जिसे सम्मान देना चाहिए, उसका मखौल उडाया जा रहा है
ज़माने का रिवाज बड़ा ही उल्टा है, बल्कि इसे यूँ कहा जाए कि हम भारतीयों का व्यवहार बड़ा ही विचित्र है तो कहना ग़लत न होगा। जिन का हमें सम्मान करना चाहिए, उनका हम मजाक उड़ा रहे हैं, पूरा मीडिया, कुछ निकम्मे ब्लॉगर जिनके हम प्लास्टिक पीटर भी कहते हैं (क्योंकि वे कीबोर्ड खटखटाते रहते हैं) ऐसे व्यक्ति के पीछे हाथ धोकर पड़ गए हैं जिसने हजारों लोगों की जान बचाई लेकिन उसे सम्मानित करना तो दूर ऊपर से उसकी मजाक बना रहे हैं, भिगो भिगो कर मार रहे हैं। आपको विश्वास नहीं होता , आइये हम आपको पूरा किस्सा बताते हैं। सबसे पहले तो इनका नाम जान लीजिये- ये हैं पाटिल साहब। नहीं, नहीं, वे पाटिल साहब नहीं, जो एक घंटे में तीन जोड़ी कपड़े बदलते थे। ये हैं दूसरे पाटिल साहब महाराष्ट्र वाले अर्थात आर०आर० पाटिल ।
भई क्या खूब ज़माना आ गया है, लोग कितने अहसान-फरामोश हो गए हैं। पाटिल साहब ने पूरी 4817 जानें बचा लीं, आतंकवादियों का इरादा था पूरे पाँच हजार लोगों की जान लेने का। लेकिन मात्र 183 जानें ही ले पाये कमबख्त। वो तो हमारे पाटिल साहब इतने कुशल निकले कि सिर्फ़ तीन घंटों के अन्दर पता चल गया कि आतंकवादी मुंबई में घुस आए हैं और फिर तुंरत ही उन्होंने अपनी पुलिस रवाना कर दी। अब आप ही बताएं कि बिना हथियारों के, बिना सुरक्षा उपकरणों के साथ कौन सी फौज है जो आतंकवादियों का मुकाबला कर सकती हैं। लेकिन वाह रे पाटिल साहब, आख़िर आपने 4817 जानें तो बचा ही लीं। और फिर इन सब छोटी - छोटी घटनाओं को मीडिया ने कितना बढ़ा-चढ़ाकर कर दिखा दिया। 183 लोगों का मरना भी कोई घटना है, रोज हजारों लोग सड़क दुर्घटनाओं में मारे जाते हैं, लाखों लोग बुढ़ापे और बीमारियों से मरते हैं, उनके लिए कौन सा चैनल चिल्लाता हैं। जिनकी लिखी हुई थी वही तो आतंकवादियों के सामने आए, जिनकी मौत नहीं लिखी थी वह गोली खाकर भी बच गए। ऊपर से जब खुफिया ने बता भी दिया था कि हमला हो सकता है तो क्या जरूरत थी ऐसी जगह जाने की। लेना एक न देना दो, बस पड़ गए पीछे। हर एक की सुरक्षा का क्या ठेका ले रखा है सरकार ने, एक सौ बीस करोड़ की आबादी में किसे - किसे सुरक्षा उपलब्ध करायी जा सकती है। हर कोई अपने लिए बढेरा साहब की तरह मनवाना चाहता है। हर कोई राष्ट्रीय दामाद बनना चाहता है।पहले अपनी सुरक्षा, अपने भाई-बहनों-भतीजो-बेटों-बेटिओं-दामादों की सुरक्षा की जायेगी या एक सौ बीस करोड़ लोगों की।
इस देश के लोगों की आदत ही पड़ चुकी है निगेटिव थिंकिंग की, हर चीज के दो पहलू होते हैं, एक अच्छा और एक बुरा। अच्छा पहलू किसी ने नहीं देखा , पुराने लोग वैसे ही कह गए हैं क्या कि ऊपर wala जो कुछ भी करता है अच्छा ही करता है, इसलिए इन लोगों के मरने के पीछे की अच्छाई कोई नहीं देखना चाहता। चूँकि पाटिल साहब उप हैं लिहाजा मिल गया मीडिया को मसाला उनकी इमेज ख़राब करने का। झकाझक सफेद कुरते पर कालिख पोतने का कोई मौका छोड़ना नहीं चाहते ये कमबख्त प्लास्टिक पीटर। इसे कोई हाई-लाइट नहीं कर रहा कि 4817 तो बच ही गए पाटिल साहब की कड़ी मेहनत और होशियारी से। वो तो आपसे थोड़ी सी गलती हो गई पाटिल साहब कि मीडिया को मैनेज नहीं कर पाये अन्यथा पता भी नहीं चलता इस छोटी सी घटना का। रेल-दुर्घटनाओं में मारे जाते हैं हजारों की संख्या में लेकिन सरकारी आंकडों में सैकडों तक ही सिमट जाते हैं। भूख से हजारों लोग मरते हैं, लेकिन किसी अखबार, किसी चैनेल में जिक्र होता है उनका। नहीं न। मुझे तो तरस आता है ऐसे लोगों के ऊपर, इतने महान व्यक्ति के लिए ऐसा लिख-बोल रहे हैं। जिसे परमवीर चक्र देना चाहिए उसपर व्यंग्य कर रहे हैं। लेकिन कोई बात नहीं, इन कमबख्तों से क्या डरना। आप लगे रहिये, किसी न किसी दिन तो आपको सम्मान का हकदार समझा ही जायेगा और अगर न समझा जाए तो इस बार आप बिल्कुल मत बचाना 4817 लोगों की जान। क्योंकि सूचना तो पहले मिल ही जाती है खुफिया से कि आतंकवादी आने वाले हैं इस रास्ते से उस रास्ते से, यहाँ वहाँ, कहीं न कहीं तो हमला करेंगे ही। लिहाजा अगर आपको सम्मानित न किया जाए तो कोई जरूरत नहीं है आपको 4817 लोगों की जान बचाने की, तब याद आएगी आपकी। पूरे देश की तरफ से आपको नमन।
