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Showing posts from June, 2010

हुर्रियत कांफ्रेंस की धर्मनिरपेक्ष मांग-अमरनाथ यात्रा की अवधि घटाकर पन्द्रह दिन की जाये..

धर्मनिरपेक्ष भारत के धर्मनिरपेक्ष राज्य जम्मू कश्मीर की एक धर्मनिरपेक्ष पार्टी हुर्रियत कांफ्रेंस ने मांग की है कि अमरनाथ यात्रा के कारण होने वाली दिक्कतों के मद्देनजर अमरनाथ यात्रा की अवधि घटाकर पन्द्रह दिन कर दी जाये. उत्तर प्रदेश के एक शहर से अजमेर के जायरीनों के लिये विशेष ट्रेन रवाना की जाती है और दूसरी तरफ जम्मू कश्मीर में वैष्णो देवी के दर्शन के लिये एन्ट्री फीस वसूली जाती है. हो सकता है कि जम्मू-कश्मीर की धर्मनिरपेक्ष सरकार एक और तोहफा देते हुये यह मांग भी स्वीकार ले. आप माने या न माने, देश की अखण्डता, तथाकथित धर्मनिरपेक्ष दलों की प्रो-इस्लामिक मानसिकता, हिन्दुओं की व्यापारिक मानसिकता और हमें क्या फर्क पड़ता है जैसी सोच के चलते खतरे में है. आने वाले समय में देश में साम्प्रदायिक आधार पर भौगोलिक और राजनैतिक विभाजन सन्निकट है. और इन नेताओं की आने वाली पीढ़ियों को भी इन धूर्त राजनीतिबाजों के किये की सजा भुगतनी पड़ेगी, पूरे देश के साथ. यह सारे विभाजन के लक्षण हैं, जिसे राजनीतिबाज देखना पसन्द नहीं करते.

स्टेज पर मोहम्मद रफ़ी साहब को गाते हुये सुनिये और नौशाद साहब भी साथ में हैं

एक बहुत सुन्दर गाना है "मधुबन में राधिका नाचे रे". स्वयं रफी साहब को गाते हुये देखिये, नौशाद साहब साथ में खड़े हैं.  एक divine feeling है इस गीत में. रफी साहब के सबसे छोटे सुपुत्र शाहिद रफी रफिनी नाम से गोरेगांव में एक फैशन स्टोर  के मालिक हैं. कुछ और जानकारी हो तो मुझे अवश्य बतायें.

हेमंत कुमार साहब के जन्मदिन सोलह जून के अवसर पर उन्हें लाइव सुनें.

हेमंत दा का जन्मदिन है आज. आप जानते ही हैं कि वे एक बेहद सुरीले गले के मालिक थे, बहुत अच्छी धुनें बनाते थे और फिल्मकार भी थे. देवानन्द साहब की फिल्म "जाल" से  हेमंत दा की आवाज में  एक बहुत ही खूबसूरत गाना सुनिये - "ये रात ये चांदनी फिर कहां". ऊपर से चार चांद यह कि स्वयं दादा ही स्टेज पर इसे गा रहे हैं...  

ये रहा हेमंत दा का एक बेहद कर्णप्रिय गीत

जाग दर्द-ए-इश्क जाग. इस गीत को स्वयं हेमंत दा को गाते हुये सुनिये. और मेरी इस प्रार्थना पर भी कुछ ध्यान दीजिये... स्वर्गीय किशोर कुमार की एक फिल्म थी "सुहाना गीत" जो पूरी नहीं हो पाई, जिसका एक गीत " बाजे बाजे बाजे रे कहीं बांसुरिया " का थोड़ा अंश सुनने को मिल सका. बहुत ही मधुर गीत है. क्या यह गीत और इस फिल्म के अन्य गीत जो रिकार्ड किये गये थे, किसी महानुभाव के पास उपलब्ध होंगे? इसके अतिरिक्त " कहां से चले थे, कहां को है जाना, मुसाफिर न जाने कहां है ठिकाना ". यह गीत उन्नीस सौ छियासी से पहले का रिकार्ड है जिसे किसी महिला गायक ने आवाज दी है. श्रीमान भूपिन्दर सिंह की आवाज में तो यह गीत मिल गया जिसके लिये अमित और प्रकाश गोविन्द जी को धन्यवाद, किन्तु यदि महिला गायक की आवाज वाला गीत मिल जाये तो और भी अच्छा हो.

