिया गया है. यदि यह सत्य है तो आखिर यह कैसी अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता है, जिसमें बोलना तो दूर, देखना-पढ़ना और सुनना भी मयस्सर नहीं है. कहीं ऐसा तो नहीं कि विकीलीक्स के खुलासों से दुनिया में कई देशों के सत्ताशीर्षों के लिये असुविधाजनक स्थिति पैदा होने के कारण दुनिया के चौधरी विकीलीक्स द्वारा उजागर सत्य को छुपाने हेतु इस प्रकार के कुचक्र रच रहे हैं.

राजीव दीक्षित जी का जाना

स्वामी रामदेव जी और भारत स्वाभिमान ट्रस्ट से जुड़े राजीव दीक्षित जी का निधन तीस नवम्बर को हो गया. दीक्षित जी फ्रांस में टेलीकम्युनिकेशन सेक्टर में  कार्य कर चुके थे. अविवाहित रह कर पिछले कई वर्षों से स्वदेशी का प्रचार-प्रसार कर रहे थे तथा स्वामी रामदेव जी के भारत स्वाभिमान ट्रस्ट से जुड़े हुये थे. प्रख्यात वक्ता थे और अर्थशास्त्र जैसे नीरस विषय पर भी बड़े रोचक ढ़ंग से व्याख्यान देते थे. तीस नवम्बर को ही जन्मे और तीस नवम्बर को ही भारत पर बलिदान हो गये. जिस समय देश को सबसे अधिक आवश्यकता थी उसी समय वह ब्रह्मलीन हो गये. दुख की बात यह कि इतने विद्वान व्यक्ति के जाने पर हमारे देश के टीवी चैनलों और समाचार पत्रों ने थोड़ा सा वक्त और जगह देना उचित नहीं समझा. भारत स्वाभिमान ट्रस्ट, स्वामी रामदेव जी के साथ भारत के लिये भी बहुत बड़ी हानि हुई है.  राजीव दीक्षित जी को नमन.