रीता बहुगुणा, मायावती और राहुल गांधी

श्रीमती रीता बहुगुणा ने जो कुछ कहा उसके लिये उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की गयी, लेकिन उसके बाद जो कुछ भी उनके विरुद्ध किया गया, जिस प्रकार से उनके घर को आग लगाई गई, वह अत्यन्त ही निन्दनीय है। लेकिन पुलिस द्वारा उनके विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की गयी, जिन तत्वों द्वारा आग लगाई गयी. सुश्री मायावती ने आज अपने बयान में कहा है कि अगर उन्होंने अपने समर्थकों को न रोका होता तो पूरे देश में हंगामा मच गया होता और कांग्रेस कार्यकर्ता चूहे की तरह कोने में छुपे नजर आते. तकरीबन ऐसी ही आगजनी की घटना उनके साथ कुछ वर्ष पहले हुई थी जिसे गेस्टहाउस कांड का नाम दिया। लगभग इसी प्रकार का बयान कुछ वर्ष पूर्व मायावती जी भी दे चुकी हैं. अच्छा होता यदि रीता बहुगुणा जोशी के घर को आग के हवाले करने वाले उपद्रवियों के विरुद्ध भी उसी तेजी से उतनी ही कड़ी कार्रवाई की जाती जिस तेजी से रीता बहुगुणा के विरुद्ध की गयी. रही बात कांग्रेस तथा बसपा के बीच हो रही नूराकुश्ती की तो यह इससे स्पष्ट है कि न तो कांग्रेस ही उत्तर प्रदेश सरकार के विरुद्ध कुछ करने जा रही है और न ही बसपा कांग्रेस से समर्थन वापस ले रही है यद्यपि इससे केन्द्र सरकार की सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा. जब राहुल भइया यह जानते हैं कि उत्तर प्रदेश में धन मूर्तियों पर लुटाया जा रहा है तो राष्ट्रपति शासन का विकल्प भी तो केन्द्र पर है। राहुल जी कह रहे हैं कि पिछले पच्चीस वर्षों में नया बिजली उत्पादन केन्द्र नहीं बना, तो केन्द्र में यूपीऐ पिछले पाँच वर्षों से सत्ता में है कितने नए बिजली उत्पादन केन्द्र बनाये गए हैं, बताने की कृपा करेंक्या केन्द्र और क्या राज्य की सरकारें सभी सत्ता सुख उठा रही हैं, नूरा कुश्ती कर रही हैं, दलालों की मौज है। दाल थोड़े दिनों में सौ रुपये पर पहुँच जायेगी लेकिन पैदा करने वाला वैसे ही फटेहाल रहेगा क्योंकि मौज करेगा दलाल। देश का रहेगा यही हाल। अरण्य रोदन करने वाले यही करते रहेंगे क्योंकि उनमें से कोई भी सत्ता के गलियारों तक पहुँच ही नहीं सकता। जय भारत।

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