इस देश से हिन्दुओं को मिटा दो
इस देश से हिन्दुओं को मिटा दो - मीडिया और धर्म-निरपेक्ष नेताओं का हाल कुछ ऐसा ही है. १९४७ में लाखों हिन्दुओं को काट दिया गया, कोई नामलेवा नहीं. १९८४ में सिखों का कत्ले-आम किसने कराया, सबको पता है, लेकिन कोई मीडिया व्यक्तित्व, कोई समाज सेवी, कोई नेता नहीं बोलता, कश्मीर से लाखों हिन्दू भगा दिए गए, उनकी महिलाओं से बलात्कार हुआ, उनके मन्दिर तोड़े गए, उनके घरों पर कब्जा कर लिया गया, किसने यह सब किया, वहां तो बजरंग दल के लोग नहीं थे, नागालैंड, असम में क्या हो रहा है, केरल में क्या हुआ, किसी को दिखाई नहीं देता, गोधरा में हिन्दू तीर्थ यात्रियों से भरे डिब्बे पेट्रोल छिड़क कर जला दिए गए, तो इन लोगों ने कहानी बनाई कि ख़ुद ही आग लगा ली, फिजी से भारतीय मूल के लोग भगा दिए गए, किसी की आँख से आंसू नहीं गिरा, मलेशिया में हिन्दुओं पर अत्याचार होते रहे तो मलेशिया का आतंरिक मामला बताया गया, पाकिस्तान में क्या हो रहा है, बांग्लादेश में हिन्दुओं के साथ क्या हुआ, हिन्दू कोई संस्था बनाता है तो उसमें सबको प्रवेश मिलता है, अल्पसंख्यक बनाता है तो सिर्फ़ उसी के लिए होती है. स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती जी की हत्या पर किसी के दिल में दर्द नहीं होता, लेकिन जब उड़ीसा के लोग इस का प्रतिकार करने के लिए खड़े हो जाते हैं तो पहाड़ टूट पड़ता है, जो संस्था हिन्दुओं के अधिकारों की रक्षा की बात करती है उसे प्रतिबंधित करने के लिए पूरी मीडिया और सभी धर्म-निरपेक्षी खड़े हो जाते हैं, मुझे इस बात पर बड़ा आश्चर्य होता है कि इन लोगों को भारत के इतिहास का क्या बिल्कुल ज्ञान है ही नहीं। अगर यह इस मुगालते में हैं कि हिन्दुओं का (इन लोगों की भाषा में विहिप और बजरंगदल तथा भाजपा एवं आर०एस०एस० टाइप ) पराभव होने के बाद ही भाई-चारा स्थापित हो सकेगा तो भूल जाएँ। गौरी , गजनवी, बाबर, चंगेज खां जैसे आक्रान्ताओं ने यहाँ क्या किया था, अगर यह लोग यह सब भूल चुके हैं तो इतिहास को दोबारा पढ़ें। अपनी ही जड़ों में मट्ठा देते रहेंगे तो जड़ें बचेंगी ही नहीं.
Comments
Post a Comment