कोई मुझे धर्म-निरपेक्षता के बारे में बतायेगा क्या

मैं धर्म-निरपेक्षता की अवधारणा के बारे में जानना चाहता हूँ। इसके बारे में अधिकाधिक तथ्य बताने की कृपा करें। यह अवधारणा कहाँ से उत्पन्न हुई, किसने इसे लागू किया, क्यों लागू किया, इसमें क्या अच्छाइयाँ हैं, क्या इसके दोष हैं, यह शब्द कहाँ से लिया गया, इसका शाब्दिक अर्थ क्या है, इत्यादि। हमारे देश में यह कहाँ से आई, किस राजनेता ने इसे लागू किया, और कितने देश हैं जहाँ धर्म-निरपेक्षता के सिद्धांत का पालन किया जा रहा है, उस देश में अन्य धर्मों के मानने वालों के साथ किस तरह का व्यवहार किया जाता है। इसके अतिरिक्त इस अवधारणा से सम्बंधित अन्य जानकारी भी उपलब्ध कराने की कृपा करें, जो मैं ऊपर लिखने में छोड़ गया हो सकता हूँ।
आशा है कि आप लोग धर्म-निरपेक्षता के बारे में मेरा ज्ञानवर्धन करने की कृपा करेंगे।

Comments

  1. आशा है कि आप लोग धर्म-निरपेक्षता के बारे में मेरा ज्ञानवर्धन करने की कृपा करेंगे।
    "" मै भी जानने की इच्छा रखती हूँ ..."

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  2. कई लोग ऐसा कर सकते हैं परन्तु आमतौर पर इस विषय पर बोलने पर अभद्र भाषा का शिकार हो जाते हैं । वैसे ज्ञान वर्धन की इच्छुक मैं भी हूँ । गूगल में नहीं ढूँढा क्या ?
    घुघूती बासूती

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  3. धर्मनिरपेक्ष या इसके व्युत्पन्न संभवतः अंग्रेजी के Secular के अनुवाद में प्रयोग किये जाते रहे हैं। यह कहना मुश्किल है यह शब्द ईजाद किसने किया? वैसे Secular का सही अर्थ पंथनिरपेक्ष है। फिलहाल यह शब्द अतिचार का शिकार है। इसके जवाब में जो शब्द गढ़ा गया है वह "छद्मधर्मनिरपेक्ष (Pseudosecular)" है।

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  4. व्यक्ति या देश को पंथ निरपेक्ष होना ही चाहिए . लेकिन धर्म निरपेक्ष नहीं क्योकि धर्म का अर्थ है जो धारण करने योग्य है वह धर्म है . धर्म के १० लक्ष्ण है और जो धर्म नहीं मानता वह अधर्मी है .और अधर्मी बुरे से बुरा तक कर सकता है . जिस प्रकार आँखों का धर्म है देखना ,और आंख धर्म निरपेक्ष हो गई तो क्या होगा .जो धर्म निरपेक्ष है वह अधर्मी है . और एक बात हिन्दू धर्म नहीं है हिन्दू राष्ट्रीयता है . रामायण या उससे पहले चारो वेदों मे हिन्दू का कोई जिक्र नहीं है

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  5. ये महान काम हम करते है वत्सआप धर्म निरपेक्षता निंम्न प्रकार से समझ सकते है
    धर्म निरपेक्ष का मतलब होता है . सभी धर्मो के साथ निरपेक्षता का व्यवहार.ये शब्द हमारे आजादी के समय ही प्रचलन मे आया. कि सरकार को पंथ निरपेक्ष या धर्म निरपेक्ष या सेकुलर होना चाहिये
    यानी सरकार को आपके मेरे साथ आपके व्यक्तित्व के साथ मतलब रखना चाहिये आप किस धर्म किस पंथ किस जाति किस संप्रदाय के मानने वाले है इस से कोई फ़रक नही पडना चाहिये
    जिसका मतलब गांधी जी नेहरू जी ने तुरंत लगा लिया कि मुस्लिम को हज जाने के लिये मंदिरो की झोली से पैसा मिलना चाहिये.
    जिसके लिये कश्मीर मे उन्होने अपने भाई को चीफ़ मिनिस्टर बनाने के लिये धारा ३७० का प्राविधान भी किया
    और अब यही शैली आगे चलते चलते धर्म निरपेक्ष ताकतो का मतलब हर मामले मे हिन्दु ओ को गाली देने वाली बन गई.
    आज धर्म निर्पेक्षता का मतलब सिर्फ़ यही है कि आप अगर हिंदुओ को गालिया देते है उनके देवी देवताओ की निंदा करते है उनके बारे मे अपश्ब्द कहते है कोई अश्लील तसवीर बनाकर हिंदू देवी देवताओ का नाम लिख देते है. राम सीता आपस मे भाई बहन थे लक्ष्मण सीता पर गंदी निगाह रखता था सीता रावण को भगा ले गई. राम कभी थे ही नही , दुनिया मे आतंकवाद बाबरी मस्जिद के बाद आया कहते है तो आप धर्म निरपेक्ष है, ख्याल रहे आपको धर्म निरपेक्ष तभी माना जायेगा जब आप इसाई या मुस्लिम धर्म की हर अच्छी बुरी बात के साथ खडे होगे और उन्हे अपशब्द या फ़िर उनकी मजाक उडाने वालो का गला काटने वालो का साथ देगे

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