नेताजी की निगाह में घोटाला

नेताजी से एक पत्रकार ने सवाल कर डाला
आपने भी तो किया था एक घोटाला
नेताजी ने उपेक्षापूर्ण निगाह पत्रकार पर दौड़ायी
फिर उनकी जुबान धड़धड़ायी
माई डियर हनी
इट इज जस्ट अ सर्कुलेशन आफ मनी
जिस खरदिमाग को अर्थशास्त्र का यह सिद्धान्त समझ में नहीं आता है
वही घोटाला-घोटाला चिल्लाता है
पहले सिद्धान्त पर कायम रहते हुये हमने मनी को दौड़ा दिया है
उसे भारत से स्विटजरलैंड तक पहुंचा दिया है
दूसरा सिद्धान्त यह कहता है कि नयी मुद्रा बक्सों में बन्द होकर रहती है
इस पर भी हम खरे उतरे हैं
विश्वास न हो तो चल कर देख लो
नयी मुद्रा से हमारे घर के सभी बक्से भरे हैं
सिद्धान्तों पर अमल करने को तुम लोग कहते हो घोटाला
ऐसा कहकर तुमने तो जनता जनार्दन का ही अपमान कर डाला
अरे खर-दिमागों अगर हमने किया होता कोई गड़बड़-झाला
तो क्या जनता हमें चुनती
देश को स्वर्ग बनाने के सपने बुनती
और तो और हमारी पिछली तीन पीढियां क्या ऐसे ही चुनी जा रही हैं
जनता को हमारी नीतियां पसन्द आ रही हैं
इसलिये ज्यादा भाव मत खाओ
जनता के फैसले पर उंगली मत उठाओ

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