कुछ ख़ास खबरें

चंद्रयान-सफलतापूर्वक अन्तरिक्ष में सफलतापूर्वक छोड़ दिया गया, सभी देशवासियों को बधाई, आशा है कि निर्धारित समय पर चंद्रमा पर उतरेगा और जो लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं, उन्हें पूर्ण करेगा। लेकिन इसे देखकर दुःख हुआ कि किसी भी वैज्ञानिक ने राजभाषा हिन्दी में बोलना पसंद नहीं किया। एक बात यह भी लोगों को बताना चाहिए कि इस यान में कितने कल पुर्जे स्वदेशी हैं और कितने विदेशी।

नितीश कटारा हत्याकांड में अभियोजन के गवाह अजय कटारा पर एक और मुकदमा लूट का दर्ज कराया गया है। स्मरण हो कि अजय कटारा के ऊपर कुछ दिनों पूर्व ही अपहरण का एक मामला दर्ज हुआ था। मामले को दर्ज कराने वाली महिला डी पी यादव की रिश्तेदार बताई जाती है। अजय कटारा ने हले भी कहा था कि उसके लिए नितीश कटारा हत्याकांड में गवाही देने के कारण धमकाया जाता रहा है और उसके विरुद्ध अपहरण का आरोप बदला लेने की नीयत से लगाया जा रहा है। सरकार तथा न्याय-पालिका को इस तरफ़ अविलम्ब ध्यान देना चाहिए तथा इस की न्यायिक जांच कराई जानी चाहिए, यदि वास्तव में अजय कटारा के आरोप सही हैं तो भविष्य में कोई भी व्यक्ति अभियोजन के लिए गवाही नहीं देगा और तब यह पूरे लोकतंत्र के लिए खतरनाक साबित होगा।

गोधरा काण्ड के अभियुक्तों पर से पोटा हटाया जायेगा, उच्चतम न्यायालय ने अपने एक फैसले में कहा है कि रिव्यू कमेटी की सिफारिशें बाध्यकारी हैं, अत: राज्य सरकार को उसका पालन करना होगा। माननीय न्यायालय का निर्णय पूर्णतया उचित है, किंतु रिव्यू कमेटी ने दो बोगियों में बैठे निर्दोष लोगों को जला कर मारने वाले लोगों को सामान्य अपराधियों की श्रेणी में रखा, हैरत की बात है।

अबू सलेम पर से महाराष्ट्र संगठित अपराध अधिनियम की धाराएँ हटाई जायेंगी, ऐसा फैसला किया गया है। हो सकता है कि आने वाले समय में अबू सलेम विधान सभा या लोक सभा में बैठा हुआ नजर आए। कल को यह भी हो सकता है कि दाऊद इब्राहीम को भी पकड़ कर भारत ले आया जाए और फिर तमाम मुक़दमे वापस ले लिए जाएँ। आश्चर्य इस बात का भी है कि मोनिका बेदी को ग़लत पासपोर्ट रखने के जुर्म में प्रत्यर्पित कर भारत लाया गया और उस पर यहाँ का अभियोजन दोष सिद्ध नहीं कर पाया। तो इससे क्या यह सिद्ध नहीं होता है कि मोनिका का प्रत्यर्पण ही ग़लत था।

इम्फाल में हुए बम-विस्फोट में पन्द्रह लोग मारे गए, मीडिया ने छोटा सा कैप्शन दिखा कर औपचारिकता निभा ली, फिर एक कटु प्रश्न सामने रखता हूँ, कि यदि कहीं यह दुर्घटना तथाकथित अल्पसंख्यकों के इलाके हो गई होती तो मीडिया से लेकर संसद तक कहर बरपा होता।

वढेरा जी राष्ट्रीय दामाद हो गए हैं, अब उनकी किसी भी हवाई अड्डे पर तलाशी नहीं होगी।

Comments

Popular posts from this blog

एक सलाह मजबूरी पर...

कुछ पुरानी यादें