मुंबई में आतंकी हमलों से राज ठाकरे का सम्बन्ध
आपको शीर्षक अजीब लग सकता है कि मुंबई हमलों से राज ठाकरे का क्या सम्बन्ध है लेकिन आगे चलकर आपको इनमें छुपा हुआ सम्बन्ध स्पष्ट हो जायेगा. आतंकी हमलों के बाद राज ठाकरे के सम्बन्ध में ढेरों संदेश मेरे मोबाइल में आये, जिनमें यह विनती भी थी कि इसे आगे भेज दिया जाये जिससे कि कहीं न कहीं से तो यह संदेश राज ठाकरे तक पहुंच जाये। इसमें यह भी था कि मुम्बई को बचाने राज क्यों नहीं आये और जो कमांडो मुम्बई गये वे उत्तर भारत से गये थे और उत्तर भारतीय थे जिन्होंने मुम्बई-वासियों को बचाया. मैंने एक भी संदेश आगे नहीं भेजा. पता नहीं संदेश भेजने वाले क्या सोचकर संदेश भेज रहे हैं और इससे उन्हें क्या लाभ मिल रहा है. क्या राज ठाकरे इतना मतिमंद है जिसे अपने बयानों का अर्थ नहीं पता है या फिर इन संदेशों में जो भी लिखा गया है, उन बातों से राज ठाकरे अन्जान है? या फिर ऐसे सन्देशों के मिलने के बाद राज ठाकरे को सद्-बुद्धि आ जायेगी. कई करोड रुपये लोगों ने इन संदेशों को एक-दूसरे को भेजने में नष्ट कर दिये, लाभ किसे मिला, या तो मोबाइल कम्पनियों को राजस्व के रूप में, या फिर स्वयं राज ठाकरे को प्रसिद्धि (कु) के ही रूप में. क्या ऐसा नहीं लगता कि जाने-अनजाने में एक तो अपना ही पैसा खराब किया क्योंकि जिस व्यक्ति के बयानों को सबसे कम महत्व मिलना चाहिये, उसे भरपूर प्रसिद्धि मिल रही है. कुछ लोगों ने चर्चा के दौरान यह सवाल भी सामने रखा, मैंने उनसे यह पूछा कि क्या मुम्बई पर हमले के बाद जो कमांडो आये, वे सिर्फ मुम्बई-वासियों को ही बचाने आये थे, बाकी भारतीयों को नहीं. फिर जो भी सैनिक, मारकोस तथा एन०एस०जी कमांडो आये थे, क्या उनमें एक भी मराठी नहीं था. मैं राज ठाकरे की हिमायत नहीं कर रहा हूं, मैं सिर्फ यह बताने की कोशिश कर रहा हूं कि जो कार्य राज ठाकरे ने किया है, लगभग कुछ उसी तरह का कार्य हम लोग कर रहे हैं.
मेरा भी यही मानना है. नेगेटिव पब्लिसिटी भी कभी-कभी फायदेमंद हो जाती है. चाहे वह अंडरवर्ल्ड से ताल्लुकात की वजह से सुपरहिट रही सलमान खान की "चोरी चोरी चुपके चुपके" रही हो या मुस्लिमों के दुश्मन के रूप में प्रचारित भाजपा के पक्ष में उठी राम लहर हो.
ReplyDeleteयही तो ? इसी प्रकार के महिमामंडन से यह माफ़िया चलाने वाले नेता फ़िर मंत्री बन बैठते हैं !
ReplyDeleteआपने सही फरमाया। वास्तव में हम भी इस रूप में क्षेत्रवाद को दूसरे छोर पर खड़े होकर बढ़ावा देने का ही तो काम करते हैं।
ReplyDeleteसही कहा !
ReplyDeleteआप का कमेन्ट मिला ...वो तो अपनी जगह सही है अनु, पर यदि सभी लोग इसी बात का इंतज़ार करने लगें की 'पहले आप - पहले आप' तो फ़िर शायद प्यार की शुरुवात ही नही हो पाएगी. इसलिए किसी न किसी को पहले हाथ बढ़ाना ही पड़ता है.
ReplyDeleteji han aapki baat bilkul sahi haiaisa sirf raaj k mamle hi nahi any jagah hi kiya ja raha. apradh or apradhio ka mahimamandan karne ki hame jaise aadat ho chali hai.
ReplyDeletet ee blog kahe likhe??
ReplyDeleteusme bijli jahi jala ka??
we all love 2 hate someone
bihari hava ka/?
आप तो ये बताओ आपको राज ने कितने पैसे दिये है?
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