और गोलमा देवी मंत्री बन गयीं.

गोलमा देवी मंत्री बन गयीं जिन्हें पढ़ना तक नहीं आता। जाहिर है कि उनकी जगह काम निपटायेंगे उनके पति। यह बात ठीक है कि यदि वह नहीं पढ़ पायीं तो इसके पीछे कई आर्थिक, सामजिक कारण हो सकते हैं, यह भी ठीक है कि जरूरी नहीं कि स्कूली शिक्षा न पाया व्यक्ति समझदार न हो, जैसे कि राजस्थान के मुख्यमंत्री महोदय ने कहा है। लेकिन यहाँ क्या गोलमा देवी की योग्यता ने उन्हें मंत्री बनवाया है, बिल्कुल नहीं, उनके मंत्री बनाये जाने का एकमात्र कारण है कि गोलमा देवी निर्दलीय विधायक हैं और कांग्रेस को समर्थन दे रहीं हैं। बल्कि यह कहना अधिक ठीक होगा कि समर्थन देने के कारण उन्हें मंत्री-पद से नवाजा गया है। जो व्यक्ति ख़ुद पढ़ नहीं सकता उसके हाथ से न जाने कितने पढ़े-लिखों का और पढ़े-लिखों से सम्बंधित कार्यों का भाग्य निर्धारित होगा। हाय रे भारतीय टाईप के लोकतंत्र, तेरी बलिहारी।

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