सिख दंगों के दोषियों का बचाव भी राष्ट्रीय बेशर्मी है

प्रधानमंत्री महोदय कह रहे हैं कि लोग जबरदस्ती सिख दंगों का मुद्दा उछल रहे हैं, सिखों को उनकी जान-माल का हर्जाना दिया जा चुका है और दंगाइयों के विरुद्ध कार्रवाई की जा चुकी है। प्रधानमंत्री महोदय-आपका यह बयान भी राष्ट्रीय शर्म का विषय है, पूरी दुनिया जानती है कि कौन लोग थे जिन्होंने चौरासी में सिखों को जिन्दा जलवाया था, आज तक उन नराधमों के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं हो सकी, रही बात हर्जाने की तो आई-पी-सी में संशोधन करा दीजिये और जहाँ हत्या के लिए मृत्यु दंड का प्रावधान है, वहां सजा हटवाकर जुर्माने का प्रावधान करा दीजिये।

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