"आई० बी० के अफसरान ने दी हिन्दू दहशतगर्दो को ट्रेनिंग" तथा स्टार प्लस पर आज एक ख़बर "

"आई० बी० के अफसरान ने दी हिन्दू दहशतगर्दो को ट्रेनिंग मिलट्री के गिरफ़्तार कैप्टन का सनसनीखेज़ इंकशाफ़, पूरा मुल्क सकते में...एटीएस का दावा और...साबिक़ फ़ौजी अफ़सरान और हिन्दू दहशतगर्दों का ख़तरनाक गठजोड़" उक्त पंक्तियाँ सुश्री फिरदौस खान के ब्लॉग "मेरी डायरी " की पोस्ट में प्रकाशित हैं। हालाँकि मैं किसी और विषय पर लिखना चाहता था लेकिन विगत कुछ दिनों से हिन्दुओं पर हमले कुछ ज्यादा ही तेज हो गए हैं, इसलिये मैं मजबूर हो गया, इस पर लिखने के लिए

पहली चीज जो मैं लिखना चाहूँगा वह यह है कि मैंने अपने पिछले कई लेखों में यह लिखा था कि भेदभाव परक सरकारी नीतियों के चलते कहीं ऐसा हो जाए कि आगे चलकर लोगों को यह लगने लगे कि आतंकवादी बनने में अधिक लाभ है और देश के लिए शीश कटाना घाटे का सौदा। एक अन्य लेख में मैंने यह लिखा था कि अगर आतंकवादियों के साथ नरमी बरती जाती है और उनके लिए सरकारी नौकरी का बंदोबस्त किया जाता है तो फिर ऐसा न होने लगे कि कहीं यह यहाँ के युवाओं में सरकारी नौकरी पाने का आसान तरीका बन जाए। खेद की बात यह है कि हाल की घटनाओं से, जिनमें एक-दो आतंकवादी घटनाओं में कुछ हिन्दुओं के भी शामिल होना जाहिर हुआ है, यह पता चलता है कि संभवत: लोगों का विश्वास अब शासन से उठता चला जा रहा है। कई जगह यह भी देखा गया कि पकड़े गए चोर - उचक्कों को भीड़ ने ही पीट-पीट कर मार डाला। बिल्कुल स्पष्ट दिखाई देने लगा है कि यदि प्रशासन अपना कार्य ईमानदारी से नहीं करेगा और राजनीतिक आकाओं के इशारे पर करेगा तो बहुत जल्दी ही पूरे देश में अराजकता का साम्राज्य स्थापित हो जायेगा।

दूसरी बात चल रही थी फिरदौस जी की, यह मोहतरमा समाज को आइना दिखाने का काम करने का दावा करती हैं, लेकिन यदि इनके सारे लेख पढ़े जाएँ तो यह लगता है कि इनका समाज सिर्फ़ कट्टर इस्लामी कबीले जैसा है। इन्हें उससे आगे कुछ दिखाई ही नहीं देता। नोट करें कि मैं मालेगाँव और मोडासा में हुई घटना का समर्थन नहीं कर रहा लेकिन मैं इन मोहतरमा से पूछना चाहूँगा कि अभी तक इससे पूर्व हुई घटनाओं में अधिकतर में इस्लाम को अपना मजहब बताने वाले लोग जब गिरफ्तार किए गए तो यह तो अवश्य कहा गया कि क्यों इस मजहब से अपना सम्बन्ध रखने वाले लोग आतंकवादी घटनाओं में लिप्त हो रहे हैं, लेकिन किसी ने यह नहीं कहा कि हर एक मुसलमान आतंकवादी है, किसी ने यह नहीं कहा कि इस्लामी आतंकवाद या हरा आतंकवाद, जबकि इंडियन मुजाहिदीन द्वारा भेजे गए मेल में कुरान शरीफ पर -के-४७ राखी दिखाई गई थी। फिर जो लोग इससे पहले के बम धमाकों में मारे गए या कश्मीर में जैसे अत्याचार हुए, उन लोगों के प्रति आपके दिल में दर्द क्यों नहीं होता, क्या सिर्फ़ इसलिए कि उनमें से अधिकतर मुसलमान नहीं थे। आज भी हिन्दू समाज के कितने लोग इन आतंकवादिओं के साथ हैं (जोकि अपने लिए हिन्दू बताते हैं), मेरा यह मानना है कि आतंकवादिओं का कोई धर्म नहीं होता। और यही मानना अधिकतर नेताओं और बुद्धिजीविओं का भी है, तो फिर अब आतंकवाद भी क्या हिन्दू और मुस्लिम आतंकवाद के नजरिये से देखना प्रारम्भ किया जायेगा। वैसे अगर फिरदौस जी के बाकी आलेख के शीर्षकों के पढ़ने से ही यह लगने लगेगा कि आप किसी जेहादी मानसिकता वाले व्यक्ति के लेखों को पढ़ रहे हैं।

मैं फिरदौस जी से पूछना चाहूँगा कि चलिए भारत में तो हिन्दुओं के कारण आतंकवाद फैला है, लेकिन पाकिस्तान, अफगानिस्तान, इराक, बांग्लादेश इत्यादि में आतंकवाद क्यों सर उठा रहा है। चलिए यहाँ यह भी मान लिया जाए कि फिरदौस जी पूरी तरह से धर्म-निरपेक्ष हैं, तो क्या क्या फिरदौस जी अन्य तमाम देशों में जहाँ ईसाई या इस्लाम राज धर्म के रूप में प्रतिस्थापित है, उन देशों में जाकर अन्य धर्मों के मानने वालों के हक़ में उन देशों को धर्म-निरपेक्षता के सिद्धांत समझाना चाहेंगी या यह थेओरी मात्र भारत के लिए ही लागू करेंगी।

आज स्टार प्लस पर एक ख़बर का शीर्षक था -"भाजपा मुश्किल में", ख़बर सम्बंधित थी प्रज्ञा सिंह और भाजपा के रिश्तों को लेकर। जो भी स्टार वाले दिखा सकते थे, कह सकते थे, कह रहे थे। कमो-बेश बाकी चैनलों का भी यही आलम था। मुझे यह दिक्कत नहीं है कि 'भाजपा मुश्किल में' से मुझे कुछ परेशानी है, ठीक है जिसने जो किया उसके प्रति वैसी ही कार्रवाई होना चाहिए। लेकिन इस तरह के शीर्षकों से अन्य पार्टियों को क्यों बचाया जाता है। मैं बात कर रहा हूँ मोहम्मद सुरती के मामले की, जो कि कांग्रेस का मंत्री रह चुका है और जिसे बम-विस्फोट के आरोप में कारावास हुआ है। इतना समय उस ख़बर को क्यों नहीं दिया गया, क्या यह कोई कम महत्वपूर्ण ख़बर थी? इस तरह की हेड- लाइन कांग्रेस के साथ प्रयोग क्यों नहीं की , कहीं ऐसा तो नहीं है कि हिन्दुओं को दूसरे दर्जे का नागरिक बनाने का षडयंत्र रचा जा रहा है।या फिर हिन्दुओं के विरुद्ध जहर उगल कर ही लोकप्रियता हासिल की जा सकती है।

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