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Showing posts from September, 2011

मेरे सिस्टम में वायरस आ गया है.............

पिछले दिनों एक साइट नहीं खुल रही थी, उसे खोलने के लिये फायरबाल को डी-एक्टीवेट क्या किया, मानो आफत आ गयी. दोबारा वह फायरबाल एनेबल नहीं हुई. अन्दर सिस्टम में देखा तो हिडन फाइलें दिखना बन्द हो गयीं. फिर "हिडन फाइलें" दिखाने वाला आप्शन क्लिक किया तब वह फाइलें दिखाई दीं, लेकिन अगले क्षण फिर वही पुरानी स्थिति. इसमें होता यह है कि एक "autorun.inf" फाइल बनती है जो एक बार तो डिलीट हो जाती है, लेकिन दोबारा डिलीट नहीं होती. इसके अन्दर जो प्रोग्राम होता है वह एक रैन्डम फाइल बनाता है जिसका एक्स्टेंशन ".pif" या ".exe" होता है. मैं अपने सिस्टम  की C Drive को कई बार फार्मेट कर विन्डोज इन्स्टाल कर चुका हूं, लेकिन यह वायरस मंहगाई की भांति पीछा ही नहीं छोड़ रहा. अवीरा स्कैन करने पर कई ठीक ठाक फाइलों को वायरस युक्त बताकर तुरन्त उड़ा देता है. और अवास्त का भी यही हाल है. वह फाइलों को अपने वाल्ट में भेज देता है. मालवेयर बाइट्स वायरस को अन्य फाइलों तक पहुंचने से तो रोकता है लेकिन इस वायरस  को खत्म नहीं करता. पता नहीं यह मुआ कहां छुप जाता है तिलचट्टे की भांति. स्पाइबोट - स...

हमारे प्रधान जी एकदम ठीक कर रहे हैं.

एक बम क्या फट गया, मानों आफत आ गयी. जिसे देखो वही कट्टरपंथियों के हाथों खेलने लगा और अपनी भड़ास उतारने लगा. लेकिन मैं प्रधान जी के साथ हूं. वह हमारे देश के गौरवशाली अतीत और परम्पराओं का निर्वहन कर रहे हैं. विश्वास नहीं होता. अब देखिये, हमारे ही बड़े बूढ़े कह गये हैं कि गोली के घाव से भी अधिक तीखा होता है बोली का घाव. इसीलिये आतंक और आतंकवादियों तथा उनके मददगारों के विरुद्ध बोली का प्रयोग कर रहे हैं. बिल्कुल छलनी हो जायेंगे हमारे बयानों से. और हम आतंकवादियों को कोस भी तो रहे हैं. जब मरी खाल की श्वांस से लोहा भी भस्म हो जाता है तो हमारी आहों से ये आतंकवादी कैसे बच जायेंगे. रोज करें ऐसी कायराना हरकत. हम इन कायराना हरकतों से डरते नहीं हैं, देखा दिल्ली कहीं रुकी, मुम्बई कहीं रुकी. ये है हमारी जिन्दादिली.  बयान संप्रेक्षण चालू आहे.