सुहाना गीत के गीत मिल पायेंगे कहीं.

स्वर्गीय किशोर कुमार की एक फिल्म थी "सुहाना गीत" जो पूरी नहीं हो पाई, जिसका एक गीत " बाजे बाजे बाजे रे कहीं बांसुरिया " का थोड़ा अंश सुनने को मिल सका. बहुत ही मधुर गीत है. क्या यह गीत और इस फिल्म के अन्य गीत जो रिकार्ड किये गये थे, किसी महानुभाव के पास उपलब्ध होंगे? इसके अतिरिक्त " कहां से चले थे, कहां को है जाना, मुसाफिर न जाने कहां है ठिकाना ". यह गीत उन्नीस सौ छियासी से पहले का रिकार्ड है जिसे किसी महिला गायक ने आवाज दी है. श्रीमान भूपिन्दर सिंह की आवाज में तो यह गीत मिल गया जिसके लिये अमित और प्रकाश गोविन्द जी को धन्यवाद, किन्तु यदि महिला गायक की आवाज वाला गीत मिल जाये तो और भी अच्छा हो.

वारेन एंडरसन को कैसे नहीं छोड़ा जाता-अर्जुन सिंह के ट्रस्ट को भी भवन निर्माण के लिये यूनियन कार्बाइड ने डेढ़ लाख दिये.

वारेन एंडरसन को पकड़ा गया, फिर डी०एम०-एस०पी० के पास मुख्य सचिव का निर्देश आता है कि उसे छोड़ दिया जाये. जो पुलिस किसी आम आदमी को शनिवार को गिरफ्तार करती है और थाने से जमानत होने लायक जुर्म में भी जमानत नहीं देती जिससे कि वह आदमी दो दिन हवालात में बिता सके, वही प्रशासन और पुलिस वारेन एंडरसन के लिये जमानती तैयार करते हैं और ठाठ से सरकारी हवाईजहाज में दिल्ली रवाना कर दिया जाता है. ३०४(२) की जगह ३०४(ए) कराने के लिये मामले को चुनौती दी जाती है, और तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश इसे स्वीकार कर ३०४(ए) में मामला चलाने की स्वीकृति दे देते हैं. अभी अभी पता चला है कि अर्जुन सिंह के चुरहट ट्रस्ट को भवन निर्माण हेतु यूनियन कार्बाइड ने डेढ़ लाख रुपया चन्दा दिया था जो निश्चित रूप से चौरासी से पहले दिया होगा और उस समय यह रकम आज के कई करोड़ रुपये के बराबर होगी. वारेन एंडरसन की शाही रवानगी से आश्चर्य नहीं होना चाहिये. सब के सब दोषी हैं. सरकारें (जिसमें पुलिस और प्रशासनिक अफसर तथा प्रासीक्यूशन करने वाले लोग शामिल हैं), राजनीतिबाज और धीमी न्यायिक प्रक्रिया. अफसर इसलिये कि एक छोटा अफसर सही काम करता है, उसे ऊपर वाला...

जम्मू-कश्मीर में हिन्दुओं के तीर्थ स्थलों की यात्रा मंहगी हुई...

यह खबर  नवभारत टाइम्स   पर मौजूद है. वैष्णोदेवी और अमरनाथ के दर्शन अगले महीने से उन लोगों की जेब पर कुछ भारी होने जा रहे हैं, जो अपनी प्राइवेट गाड़ियों से इस सफर पर निकलते हैं। जम्मू-कश्मीर सरकार ने गुरुवार को कहा कि जो लोग माता वैष्णो देवी या अमरनाथ यात्रा पर अपनी गाड़ियों से जाते हैं उनसे एंट्री फीस के तौर 2000 रुपये वसूले जाने चाहिए। इस बारे में राज्य सरकार ने जम्मू-कश्मीर मोटर वीकल टैक्सेशन एक्ट 1957 के तहत नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है। इसमें कहा गया है कि तीन दिन के लिए वैष्णोदेवी की यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं से 2000 रुपये एंट्री पॉइंट पर ले लिए जाएं। अगर वे तीन दिन से ज्यादा रुकते हैं तो प्रतिदिन के हिसाब से 2000 रुपये लिए जाएं। इसी तरह अमरनाथ यात्रा के लिए जाने वालों के लिए कम से कम 7 दिन तय किये गए हैं यानी अगर श्रद्धालु अपनी गाड़ियों से सिर्फ 7 दिन या इससे कम के लिए जाते हैं तो उनसे एंट्री पॉइंट पर 2000 रुपये लिए जाएं और 7 दिन के बाद भी वहां रुकते हैं तो प्रतिदिन के हिसाब से 2000 रुपये वसूले जाएं। इस साल अमरनाथ यात्रा 1 जुलाई से शुरू हो रही है। ...

