एक हारे हुए खानदानी नेता की फरियाद

फकीर जान के मुझको न तुम भगा देना
तुम्हीं ने मुझको हराया तुम्हीं जिता देना

तुम्हीं ने डैड जिताये, जिताया अम्मा को
और तो और जिताया हमारे मम्मा को
भूल जो हमसे हुई उसको तुम भुला देना

लगी है चोट कलेजे पे उम्र भर के लिये
तड़प रहे हैं फकत एक मिम्बरी के लिये
अरमान मिम्बरी के हमारे न तुम मिटा देना

जहां में और हमारा कहां ठिकाना है
मिलेंगे वोट जहां हमको वहीं जाना है
जो हो सके तो मुकद्दर मेरा जगा देना

रखी है दारू मंगा के रखा है मुर्गा भी
हाथ में लठ्ठ लिये इक खड़ा है गुर्गा भी
जो वोट मुझको न दिये तो सर तुड़ा लेना

मूल रचयिता से क्षमा याचना के साथ

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