एक रुका हुआ फैसला
कभी मौका लगे तो यह फिल्म देखिएगा, काफी अच्छी है, मुझे तो लगी, हो सकता है आप को भी अच्छी लगे। एक और बहुत महत्वपूर्ण फैसला /मुकदमा है जो शायद पचास या अधिक वर्षों से लंबित है। आपलोग समझ ही गए होंगे कि मैं किस मुक़दमे की बात कर रहा हूँ, राम-जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद मुक़दमे की। न्याय-पालिका में आस्था रखते हुए मैं यह कहना चाहता हूँ कि इतना महत्वपूर्ण मुकदमा इतने लंबे समय से क्यों लंबित है? यह मुकदमा तो सभी पक्षकारों को, सरकारों को तथा वकीलों को जल्द से जल्द निपटवाना चाहिए था, जिस मुक़दमे या जिस वस्तु के कारण पूरे देश में असर पड़ता हो, तो क्या सभी सम्बंधित पक्षों की यह जिम्मेदारी नहीं है कि वे इस मुक़दमे को विशेष दर्जा देते हुये जल्दी से जल्दी निपटवायें। यह कितना दुर्भाग्य-पूर्ण है कि इस मुकदमे से सम्बन्धित कुछ महत्वपूर्ण ओरिजिनल दस्तावेज ही गायब हो गये। आखिर क्या कारण है कि इतने महत्वपूर्ण मुद्दे को निपटवाने में सम्बन्धित पक्ष और राजनीतिक दल भी बहुत उत्साहित दिखाई नहीं देते. जिस मसले को प्राथमिकता देकर निपटवाना चाहिये था उसके निर्णीत होने की सम्भावना अभी बहुत दूर है। आखिर कब इस मुकदमे का निपटारा हो सकेगा, क्योंकि जिस प्रकार से इस मुकदमे से सम्बन्धित दस्तावेज ही गुम गये हैं, शायद अदालत भी ऐसी स्थिति में असहाय ही महसूस कर रही होगी। बेहतर होता यदि यह मुद्दा एक ही बार में हमेशा के लिये निपट जाता।
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