चाय की केतली और बचपन

कितनी मासूमियत है इस बचपन में, जो किसी कार्यालय में चाय पहुँचने का काम करता है। इसकी मुस्कराहट देखिये, कहीं कोई चिंता नहीं, कहीं कोई परेशानी नहीं। काश इसका भी कोई भविष्य अपने पिता की चाय की दुकान से हटकर होता। इस उम्र के बच्चों की जो हसरतें होती हैं वह कहीं चाय की केतली में घुलकर ख़त्म हो गयीं हैं।
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