दक्षिण कोरिया में दो साल बंद रहा भारतीय कप्तान

कैप्टन चावला और उनके एक अन्य सहयोगी नवम्बर २००७ से दक्षिण कोरिया की जेल में बन्द थे. उनका अपराध था कि उनका जहाज कोरियाई कम्पनी के जहाज से टकरा गया. दिखावटी अदालती कार्रवाई चलती रही, उन्हें प्रताडित किया जाता रहा. भारत की नौकरशाही तो वैसे ही कुख्यात है. उनके परिजन बार-बार अधिकारियों से गुहार लगाते रहे, लेकिन नतीजा वही ढाक के तीन पात. आखिर तेरह जून दो हजार नौ को जाकर उन्हें दक्षिण कोरियाई जेल से आजादी मिल सकी. पता नहीं कैसे हमारे राजनयिक हैं कैसी हमारी विदेश नीति और कूटनीति है कि पिद्दी जैसे देश भी हमे आंख दिखाते रहते हैं और अपने नागरिकों का बुनियादी खयाल भी नहीं रख पाते. यह कम्पनी हमारे देश में अरबों रुपयों का कारोबार करती है, यदि उस पर दबाव बनाया जाता तो निश्चित ही इन लोगों की मुक्ति काफी समय पहले हो जाती. लेकिन चूंकि हमारे देश में जन इतने हो चुके हैं कि रोज हजारों भी मारे जायें तो फर्क नहीं पड़ता, अन्यथा कोई कारण नहीं था कि ये लोग इतना समय जेल में सड़ते रहते और यह कम्पनी इस देश से दौलत लूटकर अपने देश ले जाती रहती.

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