अंधविश्वासों को बढ़ावा दे रहे हैं चैनल

कल रात धोखे से एक खबरिया चैनल लग गया. चैनल पर एक सज्जन के बारे में बताया जा रहा था कि वे ट्रांसपोर्टर थे और उनके धंधे को बुरी नजर लग गयी. फिर एक लड़का आया जिसने यह बताया कि वह बहुत अच्छा विद्यार्थी था लेकिन उसके एक रिश्तेदार की बुरी नजर लग गयी. ऐसे ही दो-तीन लोग और दिखाई दिये जो अपने साथ हुई दुर्घटनाओं के बारे में बता रहे थे, इसके बाद फिर पीछे से इस का इलाज बताया गया कि एक यन्त्र खरीदो और बुरी नजर से बचो. बुरी नजर इस यन्त्र से टकरा कर लौट जाती है. मुझे बड़ा अजीब भी लगा और कुछ हद तक रोचक भी. फिर एक चैनल पर शिव भक्त दिखाई देता है जो यह कहता है कि उसे शिव का आशीर्वाद प्राप्त है और वह भगवान शिव के आशीर्वाद को एक कवच में पिरो चुका है जो भी उस कवच को धारण करेगा उसे व्यापार में, सामाजिक जीवन में लाभ की प्राप्ति होगी. इसी प्रकार हनुमान कवच, दुर्गा कवच और सांई कवच बेचे जा रहे हैं. यह खबरिया चैनल वैसे तो बड़े धर्मनिरपेक्ष और वैज्ञानिक दृष्टिकोण रखने का दावा करते हैं लेकिन मुनाफा कमाने के लिये कोई भी हथकंडा अपनाने से नहीं चूकते. पैसे कमाने की होड़ में यह भी नहीं देखते कि इन विज्ञापनों से उन्हें तो आय भले हो रही है लेकिन उनके इस कृत्य से समाज में अंधविश्वासों को बढ़ावा मिल रहा है. ऐसा कर न केवल वे अंधविश्वासों को बढ़ावा दे रहे हैं बल्कि हिन्दुओं की धार्मिक आस्थाओं पर भी कुठाराघात कर रहे हैं. इसके अतिरिक्त कई बाबाओं और गंडा-यन्त्र बेचने वाले संस्थानों के विज्ञापन तमाम पत्र-पत्रिकाओं में छापे जाते हैं. इन विज्ञापनों का दर्शकों-पाठकों पर क्या प्रभाव पड़ रहा है, इससे उन्हें कोई लेना-देना है ही नहीं. इन चैनलों और पत्र-पत्रिकाओं का एकमात्र उद्देश्य सिर्फ अधिक से अधिक लाभ कमाना भर रह गया है, इन्हें समाज से कोई सरोकार नहीं है.

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