सरकार,मीडिया और राजनेताओं से कुछ प्रश्न

१- अपह्रत जापानी जहाज के भारतीय मूल के कर्मचारियों को लेकर अभी तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की गई है ?
२- फ्रांस में पगड़ी के मुद्दे तथा बुरखे के मुद्दे को लेकर भारतीय प्रतिनिधिओं ने फ्रांसीसी सरकार से बात की थी, लेकिन मलेशिया में हिन्दुओं के साथ लगातार हो रहे दुर्व्यवहार को लेकर सरकार, मीडिया और राजनेता सभी उदासीन हैं, क्यों?
३- अधिकतर दरोगा अपनी बुलेट मोटर साईकिल रखते हैं, जिसकी कीमत लगभग पचहत्तर - अस्सी हजार होती है तथा जिसका माइलेज २५-३० किमी का होता है और जिसके लिए सरकार पेट्रोल नहीं देती। वे कैसे इस गाड़ी का रख-रखाव कर पाते हैं, जबकि उनकी तनख्वाह अठारह-बीस हजार से अधिक नहीं होती। ये केवल एक छोटा सा नमूना भर है।
४- रेलवे पार्किंग में चौबीस घंटे के लिए दरें निर्धारित होती हैं, लेकिन ठेकेदार (जो अधिकतर दबंग व बाहुबली होते हैं), कैलेंडर दिवस के अनुसार रुपये लेते हैं तथा निर्धारित दरों से अधिक लेते हैं, इन पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं होती?
५- यही हाल नगर निगम की पर्किंगों का है, इसके अतिरिक्त कुछ स्थानों पर नगर निगम की जमीन पर अस्पतालों, सिनेमाघरों तथा अन्य संस्थानों के मालिक अपनी पार्किंग बनाकर अंधाधुंध वसूली करते हैं, इस पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं होती?
६- बड़े शहरों में अधिकतर भवनों का नक्शा तब पास होता है जब उनमें पार्किंग की जगह हो, जोकि बेसमेंट में दिखाई जाती है, लेकिन कुछ दिनों बाद इसी बेसमेंट को अन्य कार्यों में प्रयोग किया जाता है, इस पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं होती?
७- बड़े शहरों में चुपके से भू-उपयोग बदल दिया जाता है, पार्कों की जमीन बेच दी जाती है, इस पर भी सब आँखें मूंदे रहते हैं, ऐसा क्यों?
८-कच्चे तेल का भाव पैंसठ डालर प्रति बैरल पहुँच गया है लेकिन भारत में तेल के दामों में कमी क्यों नहीं की गई?
९-निजी डाक्टरों की फीस का निर्धारण मनमाना क्यों है? हमारे यहाँ २०० रुपये से लेकर १००० रुपये तक फीस है, जिसकी कोई रसीद भी नहीं दी जाती, क्यों?
१०-अपने ही नर्सिंग होम में कमरे के १००० रुपये, विसिट के २०० रुपये, नर्सिंग चार्जेस अलग, मरीज क्या हनीमून मनाने आता है नर्सिंग होम में?
११-चिकित्सकों द्वारा विभिन्न शुल्कों का निर्धारण मनमाने ढंग से क्यों?
12- यही प्रश्न वकीलों और अध्यापकों तथा कोचिंग सेंटरों के संचालकों से भी है.
13- यही प्रश्न उपभोक्ता वस्तुओं के उत्पादकों से भी है, कैसे उनके दाम स्वत: ही निर्धारित कर लिए जाते हैं, लेकिन विडंबना देखिये किसान के कुछ उत्पादों का दाम सरकार तय करती है. आख़िर क्यों?
१४- प्राइवेट शिक्षण संस्थानों (मेडिकल, इंजीनियरिंग तथा मैनेजमेंट) में प्रतिवर्ष व्यय लगभग तीन लाख से पाँच लाख तक आता है, मेडिकल में पन्द्रह से बीस लाख तक, इंजीनियरिंग में तीन लाख से आठ लाख तक डोनेशन है, इस पर रोक क्यों नहीं है और जो लोग इनमें अपने बच्चों को पढ़ा रहे हैं, उनके आर्थिक साधनों की जांच क्यों नहीं होती?

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