एक पुलिस वाला जो रोज चेकिंग करता था.
एक पुलिस वाले को मैं रोज देखता था, दो सितारा धारी दरोगा. बहुत मेहनती. सुबह आठ बजे से ही राष्ट्रीय राजमार्ग पर खड़ा नजर आता था. हाथ में चालान की किताब लिये हुये और बड़ी मेहनत से चेकिंग करता था. लगभग रोज ही पन्द्रह-बीस चालान तो करता ही होगा. मुझे यह देखकर बड़ा अच्छा लगता था कि कम से कम यह एक व्यक्ति तो इतनी शिद्दत के साथ अपनी ड्यूटी निभा रहा है. एकाग्र होकर अपने काम पर लगे रहना कोई कम बड़ी बात नहीं जब आज के युग में हर व्यक्ति कहीं न कहीं से चार पैसे उगाहने के चक्कर में लगा रहता है, ऐसे उदाहरण तो बिरले ही होंगे. मैंने सोचा कि चलो एक बार इससे मिलकर अपनी भावनाओं को प्रकट कर दूं. लेकिन मैं ऐसा कर नहीं पाया, जोकि अच्छा ही हुआ. कुछ दिनों बाद मेरी यह भ्रान्ति दूर हो गयी. अभी कुछ दिनों पहले उसी राजमार्ग पर रात में नौ बजे मैं उस जगह से गुजर रहा था. ट्रकों की लम्बी लाइन लगी हुई थी, उन दरोगा जी की मोटर-साइकिल किनारे खड़ी हुई थी और एक सिपाही जी डंडा खड़का रहे थे, दरोगा जी किनारे से खड़े होकर हाथ में कुछ पकड़ रहे थे और हाथ को सीधे जेब में ले जा रहे थे. मुझे बड़ी शान्ति महसूस हुई.
Comments
Post a Comment