मुस्लिमों से कुछ प्रश्न
अधिकतर दंगों की शुरुआत मुस्लिम बस्तिओं से ही क्यों होती है. जहाँ मुस्लिमों की संख्या बढ़ने लगती है, वहां से हिन्दू क्यों अपना घर औने-पौने दामों में बेच कर चले आते हैं. पाँच हजार की हिन्दू आबादी में पचास मुस्लिम अपने आप को असुरक्षित महसूस नहीं करते, लेकिन पाँच सौ की मुस्लिम आबादी में पाँच सौ हिन्दू क्यों असुरक्षित हो जाते हैं. जरा - जरा सी बात पर जो मुस्लिम धर्म-गुरु फतवा जारी कर देते हैं वे आतंकवाद, आतंकवादियों और उनके पैरोकारों के खिलाफ फतवा जारी क्यों नहीं करते. हिन्दू देवी-देवताओं के अश्लील चित्रण के खिलाफ आजतक क्यों कोई फतवा जारी नहीं किया गया. छोटी छोटी बातों पर होने वाले झगडों में मुस्लिम आबादी इकट्ठी होकर क्यों दवाब बनाने पर उतारू हो जाती है. लडाई- झगडों में क्यों क़ानून या पुलिस का सहारा न लेकर अधिकांश मामलों में अपने हाथ में क़ानून ले लिया जाता है. क्यों हिन्दुओं के धार्मिक जुलूसों या अन्य समारोहों पर जानबूझकर आपत्ति उठाई जाने लगी है. क्यों यह बेसुरा राग अलापा जाता है कि मुस्लिमों के साथ भेदभाव किया जाता है, अगर यह सच होता तो क्या मुस्लिमों को इतनी छूट मिली होती। ख़ुद आत्मचिंतन करें और उत्तर खोजें, प्रश्न अभी और भी बाकी हैं।
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