कुछ खबरें मेरी नजर से

राहुल भैया ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया बहुत धीमी है, उन्हें भी इन्साफ पाने में कई वर्ष लग गए थे, अपने पिताजी और दादीजी के मामलों में। अफजल को फाँसी दिए जाने को लेकर यह उदगार व्यक्त किए गए। अच्छी बात है कि कम से कम भैया को यहाँ की धीमी कानूनी प्रक्रिया की जानकारी तो हुई तथा वह भी स्व-अनुभव से। दूसरा पहलू यह है कि अफजल का मामला अब अदालती प्रक्रिया के कारण नहीं फंसा हुआ है, मेरा यह कहना है कि यदि अफजल को फाँसी देना सरकार आवश्यक समझती है तो दे, नहीं समझती है तो वैसा करे, लेकिन एक दया की अपील को कितने लंबे समय तक लटकाया जा सकता है, इस पर क्यों विचार नहीं किया जाता। राजनीतिक गोटें बिछाने के लिए अब इंसान तो इंसान रहे, लग रहा है संस्थान भी ओछी राजनीति की बलि-वेदी पर चढ़ाये जाने की ओर अग्रसर किए जा रहे हैं। पता नहीं यह प्रक्रिया कहाँ जा कर रुकेगी और कौन कौन सी संस्था तथा संस्थान इस की बलि चढेंगे।

बिहार में राज ठाकरे की मनसे द्वारा मुंबई में किए गए उपद्रव की प्रतिक्रिया सामने रही है, लेकिन यह प्रतिक्रिया किसके विरुद्ध हो रही है और कौन इसे तूल दे रहा है, समझ में नहीं आता। बिहार में मनसे का कोई अस्तित्व नहीं है, हमले और आगजनी के शिकार हो रहे हैं निर्दोष रेलयात्री तथा सार्वजनिक संपत्तियां, जो या तो स्वयं बिहार और बिहार के लोगों की ही हैं या केन्द्र सरकार की, जिसमें उनका भी हिस्सा है।

एक बात और विशेष तौर पर लिखना चाहूँगा, वह यह कि चंद्रयान को लेकर मैंने स्वदेशी और विदेशी की बात की थी, इसको लिखने का मेरा उद्देश्य यह था कि हमारे देशवासियों को यह पता लगना चाहिए कि तकनीकी कौशल में हम लोग कहाँ तक पहुँच सके हैं भारत में स्वदेशी तकनीक से विकसित किए जा रहे कई रक्षा अनुसन्धान कार्यक्रम बंद किए जा चुके हैं, मुख्य युद्धक टैंक, स्वदेशी विमान के उदाहरण सामने ही हैं तकनीकी ज्ञान हमें किन शर्तों पर दिया जाता है, यह भी कोई बहुत गोपनीय तथ्य नहीं है हमारे यहाँ कितनी नई दवाइयाँ खोजी गयीं, यह भी सबको विदित है लिहाजा यह जानकर खुशी और अधिक हो जाती यदि यह घोषणा की गई होती कि इसमें प्रयुक्त अधिकतर तकनीक तथा कल-पुर्जे स्वदेशी हैं।

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