सही कहा जी आपने हम माफ़ी मांगते है
ReplyDeleteहमारी और से पाटिल साहब को उनकी सरकार को उनकी पार्टी को उनकी पार्टी की केंद्र सरकार और उसके सभी अधिकारियो को 4817 जान बचाने के लिये श्रद्धांजली . फ़ूलऔर लकडी उधार रहे जिस दिन ये लेटेगे तुरंत भिजवा देगे
इनको मरणोपरांत परम वीर चक्र दे देंगे. अब ठीक है?
ReplyDeleteyahi to baat hai bandhu. hamara common man confused hei, gussa hai , dukhi hai aur hataash hai.
ReplyDeleteaur jin par jimmedari sonpi gai hai vo nakaare hein..
atyant dukhad hai ye sab...
देश आज के हालात मे दो पाटिल से परेशान हैं या बोले तो त्रस्त हैं। आज सुबह एक महाशय तो गये। अब देखना हैं कि ये जनाब कब जनता पर अहसान करते हैं। या फिर इनहे जनता की लात खाने का इन्तज़ार हो।
ReplyDeleteजय हिन्द!!!
वन्दे मातरम!!!!
सही कहा जी आपने हम माफ़ी मांगते है
ReplyDeleteइन्हे तो इसके लिए सम्मानित करना चाहिए मै तो कहूँगा कि जीते जी ही परमवीर चक्र से भी कोई बड़ा चक्र तो वो भी दे देना चाहिए और इनको बदनाम करने वाले मीडिया को जेल में डाल देना चाहिए |
और इनकी बहादुर पुलिस का तो कहना ही क्या,जो पुलिस देश के बेरोजगार युवाओं को पीटने से नही बचा सकती वो आतंकवादियों से क्या खाक बचायेगी |
इनको मरणोपरांत परम वीर चक्र दे देंगे. अब ठीक है? par yae phir bhi zinda rahegae aur inkae karmo ka phal ham sab aur aagey aaney wali peedhi dohayegee
ReplyDeleteअजी परमवीर क्या इन्हें तो सुदर्शन चक्र प्रदान करना चाहिए. कभी विनीत चौहान की पंक्तियाँ सुनी थीं.
ReplyDeleteसियासत का नशा सिम्तों का जादू तोड़ देती है,
हवा उड़ते हुए पंछी का बाजू तोड़ देती है,
सियासी भेड़ियों थोडी बहुत गैरत जरूरी है,
तवायफ भी किसी मौके पे घुँघरू तोड़ देती है.
sahi hai ,ye neta apni mahanta khud bayaan karte hain.
ReplyDelete-jaya
करनाल की संस्था हिफा के निदेशक पीयूष जी का एसएमएस पढ़ें
ReplyDeleteयह मेरे मोबाइल पर आया
आप सभी में बांट रहा हूं किः-
where is Raaj Thakre ?
Tell him that 200 nsg commondos from delhi (all north indians) being sent 2 fight the terrorists. So that he and his "Marathi Manus" can sleep peacefully.. Now tell him to ask them to leave Mumbai ! Please send this msg to all indians. So atleast Mr. Raj will get this message somehow.
very well said!
ReplyDeleteBravo! An uncommon satire from a common man!
ReplyDeleteदेर कर दी ना. ज़ालिमो ने आखिर इस्तीफा ले ही लिया.
ReplyDeleteजो बोट से आए वो तो एन एस जी के कमांडो ने मार दिए, जो वोट से आते हैं, उनको तो हमें संभालना पड़ेगा न!
http://shabdaarth.blogspot.com/2008/12/blog-post.html
इस आन्दोलन मे साथ दीजिये!
लिहाजा अगर आपको सम्मानित न किया जाए तो कोई जरूरत नहीं है आपको 4817 लोगों की जान बचाने की, तब याद आएगी आपकी। पूरे देश की तरफ से आपको नमन।
ReplyDelete" very painful and sad.."
Regards
ulti baat acchhi lagi...magar jinko chubhni chahiye ....unki khaal to gande kee hai....
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