महाराष्ट्र के सांगली जिले के मिरज में हुये दंगों के पीछे राष्ट्रवादी कांग्रेस के मेयर मैनुद्दीन का हाथ-बकौल कृष्णप्रकाश.

"सांगली जिले के मिरज शहर में बीते साल हुए दंगे राजनीतिक साजिश का नतीजा थे। ये दावा है सांगली जिले के पूर्व पुलिस अधीक्षक कृष्ण प्रकाश का। कृष्ण प्रकाश का आरोप है कि इन दंगों के पीछे राष्ट्रवादी कांग्रेस के तत्कालीन मेयर मैनुद्दीन बागवान का हाथ था। बागवान तो फिलहाल फरार हैं लेकिन माना जा रहा है कि कृष्ण प्रकाश को बागवान के खिलाफ केस दर्ज करने की वजह से हटाया गया। बीते साल महाराष्ट्र के सांगली जिले का मिरज शहर दंगों के चलते सुलग उठा था। ऐन गणपति विसर्जन के दिन शहर में कर्फ्यू लग गया। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले दस दिन तक मिरज शहर को कर्फ्यू झेलना पड़ा। इस कर्फ्यू का असर सांगली से लेकर कोल्हापुर जिले तक देखा गया। तब कहा गया था कि दंगे के पीछे शिवसेना नेता विकास सूर्यवंशी का हाथ है लेकिन अब आईपीएस अफसर कृष्ण प्रकाश ने खुलासा किया है कि इसके पीछे एनसीपी के तत्कालीन मेयर मैनुद्दीन बागवान का हाथ था। कृष्ण प्रकाश तब सांगली के एसपी थे और उन्होंने फरार मैनुद्दीन की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी भी की। इसी बीच उनका तबादला अहमद नगर के लिए हो गया. कृष्ण प्रकाश ने बताया कि जब पुलिस ने दो मुस्लिम भा...

गर्व से कहिये "दिल्ली पुलिस जिन्दाबाद"

" दिल्ली पुलिस का काला चेहरा एक बार फिर सामने आया है। आरोप है कि एक बेहद गरीब परिवार के दो बच्चों को दिल्ली के राजौरी गार्डन इलाके की पुलिस चोरी के इल्जाम में उठा ले गई। जब बच्चों को छोड़ने की गुहार लगाने उनकी मां पुलिस के पास गई तो 12 साल के बच्चे को अपनी ही मां के साथ शारीरिक संबंध बनाने के लिए मजबूर किय़ा गया। इस खबर के सामने आने के बाद पुलिस के एक आला अधिकारी को जांच के आदेश दे दिए गए हैं। दरअसल 22 मई को दिल्ली के राजौरी गार्डन पुलिस चौकी में मौजूद पुलिस को एक घिनौना चेहरा सामने आया है। पीड़ित ममता का आरोप है कि पुलिस वालों ने उसके बेटे को ही उसका बलात्कार करने का हुक्म दिया। ममता का आरोप है कि पुलिसवालों ने अपने बेटे के सामने ही उसे कपड़े उतारने का हुक्म भी दिया। ममता और उसके परिवार को राजौरी गार्डन के पुलिसवाले किसी चोरी के सिलसिले में पूछताछ के लिए लाए। दो दिनों तक बच्चों की पिटाई और घर की तलाशी के बाद भी पुलिस को कुछ नहीं मिला।  इसके बाद 22 मई को दिल्ली पुलिस ने रात में फिर इस परिवार को चौकी पर बुलाया। ममता का आरोप है कि पति-पत्नी और बच्चों से पूछताछ के बाद उसे और उसके 12 स...

