दिल्ली में वकीलों ने जज को पीटा
आज एक ख़बर थी कि दिल्ली की तीसहजारी कोर्ट में वकीलों ने जज की किसी टिप्पणी से क्षुब्ध होकर जज से हाथापाई कर दी। मुझे नहीं पता कि जज ने क्या टिप्पणी की वकीलों पर। लेकिन बात यह है कि जो वकील इन्साफ के मार्ग पर चलने का दावा करते हैं, दुनिया के लिए क़ानून सिखाते, पढाते और दिखाते हैं वह स्वयम ही क़ानून का पालन करना उचित नहीं समझते। आख़िर ये किस प्रकार के वकील हैं, यदि जज ने कोई अशोभनीय टिप्पणी की थी तो उसके लिए भी क़ानून के दायरे में कार्रवाई की जा सकती है, लेकिन जज से हाथापाई करना कहाँ तक उचित है। यहाँ तो law-maker ही law-breaker बनते जा रहे हैं, जो अत्यन्त दुर्भाग्यपूर्ण है।
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