समस्या पूर्ति

समस्या पूर्ति हिन्दी साहित्य की पुरानी विधा है, इसका प्रयोग मैं इसलिए करना चाहता हूँ क्योंकि मैंने कई बार लोगों को यह कहते सुना है और कई बार ख़ुद भी कह देता हूँ कि-"क्यों खून पी रहे हो या लोग तो आजकल खून पीने लगे हैं", इस पर एक वाक्य मेरे दिमाग में आया ----" आदमी का खून देखो पी रहा है आदमी" , कुछ और लाइनें भी लिखीं, लेकिन मुझे संतुष्टि नहीं हुई। अत: यह लाइनें मैं समस्या पूर्ति के रूप में विज्ञ ब्लोगरों के सामने प्रस्तुत कर रहा हूँ। आशा करता हूँ कि आप लोग इस पंक्ति को अपनी सुंदर रचना में स्थान देंगे।

Comments

Popular posts from this blog

एक सलाह मजबूरी पर...

कुछ पुरानी यादें