हरियाणा में दलितों की शामत

हरियाणा में दलितों की तो शामत आ गई लगती है. मिर्चपुर की घटना को हुये अभी लगभग एक महीना ही गुजर पाया था कि पलवल जिले के भिटुकी गांव में एक बार फिर दबंगों ने दलितों को पीटा और उनके घरों में आगजनी की. गांव में प्रधानी का चुनाव था और दलित पहले ही दबंगों को लेकर आतंकित थे जिसके लिये उन्होंने शासन-प्रशासन से गुहार भी की. लेकिन हमेशा की तरह हरियाणा की पुलिस-प्रशासन ने चुप्पी साध ली और फिर दबंगों ने जमकर दलितों को पीटा और उनके घरों में आग लगा दी.  आजादी के बासठ साल बाद भी दलितों का यह हाल. कांग्रेस दलितों के हित का ढो़ल पीटती रहती है और कांग्रेस शासित प्रदेश में ही दलितों को जीने तक नहीं दिया जा रहा. मत देने का अधिकार संविधान ने दिया है न कि किसी पार्टी ने या किसी जाति विशेष ने और मतदान करना हर एक व्यक्ति का विशेषाधिकार है. हमें कोई ताकत नहीं रोक सकती अपनी मन-मर्जी मुताबिक मतदान करने से. आज के जमाने में भी दबंगों द्वारा ऐसे जुल्म! यह भी बिल्कुल सही है कि दलितों को हर एक पार्टी ने सिर्फ और सिर्फ वोट बैंक माना है और अपने स्वार्थों की पूर्ति के लिये उनका प्रयोग किया है. कब बन्द होगी जाति के न...

मेरे शहर के आटो

कभी बैठकर देखिये मेरे शहर के आटो पर. क्या खूब हैं, बढ़िया हरा रंग, जिस पर काले रंग से सुशोभित होता है "CLEAN CITY GREEN CITY".  और इस हरे रंग तथा इन शब्दों के सहारे शहर ग्रीन भी हो रहा है और क्लीन भी. दरअसल पेड़-पौधों के कटने से पर्यावरण में हरियाली में जो कमी आयी है, उस कमी की पूर्ति आटो और बसों को हरा रंग कर पूरी की जा सकती है. जिधर भी देखिये हर तरफ क्लीन और ग्रीन ये दो शब्द ही दिखाई देते हैं और इस तरह पर्यावरण भी दूषित होने से बच जाता है तथा प्रदूषण नियन्त्रण वालों का भी काम आसान हो जाता है. आटो के नीचे से धुंआ भले ही काले रंग का निकलता हो लेकिन आटो का रंग हरा होने से पर्यावरण दूषित नहीं होता है, इसी सिद्धान्त के चलते प्रदूषण नियन्त्रण बोर्ड के लोग अन्य कार्यों पर अपना ध्यान बखूबी केन्द्रित कर पाते हैं. इस के साथ ही इनके इंजनों से जो आवाज निकलती है वह किसी शास्त्रीय संगीत से कम नहीं होती, पता नहीं लोग क्यों शोर की शिकायत करते हैं जबकि सुन्दरता देखने वाले की आंखों में होती है, के अनुरूप ही संगीत सुनने वाले के कानों में होता है, एक निश्चित सिद्धान्त है. आटो के इंजन से निकलती ह...

