हमारे सांसद
जरा एक नजर नीचे भी डाल लीजिये, हम जो सांसद चुनकर भेजते हैं, उन्हें क्या क्या सुविधाएँ मिलती हैं। किस तरह से ये किसी राजा महाराजा से कम हैं। इनके लिए न्यूनतम योग्यता कुछ भी नहीं, चपरासी के लिए भी कम से कम आठवाँ पास होना चाहिए। इनके विरुद्ध चाहे हत्या जैसे संगीन अपराध में मुकदमे दर्ज हों, थोडी बहुत सजा भी हो गई हो तब भी सांसद चुने जा सकते हैं, लेकिन अगर कोई लड़का मार-पीट में फँस गया हो तो उसे सरकारी नौकरी मिलना असंभव है। सरकारी नौकर अगर हड़ताल पर रहे तो कई दफा उसे तनख्वाह नहीं मिलती, ये सदन में सोते रहें, हंगामा करते रहें, न भी आयें तब भी सारी सुविधाओं के पात्र हैं। एक सरकारी कर्मचारी को यह कहकर चुनाव में हिस्सा लेने नहीं दिया जाता कि वह लाभ के पद पर है, लेकिन इनसे ज्यादा लाभ कौन पाता है, नीचे स्पष्ट हो जायेगा (ध्यान दें कि मैं निकम्मे सरकारी नौकरों के पक्ष में नहीं बोल रहा हूँ, मैं केवल एक तुलना कर रहा हूँ)। यह भी कहा जाता है कि सरकारी कर्मचारी व्यवस्था को प्रभावित कर सकते हैं, लेकिन जितनी पहुँच इन सांसदों की होती है, उतनी किसी भी सरकारी कर्मचारी की नहीं हो सकती। Have...