मोदी सरकार ने यह क्या कर दिया!
बड़ी दिक्कत हो गई धर्म-निरपेक्षी राजनीतिकों, बुद्धिजीवियों और मीडिया वालों को कि आख़िर गुजरात पुलिस ने कैसे अहमदाबाद बम विस्फोट के मास्टर माइंड को गिरफ्तार कर लिया. एक चैनल ने तो इस पर शीर्षक लगा दिया कि क्या आतंकवाद से निपटने के लिए मोदी फार्मूला उपयुक्त है. बात बिल्कुल ठीक है जब बाकी सरकारें आज तक बम विस्फोटों के मास्टर माइंड व्यक्तियों को नहीं पकड़ पायीं तो कैसे हिम्मत हो गई मोदी सरकार और उनके पुलिस अफसरों की कि बम धमाकों के जिम्मेदार आतंकियों को इतनी जल्दी पकड़ लिया.. अरे कोई अमर हुआ है आज तक, मरना हर एक को है ही एक दिन, तो फिर क्या हो गया, अरे बीमारी से मरते तो घर वालों का पैसा ख़राब होता, एक्सीडेंट में मरते तब भी भरती कराना पड़ता. कितनी दिक्कत होती है घरवालों को जब उनके रिश्तेदार बीमार हो जाते हैं. उनकी तीमारदारी, इलाज का खर्च, दवाईओं का खर्च जो एक आम आदमी तो उठा ही नहीं सकता. कम से कम हजार रुपये रोज का खर्च आता है अस्पताल में. बेड चार्जेस, नर्सिंग चार्जेस, विसिट चार्जेस और न जाने क्या क्या. आदमी तो डॉक्टर का बिल देखकर वैसे ही मर जाता है. और लोग कहते भी हैं कि इससे बेहतर होता अगर मर जाते.विस्फोट में मरने पर लाखों में रुपये तो मिल जाते हैं. जिन लोगों ने जिंदगी में लाख रुपये सामने रखे हुए नहीं देखे होंगे, उन्हें कम से कम इसी बहाने रुपये देखने को तो मिल गए. फिर अगर बम बने हैं तो क्यों? आख़िर जो चीज बन रही है उसका उपयोग भी तो होना चाहिए, अगर चोरी न होगी तो पुलिस की क्या जरूरत है? इसलिए बमों का प्रयोग अगर हो गया तो इतना हो-हल्ला क्यों. रही बात खुफिया की तो खुफिया बेचारी क्या करे, उन्होंने तो आज तक नहीं कहा कि विदेशी हथियार कैसे देश में आ जाते हैं. जब खुफिया वाले किसी के ऊपर दोष नहीं लगाते तो उनके ऊपर दोषारोपण क्यों. वैसे भी धर्म के काम में रूकावट डालना सबसे बड़ा अपराध है. बेचारे आतंकवादी एक तो धर्म का काम कर रहे थे, साथ ही साथ समाज सेवा भी हो जा रही थी, एक तो काफिरों को मारना धर्म का काम, ऊपर से बढती जनसंख्या को कम करना समाज सेवा, आम के आम गुठलियों के दाम (बच्चों को मुहावरा भी समझाया जा सकता है)! लेकिन बुरा हो मोदी सरकार का, गरीब आतंकियों के पीछे इस कदर पड गयी कि यूपी तक पहुंच गयी. स्केच किसी और का दिखा दिया पकडना किसी और को था. न तो इस मोदी ने धर्म (आतंकियों का) का ही काम करने दिया और न ही समाज सेवा करने दी. अब कहां कहां तक बुराई करें इस मोदी और मोदी सरकार की. बाकी बुराई अगले अंक में
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