बजट, यूनिक आई डी कार्ड, स्वात घाटी में शरिया क़ानून

बजट (लेखानुदान/अन्तरिम बजट) आ गया, हमेशा की तरह पक्ष-विपक्ष ने औपचारिकता निभा दी. पक्ष के लोगों ने अच्छा बताया तो विपक्ष ने आलोचना की. कई योजनाओं में धनराशि का आबंटन बढ़ा दिया गया है. सबसे बड़ी कठिनाई है भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचार के मूल में भी भाई-भतीजावाद और राजनीति शामिल है. जमीनी स्तर की जितनी भी योजनायें हैं उनमें भ्रष्टाचार लगातार बढ़ता जा रहा है. विकेन्द्रीकरण और पंचायतीराज व्यवस्था इसलिये लागू की गयी थी कि योजनाओं का इम्प्लीमेंटेशन जल्दी हो और पात्र व्यक्ति को लाभ पहुंचे लेकिन हुआ इसका उल्टा. विकेन्द्रीकरण के फलस्वरूप कमीशनखोरी और हिस्सेदारी बढ़ती गयी लिहाजा आम आदमी वहीं का वहीं रह गया जहां वह साठ साल पहले खड़ा था. किसी भी योजना का लाभ वास्तविक हकदार को तभी और सम्पूर्ण रूप में पहुंच पायेगा जब भ्रष्टाचार को समूल नष्ट कर दिया जाये और यह तभी सम्भव होगा जब सत्ता-शीर्ष पर बैठे लोग स्वयं अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत करें, जिसकी सम्भावना अभी भी कम ही लगती है. राजनीतिक दलों की नीयत इससे ही स्पष्ट हो जाती है कि मन्त्री और उनके रिश्तेदारों की सम्पत्ति को सूचना कानून के दायरे से बाहर कर दिया गया है.

पाकिस्तान की स्वात घाटी में शरिया कानून लागू कर दिये गये हैं जिस पर अमेरिका ने भी नाराजगी प्रकट की है. भारत के लिये यह खतरे की घन्टी है. स्वात घाटी में पहले पुलिस वालों की हत्या की गयी, फिर लड़कियों के स्कूल जाने पर पाबंदी लगाई गयी और फिर लड़कों के स्कूल बमों से उड़ा दिये गये. भारत में भी मुसलमानों के अन्दर तेजी से कट्टरता फैल रही है या कहें कि फैलाई जा रही है, जिसके लिये राजनीतिक दल जिम्मेदार हैं. ये राजनीतिक दल उस सत्य को देखना ही नहीं चाहते जो अप्रिय है या फिर यह कहा जा सकता है कि वोट बटोरने की खातिर सत्य की तरफ से नजरें मोड़ लेते हैं. अब यह कोई छुपा एजेंडा है अथवा नहीं, लेकिन इतना तय है कि अगर धर्म के नाम पर मुस्लिमों को विशेष दर्जा दिया जाता रहा तो वह दिन दूर नहीं कि अपने वोटों की शक्ति के बल पर किसी दिन यहां भी शरिया कानून लागू करने की मांग संसद में प्रस्तुत कर दी जाये, क्योंकि कई बार उत्तरी भारत में इस तरह की मांग छोटे-छोटे कस्बों में मौलवियों द्वारा की जाती रही है. मुसलमानों के अधिकतर स्थानीय नेताओं के सुर सुने तो स्पष्ट हो जायेगा कि यह भागीदारी करने के स्थान पर हिस्सा मांगते हैं. यह स्थिति बहुत खतरनाक है जिसपर यदि अभी ध्यान नहीं दिया गया तो आगे चलकर स्थिति नियंत्रण से बाहर हो जायेगी और इसका सबसे ज्यादा खामियाजा मुस्लिम समाज को विशेष तौर पर मुस्लिम महिलाओं को भुगतना पड़ेगा. अधिकतर इस्लामी मुल्कों में महिलाओं की स्थिति क्या है किसी से छुपी नहीं है. सऊदी अरब (यदि मैं गलत नहीं हूं तो) में महिलायें कार तक ड्राइव नहीं कर सकती हैं.

भारत के नागरिकों के लिये पहचान पत्र जारी करने की बात की गयी है. मैंने अपने एक लेख में लिखा था कि हर भारतीय को एक बायो-मैट्रिक आई-कार्ड जारी करना चाहिये. इस कार्ड में एक चिप हो जो पिन तथा बायो-मैट्रिक पहचान डालने के बाद एक्टीवेट होगा. इस कार्ड में दी गयी यूनिक आई-डी नम्बर को विभिन्न विभागों से एक केन्द्रीय डाटा सर्वर के द्वारा जोड़ा जाना चाहिये. जैसे कि तहसील में व्यक्ति के परिवार की जानकारी, उसकी जाति-धर्म की जानकारी, मतदाता सूची की स्थिति, नगर निगम-पालिकाओं में जन्म-मृत्यु पंजीकरण, आर०टी०ओ० कार्यालय से ड्राइविंग लाइसेंस-वाहन का पंजीकरण, पासपोर्ट कार्यालय से पासपोर्ट, शिक्षा कार्यालयों से शैक्षणिक योग्यता की, थानों-न्यायालयों से अभियोगों-जुर्मानों की, लाइसेंस जारी करने वाले तमाम विभागों से लाइसेंस की तथा इसी प्रकार अन्य विभागों से सम्बन्धित जानकारी जोड़ी जा सकती है. इससे सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि जैसे ही किसी भी विभाग में व्यक्ति के स्टेटस में कोई परिवर्तन आयेगा, वह अपने आप अपडेट हो जायेगा. व्यक्ति को विभिन्न लाइसेंस-प्रमाणपत्र-कार्ड साथ लेकर घूमना नहीं पड़ेगा और एक ही कार्ड तमाम आवश्यकताओं की पूर्ति करेगा. अलग-अलग विभागों से किसी भी सूचना को प्राप्त करने के लिये अलग-अलग विभागों में लगने वाला समय घट जायेगा.

मेरा एक अन्य सुझाव यह है कि मतदान को अनिवार्य कर दिया जाये. मतदान हेतु आनलाइन व्यवस्था की जानी चाहिये, इस व्यवस्था में तीन-चार दिन तक मतदान अवधि रखी जा सकती है. मतदान के लिये इन्हीं आई-कार्ड का प्रयोग किया जाये. इसके लिये पोलिंग बूथ बनाने की जगह कियोस्क बनाये जा सकते हैं और शिक्षा मित्रों की तर्ज पर चुनाव मित्रों का प्रयोग किया जा सकता है. यह कियोस्क एक केन्द्रीय डाटा सर्वर से जुड़े रहेंगे, इन कियोस्कों को मतदान के लिये निर्धारित स्थानों के अतिरिक्त बस-स्टेशन, रेलवे-स्टेशन, हवाई अड्डों तथा अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर रखा जा सकता है जिससे यह लाभ होगा कि कोई भी व्यक्ति कहीं से भी अपने निर्वाचन क्षेत्र में अपने मनपसन्द उम्मीदवार को चुन सकता है. एक लाभ इसका यह भी होगा कि महत्वपूर्ण मुद्दों पर जनमत संग्रह भी कराया जा सकता है. यह वन-टाइम इन्वेस्टमेन्ट होगा जिससे आगे चलकर चुनावों में होने वाले व्यय में कमी आयेगी. जबरन तथा फर्जी मतदान एवम बूथ-कैप्चरिंग पर भी अंकुश लगेगा.

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