न केवल जातिगत बल्कि धर्मगत तथा आर्थिक गणना भी होना चाहिये

लोग बड़े खफा हैं. जातिगत आंकड़े होना चाहिये या नहीं. ब्लागर भी कहां पीछे हटने वाले. सो नहीं हटे. जितने मुंह उससे कहीं अधिक बातें. खैर मेरी सीधी सी एक बात है. जातिगत गणना भी होना चाहिये, धार्मिक भी और आर्थिक भी. लोगों को जानना चाहिये कि इस देश में किस जाति और किस धर्म के कितने लोग रहते हैं, उनकी आर्थिक हालत क्या है. कितनों को आरक्षण से क्या लाभ पहुंचा और कितना. किस जाति को पहुंचा किसे नहीं पहुंचा. किसने पूरा लाभ उठाया और कई पीढ़ियों ने उठाया, किस की कई पीढ़ियों में किसी को भी नहीं मिला. कौन वास्तव में आरक्षण का हकदार बनता है और कौन नहीं. नेता भी अपने जातिगत-धर्मगत समीकरण और सहूलियत से मिला सकेंगे. चूंकि इस देश और देश में रहने वाले मानव रूपी जन्तुओं का भाग्य बन चुका है बंटवारा, इसलिये इस जनगणना के आधार पर तीन प्रशासनिक हिस्से किये जा सकते हैं. एक धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिये, एक आरक्षितों के लिये और एक अनारक्षितों के लिये. 

एक बहुत ही मकबूल गीत सुनिये, देखिए और अपनी प्रतिक्रिया दीजिये...

एक बहुत ही मधुर गीत है  जिसके बोल हैं " ना ना करते प्यार तुम्हीं से कर बैठे" . एक बड़ी दुर्लभ फुटेज  यूट्यूब पर है. यहां यह गीत कोकिलाकंठी सुमन कल्यानपुर गा रही हैं.सुनिये, आनन्द लीजिये और  प्रतिक्रिया दीजिये. यह गाना मोहम्मद रफी साहब और सुमन जी ने गाया था. चित्रपट / Film: Jab Jab Phool Khile संगीतकार / Music Director:  कल्याणजी - आनंदजी-(Kalyanji-Anandji)  गीतकार / Lyricist:  आनंद बक्षी-(Anand Bakshi)  गायक / Singer(s):  Rafi  ,   Suman Kalyanpur  न न करते प्यार तुम्हीं से कर बैठे करना था इंकार, मगर इक़रार तुम्हीं से कर बैठे न न करते प्यार तुम्हीं से कर बैठे ... छोड़ो रहने भी दो ये झूठे अफ़साने ऐसा क्या है तुम में - जा झूठी ऐसा क्या है तुम में कि हम हो दीवाने फिर भी तुमने ख़्वाबों में आना नहीं छोड़ा तीर नज़रों से चलाना नहीं छोड़ा ये शिक़वा सरकार, हज़ारों बार तुम्हीं से कर बैठे न न करते ... हम को था पता जो तुम्हारी दास्ताँ थी होंठों पे तो न थी - अच्छा? होंठों पे तो न थी मगर दिल में हाँ थी कोई दिल न देगा अनाड़...

मुस्लिम युवती को मां-बाप ने तेजाब से नहलाया-कुसूर कि वह एक हिन्दू से प्रेम करती थी.

न जाने कहां चले गये हैं झूठी धर्मनिरपेक्षता के पैरोकार और मानवीय अधिकारों के संरक्षक... कथित धर्मनिरपेक्ष पार्टियों के प्रवक्ता... इस घटना से तुम्हारी आंखों में क्यों आंसू नहीं आते... किस कोने में जा कर छुप गयी हैं रुदालियां... एक मुस्लिम लड़की को उसके घरवाले इसलिये जिन्दा जला देते हैं कि वह एक हिन्दू लड़के से शादी करना चाहती है... खबर पढ़िये .. हर छोटी सी घटना को पहाड़ बना देने वाले मीडिया के पहलवान इस घटना पर आंखे मूंदे बैठे हैं.... देखिये किस कदर वीभत्स है यह मानसिकता... इस्लाम के नाम पर इस तरह की घटना को अंजाम देना कहां तक जायज है... यही है वह कट्टर तालिबानी मानसिकता जिसका पुरजोर विरोध जरूरी है..     "दीगर समुदाय के युवक से प्रेम इस कदर नागवार गुजरा कि भाई और बाप ने ही गुलिस्तां को तेजाब से नहला दिया। फिर उसे शत-प्रतिशत जली हालत में नहर में फेंक दिया। नहर में बहते-बहते वह कुछ दूर जा निकाली। बमुश्किल किनारे निकली तो कराह सुनकर गांव वालों ने गुलिस्तां को जिला अस्पताल पहुंचाया। घटना उत्तर प्रदेश के जिला बुलंदशहर की है। गांव चरौरा मुस्तफाबाद में रवींद्र नामक युवक मेडिकल स्टोर चलात...