देश के इस्लामीकरण में ज्यादा देर नहीं.
कल संसद में असम के कोकराझार के सांसद श्री ए० एस० बिसमुतियार ने असम में हिन्दुओं, बोडो तथा असमिया लोगों के ऊपर बंगलादेशी घुसपैठियों द्वारा आई एस आई की मदद से किए जा रहे अत्याचारों को उठाने की कोशिश की, उन्होंने बताना चाहा कि किस प्रकार कितने लोगों की हत्याएं की गई हैं तथा कितने लोगों को अपना घरबार छोड़ना पड़ा। लेकिन उनके इस प्रयास को श्री अकबर अहमद डम्पी, श्री इलियास आजमी जैसे लोगों ने विफल कर दिया। माकपा के मोहम्मद सलीम ने भी उनके कथन पर आपत्ति की। श्री डम्पी व आजमी बाठला हॉउस मुठभेड़ की न्यायिक जांच को लेकर तथा मुसलमानों के प्रति हो रहे तथाकथित अन्याय को लेकर शोर-शराबा करते रहे। दो आतंकवादियों के मारे जाने को लेकर इतना हो हल्ला, लेकिन असम में सैकडों लोगों के मारे जाने को लेकर कोई प्रतिक्रिया नहीं, क्योंकि वे मुसलमान नहीं हैं। धर्म-निरपेक्षता की दुहाई देने वाले लोगों को यह क्यों नहीं दिखाई देता कि बाठला हाउस मुठभेड़ को लेकर सिर्फ़ इसलिए हो-हल्ला मचाया जा रहा है कि मरने वाले मुसलमान थे। यदि यही हाल रहा और यहाँ की आम जनता नहीं चेती तो थोड़े दिनों बाद यहाँ भी तालिबानी राज दिखाई देगा और उस दिन पुरानी गलतियों को याद कर रोने के अलावा कुछ नहीं बचेगा।
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