आबादी के अनुपात में टिकटों का दिया जाना

बहन जी ने कहा है कि मुस्लिमों को टिकट उनकी आबादी के अनुपात में दिए जायेंगे, अच्छी बात है, लेकिन बाकियों को (जैसे सिखों, ईसाईयों, बौद्धों ) भी आबादी के अनुपात में दिए जायेंगे या नहीं, यह भी बताया जाना चाहिए। दूसरा यह कि इसके बाद जातियों के, फिर उपजातियों के नेता मांग करेंगे कि उन्हें भी आबादी के हिसाब से टिकट मिलना चाहिए, इस पर भी बात होना चाहिए। इसके बाद यदि फिर आबादी बढ़ाने की होड़ लग गई तो ११० करोड़ लोगों के देश का क्या होगा, जहाँ पहले से ही इतनी दिक्कतें पेश आ रही हों। इस सबके बाद भी नेता कहते हैं कि समाज में समरसता का वातावरण बनाया जायेगा , मुझे आश्चर्य होता है।

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