क्वात्रोची, सी-बी-आई और कांग्रेस
कांग्रेस नीत यूपीए सरकार ने सत्ता में आते ही बोफोर्स घूस कांड के मुख्य आरोपी ओतावियो क्वात्रोची के फ्रीज किये हुये खातों को डी-फ्रीज कर दिया था जिससे कि क्वात्रोची ने अपना फंसा हुआ धन बड़ी आसानी से निकाल लिया. उसी कांग्रेस नीत यूपीए सरकार के दिशानिर्देशों पर चलते हुये कठपुतली एजेंसी सीबीआई ने ओतावियो क्वात्रोची के खिलाफ जारी रेड कार्नर नोटिस वापस ले लिया हालांकि यह कितना प्रभावी था यह भी दुनिया को पता है. इस नोटिस को वापस लेने से दुनिया को यह पता लग गया है कि क्वात्रोची अब बोफोर्स घूस कांड के अन्तर्गत अब वांछनीय नहीं रहा. यह कदम सीबीआई ने विधि मन्त्रालय के परामर्श से उठाया हुआ बताया है. स्विस बैंको में पड़े काले धन के मामले में कांग्रेस बिल्कुल चुप है, कांग्रेस ने अजहरुद्दीन जैसे व्यक्ति को जो मैच फिक्सिंग में संलिप्त था और जिसने देश के साथ धोखाधड़ी की, को टिकट दिया. सीबीआई ऐसा साबुन बन गयी है जिससे धुलकर काले दाग गायब हो जाते हैं और काला दामन फिर चकाचक साफ. सत्ता में रहो और जो चाहो सो करो. अगर सीबीआई का इस समय का कदम सही है तो फिर सीबीआई के वे अधिकारी गलत थे जिन्होंने क्वात्रोची के विरुद्ध कार्रवाई की. और अगर वे गलत थे तो उनके विरुद्ध कार्रवाई क्यों नहीं की गयी, आखिर किसी न किसी ने तो अपने पद का दुरुपयोग किया. और पद के दुरुपयोग के लिये हर विभाग में अनुशासनात्मक कार्रवाई के साथ अन्य विधिक प्रावधान भी हैं. एक बात तो तय है कि देश से भ्रष्टाचार मिटाया जाना तो बहुत दूर की बात है इसे कम भी नहीं किया जा सकता. यह ऐसी बीमारी है जो दिनों दिन और फैलेगी ही, और इस रोग को दूर करने के लिये कोई भी गंभीर नहीं है, न तो राजनीतिक दल और न ही अधिकारी.इससे तो बेहतर होगा कि रिश्वत को वैध घोषित कर दिया जाये.
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