ममता जी ने बड़ी भलाई का काम किया

ममता जी ने पहली बार बड़ी होशियारी का काम कर दिया है. सबको धता बताते हुये उन्होंने अल्पसंख्यकों को परीक्षाओं में बैठने पर शुल्क से मुक्त कर दिया है. हालांकि महिलाओं के साथ भी ऐसा ही किया गया है, लेकिन इस सबसे बढ़कर यह कि कांग्रेस के सच्चर आयोग के पूरी तरह लागू होने से पहले ही उन्होंने अमोघ ब्रह्मास्त्र चला दिया है. वह दिन दूर नहीं कि बाकी सारे राज्य और केन्द्र सरकार भी देर सबेर ऐसा ही करने लगेंगी. जिनकी आंखें अब भी नहीं खुलीं वह अभी भी चेत जायें, अभी भी समय है, अन्यथा इस देश में आने वाले समय में या तो इस्लामिक राज्य होगा या फिर कई पाकिस्तान बन जायेंगे. अल्पसंख्यकों में आखिर मुस्लिमों के अलावा कौन सा धर्म है जो सत्ता के समीकरण बनाने बिगाड़ने की कूवत रखता है?? कोई नहीं. फिर यह कोई बहुत अधिक दूर या समय की बात नहीं, सिर्फ तीस प्रतिशत हिस्सेदारी पहुंचने दीजिये वोटों में. यही सब धर्मनिरपेक्ष नेता अपने लिये सेफ पैसेज तलाश रहे होंगे. बल्कि अधिक अच्छा हो कि मुसलमानों की आबादी में उनका निजाम अभी अलग कर दिया जाये, क्योंकि उनके लिये जब सब कुछ अलग है, सब कुछ विशेष है, संविधान संशोधन तक कर दिया जाता है तो एक अदद इस तरह की व्यवस्था भी बना दी जाये तो बेहतर हो. जिसमें उनका प्रशासन हो, उनकी व्यवस्था हो, वे अपने लोगों पर कर लगायें या कुछ भी करें, लेकिन कम से कम बाकियों के ऊपर कर का बोझ तो न पड़ेगा. और आज नहीं तो पन्द्रह-बीस बरस के अन्दर ही लोगों को इस सत्य का ज्ञान हो जायेगा. यह मात्र कोई छुपा डर या कपोल-कल्पना नहीं है, वोटिंग पैटर्न और मुस्लिम मतों के ध्रुवीकरण से हार-जीत के तथ्यों का अवलोकन/विश्लेषण करें, इसके प्रमाण मिल जायेंगे. जो काम सैकड़ों साल की गुलामी नहीं करा सकी वह काम मात्र साठ साल में कुछ इस तरह के धर्मनिरपेक्षियों ने कर दिखाया.

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