अब की बार बम रखने के टाइम और स्थान के बारे में गृह मंत्री को जरूर बता देना. .
हाय रे आतंकवादियों , कितनी धृष्टता का काम किया तुमने, बम रख तो दिए लेकिन हमारे गृह मंत्री महोदय को यह नहीं बताया कि कब और कहाँ रखोगे, अगर सब के बारे में नहीं बताते तो एक-दो के ही बारे में बता देते, कम से कम बेचारों को इतना बेइज्जत तो न होना पड़ता, कुछ तो इज्जत बच जाती। मोदी ने वैसे भी कोई कसर नहीं छोड़ी भद पीटने में यह कहकर कि उन्होंने दिल्ली बम धमाकों के बारे में पहले ही आगाह कर दिया था। लालू भाई भी न जाने किस जनम की दुश्मनी निकाल रहे हैं यह कहकर कि यह एक इंटेलिजेंस failure है। जब इंटेलिजेंस वाले किसी को दोष नहीं देते कि फलाँ-फलाँ के होते हुए सीमा से ड्रग्स और हथियार आ रहे हैं, यह उनकी चूक है तो इंटेलिजेंस वालों पर ऊँगली क्यों उठाई जा रही है। हमारे गृह राज्य मंत्री कह ही चुके हैं कि ११० करोड़ लोगों में हर एक के पीछे तो पुलिस प्रोटेक्शन दिया नहीं जा सकता, जब बेचारे सब बड़े अफसरों और नेताओं को प्रोटेक्शन नहीं मिल पा रहा है तो जनता को कैसे दिया जा सकता है, डडवाल साहब भी कह चुके हैं कि पुलिस वाले आठ आठ दिन अपने घर नहीं जा पा रहे हैं तो फिर क्यों सब को दोष दिया जा रहा है। बम बने, बम रखे, बम फटे, जब बम फटेंगे तो उनमें से फूल तो बरसेंगे नहीं, गलती उन लोगों की है जो बम के पास गए, क्यों गए, घर में नहीं बैठ सकते थे, इंडिया को अमेरिका समझने की भूल करेंगे तो ऐसा ही होगा। अब यह कोई अमेरिका तो है नहीं कि एक बार दो-ढाई हजार मार दिए गए तो अफगानिस्तान तक आ गया, हम हिंसा में विश्वास नहीं रखते हैं, एक पर चांटा पड़ा तो दूसरा बढ़ा दो, एक मर जाए दूसरे को पेश करो। भाई-चारा ऐसे ही बढेगा, चारे की वैसे ही कमी हो गई है, रही बात भाइयों की तो अपना सहोदर ही दूसरे की जान ले लेता है, इसलिए अपने सहोदर को छोडो, दूसरे धर्म के लोगों को भाई बनाओ। मोदी ने कहा कि पहले ही बता दिया था, तो हमारे पाटिल साहब किसी से कम हैं क्या, उन्होंने ने भी पलट कर वार किया कि हमें भी यह पता था, बस टाइम और जगह नहीं पता थी अन्यथा बम विस्फोट होने ही नहीं देते। प्रेस वाले भी यूँ ही पीछे पड़ जाते हैं, उनके कपडों को लेकर हाथ धोकर पीछे पड़ गए, अरे पाटिल साहब कोई टट -पूंजिये तो हैं नहीं, उनके पास हैं तो उन्होंने बदले। अब जिनके पास दो घंटे में बदलने के लिए तीन सूट नहीं हैं, वह तो खाम-खा शोर मचाएंगे ही, किसी की मत सुनिए पाटिल साहब, अपना काम करते रहिये। वैसे भी सोनिया जी का पूरा आशीर्वाद आपको प्राप्त है ही। एक कहावत है कि कुत्ते भौंकते रहते हैं, हाथी चलता रहता है। भौंकने दीजिये सबको। हाँ, एक प्रार्थना है आतंकवादियों से कि इस बार कम से कम एक बम के बारे में गृह मंत्री जी को पहले से जरूर बता दीजियेगा।
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